कड़कड़ाती ठंड के मौसम में सुबह गर्म रजाई छोड़कर बाहर निकलना किसी बड़ी चुनौती जैसा लगता है। घड़ी का अलार्म बजने के बाद भी बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता और थोड़ी देर और सोने की इच्छा बनी रहती है। जब सुबह का तापमान काफी गिर जाता है, तब पूरा शरीर सुस्त नजर आता है और मांसपेशियों में एक अजीब सी जकड़न महसूस होती है। यही वजह है कि सालभर नियमित कसरत करने वाले लोगों के लिए भी सर्दियों की सुबह का वर्कआउट जारी रखना काफी भारी और मुश्किल लगने लगता है।
हालांकि, ठंड का मौसम आ जाने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि शारीरिक फिटनेस की आदत ही पूरी तरह छोड़ दी जाए। इस मौसम में बस अपने कसरत करने के तौर-तरीकों में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत होती है। जब शरीर को अचानक किसी तेज या कठिन एक्सरसाइज में झोंकने के बजाय धीरे-धीरे एक्टिव किया जाए, तो सुबह का पूरा वर्कआउट रूटीन बहुत सहज और आसान बन सकता है।
सर्दियों में क्यों महसूस होती है मांसपेशियों में जकड़न?
डॉ. राजकुमार (आयुष) के अनुसार सर्दियों की सुबह सोकर उठते ही शरीर का तापमान सामान्य दिनों के मुकाबले कम महसूस हो सकता है। रातभर एक ही स्थिति में लंबे समय तक सोने के कारण शरीर की मांसपेशियां तुरंत सक्रिय नहीं हो पाती हैं। ऐसी स्थिति में सोकर उठते ही सीधे तेज दौड़ लगाना, हैवी कार्डियो शुरू कर देना या कोई भारी कसरत करना शारीरिक परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए सबसे अहम बात यह है कि कोई भी मुख्य वर्कआउट शुरू करने से पहले शरीर को उसके अनुकूल तैयार किया जाए।
1. कसरत शुरू करने से पहले 5-10 मिनट का वार्मअप जरूरी
ठंडे मौसम में एक्सरसाइज करने से ठीक पहले वार्मअप की प्रक्रिया को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मुख्य कसरत से पहले अपने कमरे में ही थोड़ी देर टहला जा सकता है, हाथ और पैरों को धीरे-धीरे हिलाया जा सकता है, हल्की स्ट्रेचिंग की जा सकती है, या फिर स्पॉट जॉगिंग और कुछ आसान शारीरिक मूवमेंट किए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया से सुस्त पड़ा शरीर धीरे-धीरे एक्टिव मोड में आ जाता है और मांसपेशियों में महसूस होने वाली अकड़न भी कम हो जाती है। वार्मअप जितना सरल, आसान और आरामदायक रहेगा, आगे का वर्कआउट शुरू करना उतना ही सहज लगेगा।
2. शुरुआत हमेशा हल्की कसरत और आसान योग से करें
यदि कोई व्यक्ति सर्दियों के दिनों में पहली बार सुबह के वक्त कसरत की शुरुआत कर रहा है, तो पहले ही दिन से बहुत ज्यादा जोर या मेहनत लगाने की आवश्यकता नहीं होती। शुरुआती दिनों में 15-20 मिनट की हल्की एक्सरसाइज, सामान्य वॉक या आसान योगासनों से शुरुआत की जा सकती है। अपने शरीर को बदलते मौसम के मिजाज के अनुरूप ढलने के लिए थोड़ा वक्त देना चाहिए। कुछ दिन लगातार अभ्यास करने के बाद जब शरीर अभ्यस्त हो जाए, तब अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार वर्कआउट की अवधि और उसकी इंटेंसिटी धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।
3. मौसम के अनुकूल सही कपड़ों का चयन करें
सर्दियों के समय कसरत करते हुए कपड़ों के चयन पर खास ध्यान देना बहुत जरूरी माना जाता है। बहुत पतले कपड़े पहनकर सीधे सुबह की ठंडी हवा में निकल जाने से असहजता बढ़ सकती है और ठंड लग सकती है। इसके विपरीत यदि जरूरत से ज्यादा मोटे कपड़े पहन लिए जाएं, तो कसरत के दौरान शरीर से बहुत ज्यादा गर्मी निकलने लगती है और पसीना परेशान कर सकता है। इसलिए ऐसे आरामदायक कपड़े पहनने चाहिए जिन्हें शरीर गर्म होने पर जरूरत के अनुसार उतारा जा सके या ठंड लगने पर दोबारा पहना जा सके। अगर कोई बाहर खुले में वर्कआउट कर रहा है, तो उसे सिर, कान और हाथों को सर्द हवाओं से ढककर बचाना बेहतर रहता है।
4. सुबह उठते ही शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें
अक्सर कई लोग अलार्म की घंटी बजते ही फौरन बिस्तर से उठकर बिना रुके एक्सरसाइज शुरू करने की कोशिश करते हैं। सर्दियों के मौसम में ऐसा तरीका शरीर के लिए और अधिक मुश्किल पैदा कर सकता है। सोकर उठने के बाद कुछ मिनट तक शरीर को सामान्य स्थिति में आने का वक्त दें। थोड़ा पानी पिएं, कमरे के भीतर ही हल्का टहलें और फिर आराम से वार्मअप शुरू करें। इसके अलावा अगर किसी दिन शरीर बहुत अधिक थका हुआ महसूस हो रहा हो, तो उस दिन सिर्फ हल्की वॉक या साधारण स्ट्रेचिंग कर लेना भी पर्याप्त रहता है। हर दिन एक जैसी कड़ी मेहनत वाला वर्कआउट करना अनिवार्य नहीं है।
5. जरूरत महसूस होने पर वर्कआउट का समय बदलें
यदि सुबह के समय तापमान बहुत ज्यादा कम रहता है और तमाम प्रयासों के बाद भी उस पहर कसरत करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो वर्कआउट का समय बदल लेना एक सही फैसला है। दिन के समय जब धूप निकल आए और मौसम थोड़ा गर्म हो जाए, तब बाहर वॉक की जा सकती है, योग किया जा सकता है या अन्य एक्सरसाइज की जा सकती है। पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि व्यायाम करने का नियमित अभ्यास टूटने न पाए। केवल इसलिए फिटनेस रूटीन को छोड़ देना बिल्कुल सही नहीं है क्योंकि वह सुबह के तय वक्त पर नहीं हो पा रहा है।



















