व्यायाम करना और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना हमारे दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हालांकि, कई बार जिम में पसीना बहाते समय लोगों के अचानक बेहोश होने या दिल का दौरा पड़ने की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आवश्यकता से अधिक एक्सरसाइज करना दिल की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के कैथ लैब्स के डायरेक्टर और सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर समीर गुप्ता के अनुसार, इसका जवाब न तो पूरी तरह हां में है और न ही ना में। व्यायाम अपने आप में कभी भी दिल के दौरे की वजह नहीं बनता है। बल्कि, नियमित शारीरिक गतिविधियां लंबे समय तक दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम करती हैं। लेकिन जिन लोगों की धमनियों में पहले से कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज या अन्य जोखिम कारक छिपे होते हैं, उनके लिए अचानक अत्यधिक तीव्र वर्कआउट करना खतरनाक साबित हो सकता है।
अचानक अधिक मेहनत पड़ सकती है भारी
कसरत करते समय दिल की धड़कन स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है और शरीर को सामान्य से अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यदि किसी व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में पहले से वसा या प्लाक जमा है और उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं है, तो भारी शारीरिक दबाव कुछ विशेष परिस्थितियों में उस प्लाक के टूटने का कारण बन सकता है। इसके परिणाम स्वरूप खून का थक्का जम सकता है, जो दिल की नस को अचानक ब्लॉक कर सकता है। जो लोग लंबे समय तक पूरी तरह निष्क्रिय रहते हैं और बिना किसी तैयारी के अचानक भारी वजन उठाना शुरू कर देते हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में होता है बड़ा अंतर
इन दोनों चिकित्सा स्थितियों के बीच के फर्क को अच्छी तरह समझना बहुत आवश्यक है। दिल के दौरे के दौरान हृदय को रक्त पहुंचाने वाली किसी नस में रुकावट आ जाती है, जबकि अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत प्रणाली यानी इलेक्ट्रिकल गतिविधि पूरी तरह गड़बड़ा जाती है और दिल रक्त पंप करना बंद कर देता है। हार्ट अटैक के वक्त व्यक्ति आमतौर पर होश में रहता है और उसे सीने में जकड़न, भारीपन, सांस फूलने या पसीना आने जैसी दिक्कतें महसूस हो सकती हैं। इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट होने पर इंसान पल भर में बेहोश होकर नीचे गिर जाता है और उसकी सामान्य सांसें रुक जाती हैं। हालांकि, कई बार गंभीर दिल का दौरा पड़ने के कारण भी कार्डियक अरेस्ट की स्थिति बन सकती है।
शारीरिक फिटनेस इस बात की गारंटी नहीं है कि दिल पूरी तरह स्वस्थ है
केवल कसरती शरीर या मस्कुलर बनावट इस बात का प्रमाण नहीं होती कि किसी व्यक्ति का दिल अंदर से पूरी तरह सुरक्षित है। कम उम्र के लोगों में भी कुछ जन्मजात या आनुवंशिक हृदय संबंधी विकार हो सकते हैं, जिनमें अत्यधिक मेहनत करने पर गंभीर स्वास्थ्य संकट का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान की आदत, मोटापा, शारीरिक सक्रियता का अभाव और परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारियों का इतिहास होना खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
व्यायाम करते समय इन संकेतों को कभी अनदेखा न करें
कसरत के दौरान सीने में किसी भी प्रकार की असहजता या दर्द को केवल साधारण थकान मानकर वर्कआउट जारी रखना जानलेवा हो सकता है। यदि इस दौरान निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सतर्क हो जाएं
- सीने के हिस्से में भारीपन, दबाव या जकड़न महसूस होना
- दर्द का फैलकर हाथ, कंधे, जबड़े, पीठ या गर्दन तक पहुंच जाना
- अचानक से बहुत तेज सांस फूलने लगना
- चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाकर बेहोशी महसूस होना
- शरीर से ठंडा पसीना निकलना
- मितली महसूस होना या उल्टी आना
- दिल की धड़कनों का असामान्य रूप से बहुत तेज या अनियमित हो जाना
यदि ऐसे लक्षण नजर आएं तो बिना किसी देरी के तुरंत कसरत रोक देनी चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करते हुए थोड़ा और कसरत करने की जिद करना भारी पड़ सकता है।
क्या जिम जाने से पहले हर व्यक्ति को कार्डियक जांच करानी चाहिए?
यह हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति जिसे किसी प्रकार के लक्षण नहीं हैं और दिल की बीमारी का कोई बड़ा जोखिम नहीं है, उसे केवल जिम ज्वाइन करने से पहले तमाम तरह के मेडिकल टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यदि किसी को पहले से हृदय रोग है, परिवार में कम उम्र में दिल के दौरे का इतिहास रहा है, कसरत के दौरान सीने में दर्द या असामान्य सांस फूलने की समस्या होती है, या बार-बार चक्कर आने की शिकायत रहती है, तो उन्हें वर्कआउट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
जिम से डरने की नहीं, बल्कि सूझबूझ से एक्सरसाइज करने की आवश्यकता है
सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को वर्कआउट के दौरान अचानक गिरते हुए देखकर यह निष्कर्ष निकाल लेना कि जिम जाने से दिल का दौरा पड़ता है, बिल्कुल गलत है। अधिकांश लोगों के लिए नियमित व्यायाम दिल की रक्षा ही करता है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य पृष्ठभूमि को समझे बिना अचानक बेहद भारी वजन उठाने या उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट करने लगता है। इसलिए कसरत बंद करने की नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से अपनाने की जरूरत है। धीरे-धीरे शुरुआत करें, अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तीव्रता बढ़ाएं, हमेशा वार्म-अप करें और शरीर से मिलने वाले किसी भी चेतावनी भरे संकेत को नजरअंदाज न करें।



















