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श्रावण पुत्रदा एकादशी की सही तिथि को लेकर दूर करें भ्रम, जानें पूजा का समय और पारण मुहूर्तधर्म
20 अग॰ 2026, 3:13 am (1 घंटे पहले)· 5

श्रावण पुत्रदा एकादशी की सही तिथि को लेकर दूर करें भ्रम, जानें पूजा का समय और पारण मुहूर्त

सावन महीने की पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर बनी दुविधा के बीच पंचांग के अनुसार 23 अगस्त को व्रत रखना शुभ माना गया है। जानें पूजा के सभी शुभ मुहूर्त, पारण का समय और व्रत के जरूरी नियम।

सावन मास में आने वाली पुत्रदा एकादशी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। संतान सुख और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत रखा जाता है। इस वर्ष श्रावण पुत्रदा एकादशी की सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच 23 अगस्त और 24 अगस्त को लेकर उलझन बनी हुई है। पंचांगीय गणना और सनातन परंपरा में उदया तिथि के महत्व को देखते हुए व्रत रखने की सही तारीख 23 अगस्त निर्धारित की गई है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिससे साधक के मन को शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

तिथि का गणित और उदया तिथि का महत्व

पंचांग के विवरण के अनुसार, एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। इसके बाद यह तिथि 23 अगस्त को ही सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। सनातनी परंपराओं में किसी भी व्रत या पर्व की तिथि का निर्धारण सूर्योदय कालीन उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। इसी सिद्धांत का पालन करते हुए पुत्रदा एकादशी का उपवास 23 अगस्त को ही रखना शास्त्रसम्मत रहेगा। इस पावन अवसर पर श्री हरि विष्णु का ध्यान और पूजन करने का विशेष विधान है।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

यह एकादशी इसलिए भी विशेष फलदायी मानी जाती है क्योंकि यह सावन के पवित्र महीने में आती है। सावन का पूरा महीना देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है, जबकि एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना का पर्व है। इस प्रकार इस दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की संयुक्त पूजा-अर्चना करने का दुर्लभ और अत्यंत शुभ योग बनता है। जो दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या जिनकी संतान की उन्नति में किसी प्रकार की बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी माना गया है। पूरी निष्ठा और श्रद्धा से यह व्रत करने पर मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

पूजा के शुभ मुहूर्त की सूची

पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा और आराधना के लिए कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में पूजा-अर्चना संपन्न कर सकते हैं

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 बजे से सुबह 05:36 बजे तक
  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:13 बजे से सुबह 06:21 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:16 बजे से दोपहर 01:06 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से दोपहर 03:38 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:01 बजे से शाम 07:23 बजे तक
  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:01 बजे से रात 08:09 बजे तक

व्रत पारण की तारीख और शुभ समय

एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण शास्त्रीय नियमों के अनुसार सही समय पर किया जाए। श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इस दिन पारण का शुभ समय सुबह 07 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर सुबह 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे इसी निश्चित समय सीमा के भीतर अपना व्रत खोलें। व्रत का पारण करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या दान-दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

व्रत और पूजा के आवश्यक नियम

पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले साधकों को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है

  • व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। फिर मन में व्रत का संकल्प लें।
  • एकादशी के दिन अन्न का सेवन पूरी तरह वर्जित रहता है। इसके साथ ही भोजन में लहसुन और प्याज के इस्तेमाल से भी परहेज करना चाहिए। जो श्रद्धालु निर्जल या कठिन उपवास रखने में सक्षम नहीं हैं, वे फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।
  • शाम के समय फल और सात्विक आहार का सेवन किया जा सकता है। उपवास के दौरान अपने मन में सकारात्मक विचार रखें, ईश्वर का ध्यान करें और किसी भी व्यक्ति के प्रति कटुता या गलत भावना लाने से बचें।

सवाल-जवाब

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 में किस तारीख को है?
उदया तिथि के अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
पुत्रदा एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02:00 बजे शुरू होकर 23 अगस्त को ही सुबह 04:18 बजे समाप्त होगी।
पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण समय क्या है?
व्रत पारण 24 अगस्त 2026 को सुबह 07:19 बजे से 09:43 बजे के बीच किया जाएगा।
पुत्रदा एकादशी का व्रत किसके लिए विशेष माना जाता है?
यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले और संतान संबंधी समस्याओं से मुक्ति पाने वाले दंपतियों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
एकादशी व्रत में किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
एकादशी के दिन अन्न, चावल, गेहूं के साथ-साथ लहसुन और प्याज के सेवन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
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