राजस्थान में आईटीआई का कायाकल्प करने की शुरुआत, भिवाड़ी क्लस्टर पर खर्च होंगे 241 करोड़ रुपयेरांची के हजदा में आदिवासियों ने पत्थरों पर उकेरा संविधान, जमीन बचाने के लिए पांचवीं अनुसूची को बनाया ढाललाइव: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध तेज, राहुल गांधी और विपक्षी दलों की एसआईआर याचिका पर शीर्ष अदालत में आज सुनवाई संभवअमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के बीच ब्रिटिश पाउंड 1.3200 के ऊपर संभला, बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों पर टिकी नजरेंकच्चे तेल में पांच दिनों की तेजी थमी, अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की चर्चा से फिसला डब्ल्यूटीआईचीन के केंद्रीय बैंक ने युआन की दैनिक संदर्भ दर बढ़ाकर 6.7253 तय कीकोलकाता हाईकोर्ट ने महुआ मोइत्रा को दिया निर्देश, 24 घंटे में हटाएं वोट चोरी से जुड़ा सोशल मीडिया पोस्टबाड़मेर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने पकड़ा एक लाख का इनामी तस्कर, बचने के लिए घर में पाल रखे थे आठ कुत्तेमानहानि केस में यूट्यूबर ध्रुव राठी को दिल्ली की अदालत ने भेजा नया समनक्रिश्चियन तिराहे पर धमाके के बाद भड़की आग, तीन कपड़ा शोरूम जलकर खाक
पारंपरिक हरी पत्तल में छिपे हैं सेहत के राज, जानिए प्लास्टिक छोड़कर केले के पत्ते पर खाने के लाभस्वास्थ्य
15 अक्तू॰ 2026, 7:09 am (2 घंटे पहले)· 0

पारंपरिक हरी पत्तल में छिपे हैं सेहत के राज, जानिए प्लास्टिक छोड़कर केले के पत्ते पर खाने के लाभ

आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी के अनुसार केले के पत्तों में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल त्वचा और कोशिकाओं के लिए गुणकारी होते हैं।

पारंपरिक भारतीय खानपान में प्राकृतिक पत्तलों का इस्तेमाल सदियों पुराना रहा है, लेकिन आज के दौर में प्लास्टिक और थर्माकोल के बर्तनों ने इसका स्थान ले लिया है। महंगे और रासायनिक तत्वों से बने प्लास्टिक के बर्तनों की तुलना में केले का पत्ता भोजन के लिए एक अत्यंत सुरक्षित और पौष्टिक माध्यम साबित होता है। जब भी इस प्राकृतिक हरी पत्तल पर ताजा और गर्म भोजन परोसा जाता है, तो इसके पत्ते में मौजूद औषधीय गुण भोजन के साथ मिलकर उसके स्वाद और पोषक तत्वों में वृद्धि करते हैं। दक्षिण भारत में दैनिक भोजन से लेकर बड़े आयोजनों तक इसी पत्तल का व्यापक उपयोग देखने को मिलता है, जिसके पीछे गहरे स्वास्थ्य और प्राकृतिक कारण छिपे हैं।

कोशिकाओं और त्वचा के लिए प्राकृतिक सुरक्षा

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल की अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी ने बताया कि केले के पत्ते में भरपूर मात्रा में पॉलीफेनॉल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जब गर्म भोजन पत्ते के संपर्क में आता है, तो ये तत्व भोजन में आसानी से घुल जाते हैं। शरीर के अंदर पहुंचकर ये एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को मजबूती देते हैं और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। इसके अलावा, इनमें एंटी-एजिंग प्रभाव भी मौजूद होते हैं, जो त्वचा की चमक बनाए रखने और उम्र के असर को धीमा करने में सहायक बनते हैं।

ये भी पढ़ें

पर्यावरण संरक्षण और इस्तेमाल में सहजता

पर्यावरण और स्वच्छता के नजरिए से केले का पत्ता प्लास्टिक के डिस्पोजेबल बर्तनों से कहीं अधिक बेहतर और सुरक्षित है। प्लास्टिक कचरा वातावरण में सैकड़ों सालों तक नहीं गलता और गंभीर प्रदूषण फैलाता है, जबकि केले का पत्ता पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण बेहद आसानी से मिट्टी में मिलकर डिकंपोज हो जाता है। इसके अलावा, भोजन परोसने के मामले में भी यह पत्ता व्यावहारिक रूप से बहुत उपयोगी है। इसका आकार काफी चौड़ा और बड़ा होता है, जिससे एक साथ कई तरह के व्यंजन, चावल और रोटियां परोसी जा सकती हैं। इसकी प्राकृतिक सतह वाटरप्रूफ होती है, जिसके कारण पतली दाल, रसेदार सब्जी या कढ़ी के रिसने या बाहर गिरने की गुंजाइश नहीं रहती।

इस्तेमाल से पहले बरतें यह जरूरी सावधानी

केले के पत्ते पर भोजन का आनंद लेने से पहले स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. वंदना तिवारी ने सलाह दी है कि पत्ते को भोजन परोसने से पूर्व साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि उस पर किसी भी प्रकार के फंगस, धूल या बाहरी गंदगी की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाए। अच्छी तरह धोने के बाद इस पर गरमा गरम ताजा भोजन परोसकर इसके प्राकृतिक गुणों का लाभ उठाया जा सकता है। भोजन समाप्त होने के बाद इसे बिना किसी परेशानी के पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निस्तारित किया जा सकता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो उसे अपनी दिनचर्या में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

केले के पत्ते पर भोजन करने के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
केले के पत्ते में पॉलीफेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो कोशिकाओं की रक्षा करने और त्वचा को एंटी-एजिंग लाभ प्रदान करने में मदद करते हैं।
केले के पत्ते पर खाना परोसने से पहले क्या सावधानी रखनी चाहिए?
पत्ते पर भोजन रखने से पहले उसे साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के फंगस या गंदगी की आशंका न रहे।
पर्यावरण के लिहाज से केले का पत्ता प्लास्टिक से बेहतर क्यों है?
केले का पत्ता पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल होता है और आसानी से मिट्टी में मिल जाता है, जबकि प्लास्टिक कचरा कभी नष्ट नहीं होता।
क्या किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को कोई विशेष ध्यान रखना चाहिए?
चिकित्सक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, तो उसे चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही इसका प्रयोग करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp