नवंबर की शुरुआत के साथ ही देश भर में मौसम की दो विपरीत परिस्थितियां सामने आ रही हैं। दक्षिण भारत के विस्तृत हिस्से में चक्रवाती तूफान मुरासु के अवशेषों के चलते भारी वर्षा, मेघगर्जन और तूफानी हवाओं का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इसके उलट, उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में वातावरणीय परिस्थितियां पूरी तरह शांत और शुष्क बनी हुई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी आधिकारिक मौसम बुलेटिन के अनुसार, मुरासु के कमजोर पड़ने के बाद बने डिप्रेशन का प्रभाव अभी भी प्रायद्वीपीय भारत के वायुमंडल को अस्थिर बनाए हुए है, जिसके चलते 5 नवंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।
प्रायद्वीपीय भारत में चक्रवाती अवशेष और मौसमी तंत्र
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मौसम में आए इस बड़े उथल-पुथल की मुख्य जड़ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमाओं के ऊपर सक्रिय मौसमी ढांचा है। 4 नवंबर को सुबह 8:30 बजे दर्ज किए गए मौसम विश्लेषण के मुताबिक, चक्रवाती तूफान मुरासु कमजोर होकर एक डिप्रेशन में तब्दील हो चुका था। उस समय यह तंत्र पूर्वी तेलंगाना और उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर केंद्रित था। यह प्रणाली लगभग 6 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी गति से उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही थी और इसकी स्थिति तेलंगाना के खम्मम से लगभग 10 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में मापी गई थी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस तंत्र के आगामी छह घंटों के भीतर और अधिक कमजोर होकर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया) में तब्दील होने की संभावना व्यक्त की गई थी।
यद्यपि यह चक्रवाती तंत्र क्रमिक रूप से अपनी शक्ति खो रहा है, लेकिन इसके बावजूद तटीय और आंतरिक आंध्र प्रदेश में मौसमी गतिविधियां तुरंत शांत नहीं होंगी। आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में 5 नवंबर को गरज-चमक के साथ तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। रायलसीमा के भूभाग में 4 नवंबर से 8 नवंबर के दौरान लगातार मेघगर्जन और तेज हवाओं का प्रकोप बना रह सकता है। तेलंगाना के संदर्भ में, 4 नवंबर को बेहद भारी बारिश की आशंका जताई गई थी, किंतु 5 नवंबर के नियमित बुलेटिन में राज्य के लिए अत्यंत भारी वर्षा का कोई नया गंभीर अलर्ट शामिल नहीं किया गया है।
तमिलनाडु और कर्नाटक में व्यापक वर्षा का अलर्ट
प्रायद्वीपीय राज्यों में 5 नवंबर का दिन मौसमी हलचल के लिहाज से काफी संवेदनशील रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर बादलों के जोरदार गर्जन और बिजली गिरने के साथ भारी बारिश का अलर्ट घोषित किया है। केरल और माहे के तटीय एवं आंतरिक भागों में भी छिटपुट जगहों पर वर्षा के साथ आकाशीय बिजली चमकने का जोखिम बना हुआ है। कर्नाटक के आंतरिक दक्षिणी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि तटीय कर्नाटक के इलाकों में तेज हवाओं और बिजली कड़कने के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है। इस लगातार सक्रिय वर्षा तंत्र के चलते निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्थानीय आवागमन और सड़क यातायात के बाधित होने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि दक्षिण भारत में सक्रिय यह मौसमी दौर 5 नवंबर के बाद तुरंत समाप्त नहीं होगा, बल्कि आने वाले कई दिनों तक जारी रहेगा। विस्तृत पूर्वानुमान के अनुसार, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4 से 6 नवंबर के दौरान वर्षा होगी और उसके बाद 9 से 10 नवंबर के मध्य दोबारा तेज वर्षा का दौर शुरू हो सकता है। इसके अतिरिक्त, 7 और 8 नवंबर को भी इन क्षेत्रों के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है। दूसरी तरफ केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 4 से 10 नवंबर तक रुक-रुक कर विभिन्न स्थानों पर वर्षा की परिस्थितियां बनी रहेंगी। ऐसे में इन सभी राज्यों के नागरिकों और किसानों को अगले एक सप्ताह तक लगातार बदलते मौसम के अनुरूप सतर्कता बरतनी होगी।
ओडिशा और तटीय कर्नाटक में मौसमी हलचल
पूर्वी तट पर स्थित ओडिशा और पश्चिमी तट पर फैले तटीय कर्नाटक में भी बादलों की आवाजाही और मौसमी गतिविधियों का प्रभाव नजर आएगा। ओडिशा में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं के बीच बारिश की संभावना जताई गई है। तटीय कर्नाटक में भी समुद्र के निकटवर्ती वातावरण में नमी की प्रचुरता के चलते बादलों की तेज गर्जना के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के निवासियों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और बिजली गिरने के दौरान मजबूत आश्रयों में रहने की सामान्य सलाह दी है।
उत्तर भारत में शुष्क वातावरण और दिल्ली-NCR का हाल
दक्षिण के विपरीत, देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में मौसम पूरी तरह स्थिर और शांत बना हुआ है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के नागरिकों के लिए 5 नवंबर का दिन मौसमी उथल-पुथल से पूरी तरह मुक्त रहने वाला है। दैनिक मौसम रिपोर्ट के आधार पर राजधानी और इसके आसपास के क्षेत्रों में सुबह के समय हल्का कुहासा या हल्की धुंध छाई रह सकती है। हालांकि जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, आसमान मुख्य रूप से साफ हो जाएगा और तेज धूप खिलेगी। सुबह काम पर निकलने वाले लोगों को वातावरण में धुंधलापन देखने को मिल सकता है, परंतु दिन के समय किसी भी प्रकार की बारिश, आंधी या आकाशीय बिजली की कोई संभावना नहीं है।
तापमान के मोर्चे पर भी दिल्ली-NCR में आगामी दिनों में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं जताई गई है। IMD के अनुसार अगले सात दिनों की अवधि में अधिकतम तापमान सामान्य स्तर पर स्थिर बना रहेगा। सुबह और देर रात के समय हल्की ठंडक का अहसास जरूर होगा, लेकिन दिन का तापमान धूप निकलने के कारण सुखद बना रहेगा। मौसम विभाग के इस बुलेटिन में फिलहाल किसी तरह की शीतलहर या कड़ाके की ठंड की चेतावनी दर्ज नहीं की गई है, जिससे दिनचर्या सामान्य रूप से चलती रहेगी।
उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों का मौसमी परिदृश्य
उत्तर प्रदेश में 5 नवंबर को वातावरणीय दशाएं पूरी तरह सामान्य और शांत बनी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर-पश्चिम भारत में पूरे सप्ताह के दौरान किसी भी उल्लेखनीय मौसमी हलचल की कोई उम्मीद नहीं है। इसके चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के विस्तृत भूभाग में मौसम पूर्णतः शुष्क बना रहेगा। राज्य में किसी भी प्रकार की तेज आंधी, भारी बारिश या आकाशीय बिजली को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। यद्यपि स्थानीय स्तर पर भौगोलिक अंतर के चलते सुबह और रात के पारे में आंशिक अंतर दर्ज किया जा सकता है, किंतु व्यापक स्तर पर कोई मौसमी खतरा मौजूद नहीं है।
उत्तर प्रदेश के समान ही उत्तराखंड, बिहार और झारखंड में भी 5 नवंबर को वर्षा का कोई संकेत नहीं है। इन सभी प्रदेशों में आसमान साफ रहने और धूप निकलने से किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी। मौसम विभाग ने पूरे उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में इस सप्ताह किसी भी प्रकार की सक्रिय मौसमी प्रणाली के सक्रिय होने की संभावना को सिरे से खारिज किया है, जिससे देश के इस बड़े हिस्से में सामान्य कामकाज बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगा।



















