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झारखंड के किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ लगाए चंदन के 50 पेड़, भविष्य में 50 लाख की आमदनी का लक्ष्यझारखंड
6 अक्तू॰ 2026, 1:03 pm (1 घंटे पहले)· 1

झारखंड के किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ लगाए चंदन के 50 पेड़, भविष्य में 50 लाख की आमदनी का लक्ष्य

पलामू के किसान सतीश दुबे ने नागपुर से चंदन के पौधे मंगाकर अपने खेत में लगाए हैं, जहां 15 से 20 वर्षों के भीतर पेड़ों की कीमती लकड़ी से लाखों रुपये कमाने की तैयारी की जा रही है।

झारखंड के पलामू जिले में पारंपरिक फसलों से अलग हटकर खेती करने का एक नया प्रयोग देखने को मिला है। बसना गांव के रहने वाले किसान सतीश दुबे ने अपनी जमीन पर चंदन की खेती शुरू की है। उन्होंने खेत में कुल 50 चंदन के पौधे लगाए हैं, जिन्हें वे आने वाले वर्षों के लिए एक ठोस और सुरक्षित आर्थिक निवेश मान रहे हैं। सामान्य खेती के मुकाबले चंदन तैयार होने में काफी वक्त लेता है, लेकिन बाजार में इसकी लकड़ी और सुगंध की भारी मांग किसानों को इस दिशा में आकर्षित कर रही है।

नागपुर से मंगाए गए पौधे और शुरुआती विकास

सतीश दुबे ने करीब तीन वर्ष पहले महाराष्ट्र के नागपुर से ये पौधे मंगवाए थे। उस समय प्रत्येक पौधे की खरीद लागत लगभग 100 रुपये आई थी। खेत में रोपे जाने के बाद से इन पौधों की देखरेख नियमित रूप से की जा रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान पेड़ों की बढ़वार काफी संतोषजनक रही है और कई पेड़ अब 8 से 10 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं। किसान ने पारंपरिक फसलों के साथ ही चंदन को भी अपने कृषि रकबे में जगह दी है, ताकि नियमित खेती प्रभावित हुए बिना दीर्घकालिक लाभ हासिल किया जा सके।

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सुगंध और परिपक्वता का समय चक्र

चंदन के पेड़ की सबसे प्रमुख विशेषता उसकी भीनी और टिकाऊ खुशबू मानी जाती है। पेड़ जैसे-जैसे विकसित होता है, उसके भीतरी तने में सुगंध का निर्माण शुरू होता है। सतीश दुबे के अनुसार, रोपण के करीब 8 से 10 वर्ष बीत जाने के बाद इन पेड़ों में प्राकृतिक सुगंध आने की उम्मीद है। हालांकि, व्यावसायिक दृष्टिकोण से लकड़ी को पूरी तरह परिपक्व होने में कम से कम 10 से 15 वर्ष अथवा उससे भी अधिक का लंबा समय लग सकता है। इसी वजह से यह मॉडल तुरंत पैसे देने के बजाय एक सुनियोजित भविष्य निधि की तरह काम करता है।

दीर्घकालिक योजना से 50 लाख रुपये की कमाई की उम्मीद

बाजार में चंदन की लकड़ी की कीमतें हमेशा ऊंची रहती हैं और विभिन्न उद्योगों में इसकी निरंतर खपत बनी रहती है। इसी आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए किसान ने इन 50 पेड़ों को खेत में लंबे समय तक सहेजकर रखने का फैसला किया है। उनका अंतिम लक्ष्य करीब 15 से 20 वर्षों के अंतराल के बाद इन परिपक्व पेड़ों से बड़ा आर्थिक लाभ कमाना है। सतीश दुबे को पूरा भरोसा है कि अगर बाजार में पेड़ों की बिक्री सही मूल्य पर हुई, तो इन 50 पेड़ों से उन्हें लगभग 50 लाख रुपये तक की आमदनी प्राप्त हो सकती है।

सवाल-जवाब

सतीश दुबे किस जिले और गांव के निवासी हैं?
सतीश दुबे झारखंड के पलामू जिले के बसना गांव के निवासी हैं।
उन्होंने खेत में चंदन के कितने पौधे लगाए हैं?
उन्होंने अपने खेत में चंदन के कुल 50 पौधे लगाए हैं।
चंदन के पौधे कहां से मंगवाए गए थे और एक पौधे की कीमत क्या थी?
ये पौधे करीब तीन साल पहले नागपुर से मंगवाए गए थे और उस समय एक पौधे की कीमत लगभग 100 रुपये थी।
तीन साल बाद पौधों की लंबाई कितनी हो चुकी है?
तीन वर्षों की देखरेख के बाद कई पौधों की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच चुकी है।
चंदन के पेड़ों में सुगंध आने और उनके तैयार होने में कितना समय लगता है?
पेड़ों में खुशबू आने की उम्मीद 8 से 10 वर्ष बाद है, जबकि व्यावसायिक रूप से तैयार होने में 10 से 15 वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है।
किसान को 15 से 20 साल बाद इन 50 पेड़ों से कितनी आमदनी की उम्मीद है?
सतीश दुबे को उम्मीद है कि 15 से 20 साल बाद इन 50 परिपक्व पेड़ों से करीब 50 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·26 मिनट पहले

15-20 साल तक इंतजार कौन करेगा भाई? आज के जमाने में इतना लंबा रिस्क लेना बहुत मुश्किल है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 मिनट पहले

रविकेश भाई, 100 रुपये का एक पौधा अगर 20 साल में एक लाख बन जाए, तो थोड़ा रिस्क लेना तो बनता है यार!

Rohan Verma@rohan-verma·46 मिनट पहले

पारंपरिक खेती से हटकर ऐसा जोखिम उठाना बड़ी बात है। पलामू के किसान ने भविष्य के लिए बढ़िया दांव खेला है, बस बीस साल तक पेड़ों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

रोहन भाई, सुरक्षा तो ठीक है पर झारखंड में बीस साल तक लकड़ी चोरी से बचाना आसान नहीं होगा।

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