उदयपुर में सदियों पुराने पेड़ों के नीचे हुआ अनोखा योगाभ्यास, 'योग अगेंस्ट एंटी एजिंग' से दिया प्रकृति बचाने का संदेशस्वास्थ्य
4 घंटे पहले· 4

उदयपुर में सदियों पुराने पेड़ों के नीचे हुआ अनोखा योगाभ्यास, 'योग अगेंस्ट एंटी एजिंग' से दिया प्रकृति बचाने का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उदयपुर के आदियोगी ग्रुप ने एक अनोखी पहल की है, जहां योग साधक सैकड़ों साल पुराने पेड़ों की छांव में 'योग अगेंस्ट एंटी एजिंग' थीम के तहत योगाभ्यास कर रहे हैं।

प्रकृति की गोद में सेहत का सफर: विशाल पेड़ों के नीचे योगाभ्यास

उदयपुर में योग का एक बेहद ही अनोखा और प्रकृति के अनुकूल रूप देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर शहर में एक खास अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें योग साधक सदियों पुराने बड़े पेड़ों के नीचे योगाभ्यास कर रहे हैं। इस अनोखे प्रयास का मकसद लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देना भी है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस साल के योग दिवस के लिए "योग अगेंस्ट एंटी एजिंग" की थीम तय की है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि लगातार योग करने से बढ़ती उम्र के असर को कम किया जा सकता है और लंबे समय तक निरोगी और फुर्तीला जीवन जिया जा सकता है।

प्राचीन ऋषियों की परंपरा को जीवंत करने का प्रयास

इसी खास थीम को ध्यान में रखकर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उदयपुर के आदियोगी ग्रुप ने इस बार एक नया तरीका अपनाने का फैसला किया। ग्रुप के संस्थापक डॉ. जसवंत मेनारिया ने बताया कि योग की शुरुआत भारत की पावन धरती पर हुई थी। प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनि जंगलों में बड़े-बड़े पेड़ों के नीचे बैठकर ही ध्यान, साधना और योगाभ्यास किया करते थे।

प्रकृति के करीब रहने के कारण ही वे शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से बेहद मजबूत होते थे और लंबी उम्र जीते थे। इसी प्राचीन सोच को आज के समय में दोहराते हुए आदियोगी ग्रुप के सदस्य उदयपुर के अलग-अलग इलाकों में मौजूद सैकड़ों साल पुराने विशाल पेड़ों के पास जाकर योग क्रियाएं कर रहे हैं।

पारंपरिक आसनों से लेकर एरियल योग का अनूठा अनुभव

इस योग सत्र के दौरान शामिल हुए लोगों ने शरीर का संतुलन, लचीलापन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए कई तरह के आसन किए। इनमें ताड़ासन, वृक्षासन, सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, त्रिकोणासन, वज्रासन और पद्मासन के साथ-साथ प्राणायाम और ध्यान जैसी क्रियाएं शामिल थीं।

इसके अलावा, डॉ. जसवंत मेनारिया ने बताया कि आजकल एरियल योग का चलन भी काफी बढ़ रहा है। उदयपुर में मौजूद बरगद के विशाल पेड़ों की मजबूत और प्राकृतिक जटाएं एरियल योग करने के लिए सबसे बेहतरीन प्राकृतिक माहौल देती हैं। इन जटाओं के सहारे योगाभ्यास करने से शरीर की ताकत, संतुलन और स्टैमिना को काफी मजबूती मिलती है।

सेहत और पर्यावरण को एक सूत्र में बांधने की अनूठी मुहिम

डॉ. मेनारिया के मुताबिक, उदयपुर में आज भी कई ऐसे पेड़ हैं जो सैकड़ों साल पुराने हैं। ये पेड़ सिर्फ पर्यावरण के लिए ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि यह हमारी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का भी एक बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे ऐतिहासिक पेड़ों के साये में योग करने से लोग खुद को प्रकृति के करीब महसूस करते हैं और पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी को समझते हैं। आदियोगी ग्रुप का यह अनोखा अभियान सेहत सुधारने और पर्यावरण को बचाने की मुहिम को एक साथ जोड़कर समाज को एक बेहद जरूरी संदेश दे रहा है।

सवाल-जवाब

आयुष मंत्रालय द्वारा इस वर्ष के योग दिवस के लिए क्या थीम रखी गई है?
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा इस वर्ष के योग दिवस की थीम "योग अगेंस्ट एंटी एजिंग" रखी गई है।
उदयपुर में यह अनोखा योग अभियान किस संस्था द्वारा चलाया जा रहा है?
यह अनोखा योग अभियान उदयपुर के आदियोगी ग्रुप द्वारा चलाया जा रहा है, जिसके संस्थापक डॉ. जसवंत मेनारिया हैं।
इस योग अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संदेश देना है।
योग सत्र के दौरान कौन-कौन से आसन किए गए?
सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने ताड़ासन, वृक्षासन, सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, त्रिकोणासन, वज्रासन, पद्मासन, प्राणायाम और ध्यान जैसी योग क्रियाएं कीं।
इस अभियान में एरियल योग के लिए बरगद के पेड़ों का उपयोग कैसे किया जा रहा है?
बरगद के पेड़ों की मजबूत और प्राकृतिक जटाओं के सहारे एरियल योग किया जा रहा है, जिससे शरीर की ताकत, संतुलन और स्टैमिना बढ़ता है।
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