गहरी नींद में एक बेहद सुकून देने वाला ख्वाब चल रहा था, जिसमें ऐसा लगा कि वॉशरूम में बैठकर पूरी तरह तनावमुक्त हुआ जा रहा है। शरीर का सारा दबाव अचानक खत्म होने जैसा सुखद अहसास हो रहा था, लेकिन जब अचानक आंख खुली, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कोई सुखद सपना नहीं था, बल्कि हकीकत में बिस्तर पूरी तरह गीला हो चुका था। सबसे खौफनाक बात यह थी कि यह किसी का अपना कमरा नहीं था, बल्कि उस नए साथी का बिस्तर था जिसके साथ पहली बार वीकेंड बिताने का फैसला लिया गया था। गद्दा पूरी तरह भीग चुका था और कमरे में सिर्फ घुटन भरी खामोशी पसरी थी। जिंदगी के कुछ हादसे इंसान के जेहन में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं, और यह रात भी बिल्कुल ऐसी ही थी जिसे चाहकर भी कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मुलाकात की शुरुआत और अनदेखी चेतावनियां
इस रिश्ते की शुरुआत करीब एक महीने पहले एक रिटेल स्टोर में हुई थी। एक करीबी सहेली के साथ खरीदारी करते वक्त अचानक जूलियन सामने आया और उसने बातचीत शुरू कर दी। उस दौर में लंबे समय से किसी पुरुष का ध्यान न मिलने के कारण मन में एक खालीपन था, इसलिए किसी अजनबी से इस तरह की तवज्जो मिलना बहुत रोमांचक लगा था। उसने काम की पोशाक देखकर पूछा था कि क्या स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा कोई काम है, और उसी एक सवाल ने बातचीत का दरवाजा खोल दिया। सहेली थोड़ा किनारे हट गई ताकि बातचीत में खलल न पड़े, और करीब पंद्रह मिनट की हल्की-फुल्की हंसी-मजाक के बाद फोन नंबर का आदान-प्रदान हो गया। उस वक्त चेहरे पर एक संतोष भरी मुस्कान थी, लेकिन वक्त ने बाद में साबित किया कि उस मुस्कान के पीछे कितनी बड़ी गलती छिपी हुई थी।
जूलियन उम्र में काफी बड़ा था और उसका मिजाज भी वैसा नहीं था जैसा आमतौर पर पसंद आता है। पिछले एक साल से पूरी तरह अकेले रहने की वजह से उस वक्त किसी भी तरह का ध्यान बहुत लुभावना लग रहा था। यही अकेलापन था जिसने उसकी हर एक बुरी आदत और चेतावनी भरे संकेतों पर पर्दा डाल दिया था। फोन पर बात करते समय वह अक्सर पड़ोसियों पर चिल्लाने लगता था और अपनी गाड़ी के पास बच्चों के खेलने पर गालियां बकने लगता था। उसने कई बार अस्पताल में नाइट शिफ्ट के दौरान मिलने आने या घर आने के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन कभी अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया। इतना ही नहीं, उसके पास बातचीत का सबसे पसंदीदा विषय सिर्फ अपनी पुरानी प्रेमिका की तारीफें करना था। एक बार तो एक रेस्तरां में खाना खाते वक्त उसने बेहद असभ्य तरीके से उंगलियां चटकाकर इशारा किया, जिससे शर्म से सिर झुक गया और वेटर की तरफ देखना भी दूभर हो गया था।
शारीरिक आकर्षण और स्वार्थी व्यवहार का अहसास
तमाम असभ्य हरकतों और कड़वे बर्ताव के बावजूद दोनों के बीच एक गहरा शारीरिक खिंचाव बना हुआ था। साथ वक्त बिताते समय आकर्षण इतना तीव्र हो जाता था कि बाकी सारी खामियां कुछ पलों के लिए पीछे छूट जाती थीं। वास्तव में उस रिश्ते से क्या चाहिए था, यह साफ नहीं था; बस किसी का साथ होना और किसी की नजरों में खुद को खास महसूस करना ही उस समय बहुत बड़ी राहत लग रहा था। इसी वजह से जब उसने शुक्रवार को मैसेज करके पूरे सप्ताहांत साथ रुकने का न्योता दिया, तो बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत हामी भर दी गई। इससे पहले कभी उसके घर रात नहीं बिताई गई थी, इसलिए बैग पैक करते समय मन में केवल रोमांच और नजदीकियों की उम्मीद तैर रही थी।
वह वीकेंड शारीरिक रूप से काफी सक्रिय रहा और दोनों एक-दूसरे से दूर नहीं रह पा रहे थे, हालांकि बात पूर्ण संभोग तक नहीं पहुंची थी। लेकिन उस नजदीकी के बीच भी एक कड़वी हकीकत साफ नजर आने लगी कि वह केवल अपनी संतुष्टि की परवाह करता था। अंतरंगता के पलों में सारा समर्पण सिर्फ एक तरफ से हो रहा था, जबकि उसकी तरफ से कोई खास भावनात्मक या शारीरिक प्रयास नहीं था। उसी दौरान मन ही मन यह तय कर लिया गया था कि यह सप्ताहांत खत्म होते ही इस रिश्ते को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया जाएगा और उससे दूरी बना ली जाएगी। यह बात पूरी तरह समझ आ चुकी थी कि चाहे शारीरिक आकर्षण कितना भी गहरा क्यों न हो, वह इंसान कभी सम्मानजनक व्यवहार नहीं कर सकता।
आधी रात की दहशत और छुपाने की नाकाम कोशिश
रविवार की रात जब सोने का वक्त आया, तो वह दूसरे कमरे में अपने काम में व्यस्त था। दिनभर की थकान और मन में चल रही कड़वाहट के बीच अकेले ही बिस्तर पर लेटकर सोने की कोशिश की गई। नींद आने के कुछ देर बाद वही अजीब सपना शुरू हुआ और आंख खुलते ही सामने एक भयानक त्रासदी खड़ी थी। चारों तरफ अंधेरा था और गद्दे का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह गीला हो चुका था। हड़बड़ाहट में बिस्तर से उठकर नुकसान का जायजा लिया गया, लेकिन स्थिति बेहद खराब थी। कमरे की बत्ती जलाने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि डर था कि रोशनी देखकर वह अंदर न आ जाए। उस अंधेरे कमरे में कुछ पल के लिए पैर जैसे सुन्न होकर जम गए थे और समझ नहीं आ रहा था कि इस मुसीबत से कैसे निपटा जाए।
काफी देर तक सहमे रहने के बाद एक युक्ति सूझी और रजाई को मोड़कर उस भीगे हुए गद्दे के ऊपर अच्छी तरह बिछा दिया गया। गीले कपड़ों को चुपचाप अपने बैग में नीचे दबा दिया गया और उसके अलमारी से एक शॉर्ट्स निकालकर पहन लिया गया। इसके बाद खुद रजाई के ठीक ऊपर लेटकर यह उम्मीद की जाने लगी कि शायद रजाई उस नमी और महक को अपने अंदर सोख लेगी। दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसकी आवाज कानों में गूंज रही थी। तभी दरवाजे की तरफ किसी के आने की आहट सुनाई दी, जिससे घबराहट कई गुना बढ़ गई। मन ही मन बस यही प्रार्थना चल रही थी कि वह रजाई को अपनी तरफ न खींचे। खुशकिस्मती से उसने रजाई नहीं हटाई, लेकिन उस खौफ और बेचैनी की वजह से पूरी रात एक पल के लिए भी पलकें नहीं झपकाई जा सकीं।
सुबह का सच और अप्रत्याशित प्रतिक्रिया
सुबह जब वह उठकर बाथरूम गया, तो चुपके से रजाई के नीचे हाथ डालकर देखा गया। नमी थोड़ी कम जरूर हुई थी, लेकिन बदबू और गीलापन ऐसा नहीं था जिसे छुपाया जा सके। यह साफ हो गया था कि अब झूठ बोलने या भागने की कोई गुंजाइश नहीं बची है और सच का सामना करना ही पड़ेगा। जैसे ही वह शौचालय से बाहर निकला, गले की खराश साफ करते हुए बेहद भारी मन से उसका नाम पुकारा गया। जब उसने मुड़कर देखा, तो नजरें नीचे झुकाए हुए कांपती जुबान से सच उगल दिया गया कि नींद में सपने की वजह से बिस्तर पर पेशाब निकल गया और यह जानबूझकर बिल्कुल नहीं किया गया था।
उस वक्त दिल में डर था कि शायद वह बहुत बुरी तरह डांटेगा, उपहास उड़ाएगा या कोई तीखा ताना मारेगा। लेकिन जब धीरे से आंखें उठाकर देखा गया, तो उसके चेहरे पर एक शांत और समझदारी भरी मुस्कान थी। उसने बिना कोई गुस्सा दिखाए सीधे चादर और गद्दे के कवर को उतारना शुरू कर दिया। उसने बहुत सहज अंदाज में कहा, “चिंता मत करो, ऐसा हो जाता है।” उसके मुंह से यह शब्द सुनना और उसका गंदे कपड़ों को बैग में भरना देखना पूरी तरह अप्रत्याशित था। जिस इंसान से पूरे हफ्ते सिर्फ बेरुखी और अहंकार की उम्मीद थी, उसका यह नरम रवैया किसी अजूबे से कम नहीं लगा।
अंतिम विदाई और आत्मसम्मान का फैसला
इसके बाद दोनों उसकी गाड़ी की तरफ बढ़े, जहां उसने भीगी हुई चादरों का बैग पीछे रख दिया ताकि उन्हें लॉन्ड्री में दिया जा सके। घर लौटने के पूरे सफर में दोनों के बीच सन्नाटा छाया रहा और गाड़ी में एक भी शब्द नहीं बोला गया। मंजिल पर पहुंचकर सिर्फ एक औपचारिक अलविदा कहा गया और वह गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया। उसके जाते ही सबसे पहला काम उसका नंबर फोन से हमेशा के लिए ब्लॉक करने का किया गया। उस एक सुबह की सहानुभूति और नरमी उसके पुराने खराब बर्ताव को मिटाने के लिए काफी नहीं थी। मन के किसी कोने में यह भी साफ था कि शायद वह भी अब दोबारा संपर्क करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखेगा।
इस पूरे वाकये के बाद कई दिनों तक यह ख्याल जेहन में आता रहा कि उसने उस भीगे हुए गद्दे को कैसे साफ किया होगा, क्या उसने अपने दोस्तों के सामने इस अजीब घटना का मजाक बनाया होगा या मेरे बारे में कोई भद्दी बातें कही होंगी। लेकिन धीरे-धीरे इस बात का अहसास हुआ कि उसने पूरे रिश्ते के दौरान जिस तरह का घटिया और गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाया था, उसके आगे यह हादसा कुछ भी नहीं था। अंत में सिर्फ यही विचार सुकून देता है कि भले ही वह सुबह बेहद शर्मनाक रही हो, लेकिन उसने उस इंसान की असलियत पूरी तरह सामने लाकर हमेशा के लिए उस गलत रिश्ते से बाहर निकलने का रास्ता साफ कर दिया।



















