खानपान के दौरान अगर अचानक कुछ ठंडा, गर्म, खट्टा या मीठा मुंह में जाते ही दांतों में तीखी टीस या झनझनाहट महसूस होने लगे, तो यह दांतों की संवेदनशीलता यानी सेंसिटिविटी का स्पष्ट संकेत होता है। कई बार लोग इस असहज स्थिति को सामान्य मानकर अनदेखा करते रहते हैं, जिससे समस्या धीरे-धीरे और ज्यादा गंभीर रूप ले लेती है। सही ओरल केयर और समय रहते विशेषज्ञ परामर्श से इस समस्या पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इसी विषय पर डॉ. राजीव अरोड़ा, दंत विज्ञान डॉक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने दांतों की इस संवेदनशीलता के प्रमुख कारणों, रोजमर्रा की देखभाल और घरेलू उपायों की वास्तविक सीमाओं पर विस्तार से जानकारी साझा की है।
किन कारणों से होती है दांतों में संवेदनशीलता और टीस
दांतों में होने वाली इस असहज झनझनाहट के पीछे कई मुख्य कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे आम वजह दांतों की सुरक्षा करने वाली सबसे बाहरी परत यानी इनेमल का घिस जाना है। जब यह सुरक्षात्मक आवरण कमजोर पड़ता है, तो दांतों के भीतरी हिस्से सीधे बाहरी तापमान के संपर्क में आने लगते हैं। इसके अलावा जब मसूड़े अपनी जगह से पीछे हटने लगते हैं, तो दांतों की जड़ें खुली रह जाती हैं, जिससे तेज संवेदनशीलता महसूस होती है।
गलत तरीके से ब्रश करना भी दांतों की सेहत बिगाड़ सकता है। बहुत ज्यादा दबाव डालकर या सख्त ब्रिसल वाले टूथब्रश के इस्तेमाल से दांतों की सतह को भारी नुकसान पहुंचता है। दांतों में कैविटी का पनपना, दांत में किसी तरह की महीन दरार आना अथवा मसूड़ों से जुड़ी बीमारियां भी झनझनाहट का कारण बनती हैं। इसके साथ ही बार-बार खट्टे खाद्य पदार्थों या अम्लीय पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से दांतों की परत तेजी से कटने लगती है, जिससे संवेदनशीलता लगातार बढ़ती जाती है।
झनझनाहट से राहत पाने के आसान घरेलू उपाय और सावधानियां
दांतों की हल्की संवेदनशीलता को नियंत्रित करने के लिए दैनिक आदतों में कुछ जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं, जो दर्द और टीस को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
- मुलायम ब्रश का चयन: हमेशा सॉफ्ट ब्रिसल वाले टूथब्रश का ही उपयोग करें। दिन में दो बार हल्के और सौम्य हाथों से दांतों की सफाई करने की आदत डालें, ताकि बाहरी परत सुरक्षित रहे।
- सेंसिटिव टूथपेस्ट का उपयोग: पोटैशियम नाइट्रेट या स्टैनस फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का नियमित इस्तेमाल करने से दांतों की तंत्रिकाओं को राहत मिलती है और संवेदनशीलता में कमी आती है।
- फ्लोराइड युक्त पेस्ट से मजबूती: फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट दांतों के इनेमल को मजबूत बनाने के साथ-साथ सड़न पैदा होने के जोखिम को भी घटाने का काम करता है।
- अत्यधिक तापमान वाले खानपान से परहेज: जब तक दांतों में दर्द या झनझनाहट बनी रहे, तब तक बहुत अधिक गर्म, एकदम ठंडे, जरूरत से ज्यादा मीठे और तीखे खट्टे खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
- खट्टा खाने के बाद कुल्ला करने का नियम: यदि किसी खट्टी या अम्लीय चीज का सेवन किया गया है, तो तुरंत बाद सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें। अम्लीय खाद्य पदार्थों के सेवन के ठीक बाद ब्रश करने से बचें और ब्रश करने से पहले लगभग 30 से 60 मिनट तक का अंतराल जरूर रखें।
- हानिकारक घरेलू नुस्खों से बचाव: अक्सर लोग दांत चमकाने या दर्द भगाने के लिए नमक, नींबू, कोयला या बेकिंग सोडा जैसी चीजें दांतों पर रगड़ने लगते हैं। ऐसा करने से दांतों का इनेमल बुरी तरह घिसकर नष्ट हो सकता है। यह हमेशा याद रखना चाहिए कि घरेलू नुस्खे केवल शुरुआती लक्षणों को हल्का कर सकते हैं, वे हर गंभीर कारण का स्थायी उपचार नहीं होते।
डेंटिस्ट के पास जांच कराने की कब होती है जरूरत
यदि दांतों की संवेदनशीलता लंबे समय से लगातार बनी हुई है, बहुत तीखा दर्द महसूस हो रहा है, या फिर किसी एक विशेष दांत में ही गंभीर समस्या महसूस हो रही हो, तो बिना देर किए डेंटिस्ट से संपर्क करना चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि मसूड़ों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे अथवा बुखार आ रहा हो, तो भी चिकित्सीय जांच तुरंत करानी चाहिए। अगर परेशानी की असली वजह कैविटी या दांत में आई दरार है, तो पेशेवर डेंटिस्ट द्वारा फिलिंग अथवा अन्य उपयुक्त चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।



















