अचानक कुर्सी या बिस्तर से उठते ही सिर में हल्कापन महसूस होना, कदम बहकना या आसपास की हर चीज घूमती नजर आना ऐसी शारीरिक तकलीफें हैं जिनसे कई लोग जूझते हैं। अक्सर लोग इसे केवल सामान्य थकावट मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह शारीरिक परेशानी पानी की कमी, भोजन न करने या रक्तचाप में गिरावट की वजह से भी पैदा हो सकती है। चक्कर आने की अनुभूति हर व्यक्ति में अलग हो सकती है, जहां किसी को बेहोशी छाने या शरीर भारी लगने का अहसास होता है, तो वहीं दूसरों को ऐसा लगता है मानो पूरा कमरा चक्कर काट रहा हो।
वर्टिगो और संतुलन बिगड़ने के लक्षण
जब किसी व्यक्ति को अपने आसपास की वस्तुएं तेजी से घूमती हुई प्रतीत होती हैं, तो चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को आमतौर पर वर्टिगो के रूप में जाना जाता है। इस परेशानी से पीड़ित इंसान का शारीरिक संतुलन पूरी तरह लड़खड़ा सकता है। इसके साथ ही रोगी को जी मिचलाने, उल्टी आने और सीधे कदमों से चलने में गंभीर दिक्कत पेश आ सकती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए सामान्य रूप से चलना या खड़े रहना भी एक कठिन काम बन जाता है।
पोजीशन बदलते ही ब्लड प्रेशर में गिरावट
काफी देर तक जमीन या सोफे पर बैठे रहने अथवा लेटने के बाद जब कोई व्यक्ति एकाएक खड़ा होता है, तो कई बार आंखों के आगे काला पर्दा या अंधेरा छाने लगता है। इसके साथ ही तेज सिर चकराना और हाथ-पैरों में दुर्बलता महसूस हो सकती है। इसे ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन या पोस्टुरल हाइपोटेंशन कहा जाता है। शारीरिक मुद्रा में अचानक बदलाव आने की वजह से कुछ पलों के लिए ब्लड प्रेशर का स्तर नीचे लुढ़क जाता है। इससे मस्तिष्क तक होने वाला खून का नियमित बहाव पल भर के लिए धीमा पड़ जाता है, जिसके चलते सिर घूमने लगता है। यदि ऐसा बार-बार हो रहा हो, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लेकर परीक्षण कराना चाहिए।
डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी
गर्मी के मौसम में अत्यधिक पसीना बहने, अचानक उल्टी और दस्त होने, तेज बुखार चढ़ने या दिनभर में बहुत कम तरल पदार्थ पीने से शरीर में पानी की तीव्र कमी हो जाती है। जब शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार होता है, तब रोगी को लगातार तेज प्यास लगती है और बहुत ज्यादा थकान का सामना करना पड़ता है। मुंह का सूखा रहना, बहुत कम मात्रा में पेशाब आना अथवा पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा पीला होना इसके स्पष्ट संकेत हैं। यदि शरीर से पानी और आवश्यक तरल का स्तर बहुत नीचे गिर जाए, तो स्थिति गंभीर बन सकती है और चक्कर आने की बारंबारता बढ़ सकती है। ऐसे संकेत दिखते ही पानी और तरल पदार्थों का समुचित प्रबंध करना अनिवार्य है।
ब्लड शुगर का घटना और खानपान की अनियमितता
डायबिटीज की नियमित दवाएं या इंसुलिन लेने वाले मरीजों में ब्लड शुगर का स्तर गिरना चक्कर आने का एक प्रमुख कारण बनता है। शुगर का स्तर नीचे आते ही शरीर में कंपकंपी शुरू हो सकती है, अचानक पसीना छूटने लगता है, तेज भूख सताने लगती है और तीव्र घबराहट या मानसिक भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे समय में व्यक्ति को सोचने-समझने में भी रुकावट का अनुभव होता है। इसके अलावा, जो लोग लंबे समय तक भूखे पेट रहते हैं या अपनी रोजाना की डाइट में जरूरी कार्बोहाइड्रेट की पर्याप्त मात्रा नहीं लेते, उनका शुगर स्तर भी तेजी से घट सकता है। ऐसी समस्याओं को घरेलू नुस्खों से ठीक करने के बजाय कारण की सही जांच करवानी चाहिए।
एनीमिया और माइग्रेन का प्रभाव
एनीमिया की बीमारी में शरीर के विभिन्न ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की प्राकृतिक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में हर समय सुस्ती, ऊर्जा की भारी कमी, सिरदर्द और बार-बार चक्कर आने जैसे लक्षण उभरते हैं। जब चक्कर के साथ असाधारण कमजोरी बनी रहे, तो खून की पूरी जांच कराना आवश्यक होता है। इसके साथ ही, माइग्रेन की गंभीर समस्या से जूझ रहे लोगों में भी सिर घूमने और वर्टिगो के लक्षण अक्सर देखे जाते हैं।
किन आपातकालीन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं
यदि सिर चकराने के साथ बोलने में लड़खड़ाहट हो, देखने में अचानक कठिनाई आने लगे, एक ही वस्तु दो-दो दिखाई देने लगें यानी डबल विजन की शिकायत हो, या फिर चेहरे, हाथ और पैर सुन्न पड़ने लगें, तो इसे कभी भी मामूली परेशानी नहीं समझना चाहिए। चलने-फिरने में अत्यधिक असंतुलन, बेहोशी आना या सिर में असहनीय तेज दर्द का अचानक उठना किसी गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे खतरनाक लक्षण उभरते ही बिना एक पल गंवाए सीधे विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।



















