छत्तीसगढ़ राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को जल्द ही बढ़ा हुआ मानदेय मिलने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए उनके मासिक स्टाइपेंड में बड़ा इजाफा करने का फैसला किया है। अब इन इंटर्न्स को 15,900 रुपये की जगह हर महीने 25,000 रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। इस फैसले के बाद इंटर्न डॉक्टरों के संगठन ने अपने प्रस्तावित प्रदर्शन को आगामी 30 अगस्त तक रोकने का निर्णय लिया है।
रायपुर में हुई सकारात्मक बैठक और लिखित आश्वासन
यह राहत भरा फैसला राजधानी रायपुर में हुई एक महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान सामने आया। शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तृत रूप से रखा था। वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को सर्वथा जायज माना और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का लिखित भरोसा दिया। मंत्री के इस सकारात्मक रुख के बाद इंटर्न्स ने अपने आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का ऐलान किया है।
सितंबर से खाते में आएगी बढ़ी हुई राशि
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क (IMA-MSN) छत्तीसगढ़ के प्रदेश संयोजक शाहदिल खुसरू ने वार्ता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक औपचारिकताएं और विभागीय फाइलिंग की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद सितंबर महीने से डॉक्टरों के बैंक खातों में 25,000 रुपये की संशोधित राशि जमा होनी शुरू हो जाएगी।
मांग पूरी न होने पर आगे की रणनीति का विकल्प
स्टाइपेंड बढ़ोतरी के ठोस आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टरों ने राहत की सांस ली है, हालांकि उन्होंने अपनी सतर्कता भी बनाए रखी है। IMA-MSN और इंटर्न डॉक्टर संघ ने संयुक्त रूप से कहा है कि वे सरकार की इस पहल का स्वागत करते हैं और इसीलिए 30 अगस्त तक अपनी हड़ताल रोक रहे हैं। हालांकि, यदि तय समय सीमा के भीतर बढ़ा हुआ मानदेय जारी नहीं किया जाता है, तो डॉक्टर भविष्य के कदम उठाने और नई रणनीति तैयार करने पर विचार करेंगे।
प्रदेश भर के सैकड़ों डॉक्टरों को मिलेगी आर्थिक राहत
इस फैसले से छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी मेडिकल अस्पतालों में कार्यरत सैकड़ों एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के बीच खुशी का माहौल है। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में इस उल्लेखनीय वृद्धि से उन्हें आर्थिक संबल प्राप्त होगा। वित्तीय चिंताएं कम होने से वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और अपनी चिकित्सीय सेवाओं को अधिक निष्ठा तथा समर्पण के साथ अंजाम दे सकेंगे।


















