कम उम्र में सीढ़ियां चढ़ते, नीचे बैठते या अचानक खड़े होते समय जोड़ों से चटकने अथवा कट-कट की आवाज सुनाई देना काफी लोगों के साथ होता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को क्रेपिटस के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर लोग इसे बुढ़ापे की निशानी मानकर घबरा जाते हैं या फिर पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। हर बार घुटने की यह आवाज किसी गंभीर विकार का संकेत नहीं होती, लेकिन कुछ खास लक्षणों के साथ दिखने पर यह किसी अंदरूनी समस्या की तरफ इशारा भी कर सकती है। डॉ. अतुल मिश्रा, चेयरमैन, ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट, फोर्टिस नोएडा के अनुसार जोड़ों की इस आवाज के पीछे जैविक और शारीरिक दोनों तरह की वजहें मौजूद होती हैं।
जोड़ों से आवाज आने की मुख्य शारीरिक वजहें
हड्डियों के जोड़ों के बीच साइनोवियल फ्लूइड नाम का एक गाढ़ा चिकना तरल पदार्थ मौजूद होता है। यह तरल हड्डियों के बीच घर्षण को रोकता है और जोड़ों को सुचारू रूप से मुड़ने में मदद करता है। जब जोड़ पर दबाव बदलता है, तो इस तरल के भीतर हवा या गैस के सूक्ष्म बुलबुले बन जाते हैं। जोड़ के मुड़ने पर जब ये बुलबुले फूटते हैं, तो चटकने जैसी आवाज पैदा होती है। इसके अतिरिक्त घुटने के ढांचे को सहारा देने वाले टेंडन और लिगामेंट्स भी कई बार अपनी स्वाभाविक स्थिति से थोड़ा खिसकते हैं और वापस अपनी जगह पर लौटते समय कट-कट की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं होती।
युवाओं में चटकन पैदा करने वाले लाइफस्टाइल कारक
यदि कम आयु के युवाओं में लगातार घुटनों से आवाज आ रही है, तो इसके पीछे रोजमर्रा की आदतें और शारीरिक फिटनेस की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकती हैं। जांघ की मांसपेशियों का कमजोर पड़ना घुटने के जोड़ पर अतिरिक्त भार डालता है। इसके अलावा लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों का अभाव और शरीर का बढ़ता वजन घुटने के संतुलन को बिगाड़ देता है। गलत तकनीक और गलत पोस्चर में कसरत करने से भी जोड़ पर अनुचित तनाव पड़ता है। कुछ परिस्थितियों में घुटने की कटोरी यानी पटेला अपनी सही सीध में गति नहीं कर पाती या उसके आसपास का कार्टिलेज घिसने लगता है, जिससे आवाज लगातार आने लगती है।
किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टरी जांच है जरूरी
केवल आवाज आना किसी बड़ी बीमारी का पक्का प्रमाण नहीं है, लेकिन आवाज के साथ शरीर के अन्य चेतावनी भरे संकेत दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए। यदि चटकने के साथ-साथ घुटने में लगातार दर्द बना रहे, जोड़ में सूजन आ जाए, अकड़न महसूस हो या सामान्य रूप से चलने-फिरने में बाधा उत्पन्न होने लगे, तो यह सामान्य बात नहीं है। इस तरह की स्थिति ऑस्टियोआर्थराइटिस, कार्टिलेज में किसी चोट या घुटने की अन्य गंभीर समस्याओं की वजह से पैदा हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में तुरंत किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए।
घुटनों को मजबूत और सेहतमंद रखने के आसान उपाय
घुटनों की सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए दैनिक दिनचर्या में कुछ साधारण बदलाव करना बेहद असरदार साबित होता है। जांघों और घुटने के आसपास की मांसपेशियों को ताकत देने वाले हल्के व्यायाम नियमित रूप से करने चाहिए। शारीरिक वजन को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है ताकि जोड़ों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में हल्का टहलें। यदि व्यायाम के दौरान सही तकनीक का ध्यान रखा जाए और जोड़ों को सक्रिय रखा जाए, तो क्रेपिटस की परेशानी से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।



















