दैनिक खानपान में परिष्कृत सफेद चीनी को सेहत के लिए नुकसानदेह मानकर कई लोग तेजी से पारंपरिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। चाय, दूध और रोजमर्रा के मीठे व्यंजनों में रिफाइंड चीनी की जगह गुड़, शहद अथवा खजूर पाउडर को शामिल करना अब एक आम चलन बन चुका है। आमतौर पर यह धारणा बनी हुई है कि प्राकृतिक स्रोत से मिलने वाला हर मीठा विकल्प सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है और शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नहीं बिगाड़ता। हालांकि, न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस कोच लीमा महाजन के अनुसार केवल प्राकृतिक होना ही किसी स्वीटनर को सुरक्षित नहीं बनाता, बल्कि शरीर में जाकर वह ग्लूकोज को कितनी तेजी से बढ़ाता है, यह समझना बेहद जरूरी है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स का पैमाना और अलग-अलग स्वीटनर की स्थिति
शरीर में कार्बोहाइड्रेट कितनी तेजी से ग्लूकोज में बदलकर रक्तप्रवाह में पहुंचता है, इसे मापने का पैमाना ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहलाता है। इस पैमाने पर जब हम रोजमर्रा के विभिन्न विकल्पों की तुलना करते हैं, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। अक्सर सबसे गुणकारी माना जाने वाला गुड़ वास्तव में रिफाइंड चीनी से भी ज्यादा तेजी से रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा सकता है। लीमा महाजन बताती हैं कि गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 84 से 86 के बीच दर्ज होता है, जबकि साधारण सफेद चीनी का स्तर लगभग 65 के आसपास रहता है। ऐसे में गुड़ का नियमित या बेलगाम इस्तेमाल डायबिटीज के मरीजों में अचानक गंभीर शुगर स्पाइक पैदा कर सकता है।
दूसरी तरफ शहद की प्रकृति गुड़ की तुलना में काफी अलग परिणाम दिखाती है। शहद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 45 के आसपास होता है, जो गुड़ की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण शहद शरीर में शर्करा को अचानक बहुत ऊपर नहीं ले जाता और इसका असर मॉडरेट यानी मध्यम रहता है। इसी वजह से स्वस्थ व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन पांच ग्राम तक की सीमित मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित माना जा सकता है।
खजूर पाउडर का विश्लेषण करने पर सामने आता है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी करीब 40 से 50 के बीच रहता है, जो लगभग शहद के समानांतर बैठता है। हालांकि, खजूर पाउडर की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद फाइबर की अधिक मात्रा है। उच्च फाइबर सामग्री के कारण इसका ग्लाइसेमिक लोड शहद की तुलना में कम रह सकता है। इसके बावजूद यह तथ्य बरकरार रहता है कि खजूर पाउडर रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ा सकता है, भले ही शहद और गुड़ के मुकाबले इसकी गति और तीव्रता काफी कम देखने को मिले।
शून्य ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले पौधे आधारित विकल्प
रक्त में ग्लूकोज बढ़ाए बिना मिठास हासिल करने के लिए स्टीविया को एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। स्टीविया मूल रूप से एक नेचुरल स्वीट प्लांट यानी प्राकृतिक मीठा पौधा है। इसकी पत्तियों से मिलने वाला अर्क सफेद चीनी की तुलना में लगभग 200 से 300 गुना अधिक मीठा होता है। इसकी सबसे अहम वैज्ञानिक विशेषता यह है कि इसमें कैलोरी की मात्रा शून्य होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी बिल्कुल जीरो दर्ज किया जाता है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह शरीर में प्रवेश करने के बाद ब्लड शुगर स्पाइक बिल्कुल नहीं करता।
इसी प्रकार फ्रूट स्वीटनर भी एक ऐसा प्राकृतिक विकल्प बनकर उभरा है जो साधारण चीनी की तुलना में 150 से 200 गुना अधिक मीठा होता है। फ्रूट स्वीटनर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी शून्य रहता है, जिसके चलते यह भी शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाए बिना मिठास का अनुभव प्रदान करता है।
स्वास्थ्य लक्ष्यों के हिसाब से सबसे उपयुक्त चुनाव
लीमा महाजन के मुताबिक डायबिटीज, पीसीओडी और वजन घटाने की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों के लिए स्टीविया और फ्रूट स्वीटनर का संतुलित उपयोग सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह विकल्प न केवल अतिरिक्त कैलोरी से बचाते हैं, बल्कि इंसुलिन संतुलन को बिगड़ने से भी रोकते हैं। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है कि बाजार में मिलने वाले किसी भी ऐसे उत्पाद को खरीदने से पहले जिसमें कृत्रिम या प्रसंस्कृत स्वीटनर का इस्तेमाल हुआ हो, उसके लेबल और उसमें शामिल अन्य सामग्रियों की गहन जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।


















