फैशन की आधुनिक दुनिया में जहां इन दिनों हीरे और पन्ना जैसे रत्नों से सजे आभूषणों का जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है, वहीं बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम अपने विशुद्ध सोने के गहनों के चयन को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। अपनी शादी के खास अवसर पर उन्होंने किसी दिखावे के बजाय सिर्फ पारंपरिक सोने के आभूषण पहनना पसंद किया था, जिसने उनकी सुंदरता में एक सादा और ठेठ देसी आकर्षण जोड़ दिया था। सबसे खास बात यह है कि वह अपने इन कीमती और पारंपरिक आभूषणों को बार-बार अलग-अलग मौकों पर दोहराने में भी कोई झिझक नहीं दिखाती हैं। उनके निजी संग्रह में पहाड़ की संस्कृति दर्शाने वाली खूबसूरत हिमाचली नथ से लेकर कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले देझूर तक कई अनूठे गहने मौजूद हैं। यदि कोई भी पारंपरिक, सुरुचिपूर्ण और सदाबहार अंदाज अपनाना चाहता है, तो इस तरह के आभूषण हमेशा एक बेहतरीन प्रेरणा साबित होते हैं।
शादी के जोड़े में दिखा था पारंपरिक आभूषणों का वैभव
जब भी यामी गौतम के गहनों और फैशन की चर्चा होती है, तो उनकी शादी का ब्राइडल रूप सबसे पहले याद आता है। लाल रंग की शादी की साड़ी के साथ उन्होंने बेहद नफासत से तैयार किए गए पारंपरिक सोने के गहने धारण किए थे। उनके माथे पर सजा बड़ा गोल मांगटीका और चेहरे पर दमकती विशाल हिमाचली नथ उनके समूचे रूप को एक अलौकिक आकर्षण प्रदान कर रही थी। इसके साथ ही गले में पारंपरिक सोने का हार, कानों में उससे मेल खाते सुंदर झुमके या ईयररिंग, हाथों में ठोस सोने के कड़े और उंगली में पहनी गई एक बड़ी सोने की अंगूठी ने उनके इस ब्राइडल लुक को देवी स्वरूप जैसी गरिमा बख्शी थी।
दिवाली पूजा पर बड़ी चांद बालियों और कड़ों का सादगी भरा मेल
त्योहारों के अवसर पर भी उनका आभूषण चयन हमेशा सादगी और परंपरा के संगम को दर्शाता है। दिवाली पूजा के दौरान उन्होंने नीले रंग के खूबसूरत सूट के साथ अपने कानों में बड़ी और नक्काशीदार सोने की चांद बालियां पहनी थीं। इस परिधान के साथ उन्होंने हाथों में वही सोने के कड़े पहने थे जो उनकी शादी के गहनों का हिस्सा रहे हैं। बिना किसी अतिरिक्त तड़क-भड़क के केवल इन पारंपरिक बालियों और शादी के कड़ों ने उनके पूरे अंदाज को बेहद शालीन और मनमोहक बना दिया था। सामान्य तौर पर किसी भी पारंपरिक सूट या साड़ी के साथ इस तरह की चांद बालियां एक संतुलित और आकर्षक रूप देती हैं।
रीति-रिवाजों के साथ चांदी की लेयर्ड पायल और बिछुए
फिल्म जगत की आम शादियों से हटकर उन्होंने अपनी शादी के प्रत्येक पारंपरिक रीति-रिवाज को पूरे नियमों और सादगी के साथ निभाया था। विवाह की रस्मों के दौरान उनकी बहन द्वारा निभाई गई एक रस्म के समय उनके पैरों में बेहद सुंदर और कई परतों यानी लेयर्स वाली चांदी की पायल दिखाई दी थी। इसके साथ ही उन्होंने पैरों की उंगलियों में चांदी के पारंपरिक बिछुए भी पहन रखे थे। इसी रस्म के दौरान उनके चेहरे पर लाल मोतियों के बारीक काम से सजी पारंपरिक नथ भी मौजूद थी, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सम्मान को साफ जाहिर करती है।
कश्मीरी देझूर से मिला आधुनिक और पारंपरिक मिश्रण
यामी गौतम के आभूषण संग्रह का एक और बेहद खास हिस्सा कश्मीरी देझूर है, जिसे वह अक्सर विभिन्न आयोजनों में पहने नजर आती हैं। उनके पास अलग-अलग बारीकियों और बनावट वाले देझूर के कई सुंदर डिजाइन मौजूद हैं। पारंपरिक सलवार सूट के साथ जब इन लंबे सोने के देझूर को पहना जाता है, तो यह साधारण परिधान को भी एक बेहद विशिष्ट और शाही लुक में बदल देता है। जो महिलाएं अपनी वेशभूषा में कुछ अलग और सांस्कृतिक जोड़ना चाहती हैं, उनके लिए इस प्रकार के सोने के देझूर बेहद अनूठे साबित हो सकते हैं।
क्या है देझूर का सांस्कृतिक और वैवाहिक महत्व
मौजूदा फैशन के गलियारों में देझूर एक लोकप्रिय आभूषण के रूप में उभरा है। इसकी बनावट में एक लंबी सोने की चेन कान से नीचे लटकती है जिसके निचले सिरे पर विशेष सांस्कृतिक रूपांकन या ज्यामितीय डिजाइन बना होता है। कश्मीरी पंडित समाज में इसे अत्यंत पवित्र और अनिवार्य आभूषण माना जाता है। विवाह के पश्चात महिलाएं इसे अपने कानों में धारण करती हैं। भारतीय परंपरा में जिस प्रकार मंगलसूत्र और सिंदूर को अखंड सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार कश्मीरी संस्कृति में देझूर को वैवाहिक निष्ठा और सुहाग के पावन प्रतीक के रूप में पूजा और पहना जाता है।



















