हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में सफर करने वाले मुसाफिरों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंडी जिले के भीतर पड़ने वाले 19 किलोमीटर लंबे नारला-बिजणी सुपर हाईवे को आधिकारिक तौर पर वाहनों की आवाजाही के लिए शुरू कर दिया है। इस आधुनिक सड़क गलियारे के खुल जाने के बाद अब मंडी से नारला तक का सफर तय करने में केवल 20 से 25 मिनट का समय लगेगा, जिससे पर्वतीय इलाकों में आवागमन पहले की तुलना में बेहद सुगम हो गया है।
बरसात के नुकसान और मरम्मत के बाद मिली बड़ी राहत
इस पूरे मार्ग पर यातायात शुरू होने से पहले वाहनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। बीते समय में मैगल पुल के पूरी तरह बहाल न होने और मानसून के मौसम में पुलों की व्यापक मरम्मत के चलते यह राजमार्ग बंद पड़ा हुआ था। बरसात के खत्म होने के बाद प्रशासन ने इसे टांडू से नारला तक ही चालू किया था, जिसके कारण वाहन चालकों को टांडू से आगे पुराने और संकरे रास्ते से होकर मंडी पहुंचना पड़ रहा था। अब पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत तैयार इस 19 किलोमीटर लंबे हिस्से के पूरी तरह बहाल होने से बीड़ बिलिंग, कांगड़ा, पधर, धर्मशाला, मंडी और मनाली आने-जाने वाले हजारों मुसाफिरों को सीधी सहूलियत मिलेगी।
चार पुलों की बहाली पूरी, द्रंग पुल का नया ढांचा होगा तैयार
इस सुपर हाईवे परियोजना के तहत निर्मित कुल पांच प्रमुख पुलों में से चार पुलों को पूरी तरह दुरुस्त कर यातायात योग्य बना दिया गया है। भारी बारिश के दौरान जमीन धंसने की वजह से यहां के ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए थे। अब केवल द्रंग में स्थित पुल का निर्माण नए सिरे से किया जाना बाकी है। इसके लिए गाबर कंस्ट्रक्शन कंपनी नए सिरे से डिजाइन तैयार करवा रही है, ताकि भविष्य में भूस्खलन जैसी आपदाओं से इस ढांचे को सुरक्षित रखा जा सके।
545 करोड़ की लागत और समय की भारी बचत
सामरिक और पर्यटन के लिहाज से बेहद अहम पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे के इस 19 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण पर कुल 545 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस अहम परियोजना का टेंडर 20 जुलाई 2022 को अवार्ड किया गया था, जबकि धरातल पर काम 4 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था। नए 12 मीटर चौड़े हाईवे के तैयार होने से मंडी से पधर के बीच की दूरी पौने चार किलोमीटर घट गई है। जहां पुराना घुमावदार मार्ग लगभग 23 किलोमीटर लंबा था, वहीं यह नया सीधा और सपाट गलियारा सिमटकर करीब 19 किलोमीटर रह गया है। नतीजतन, जिस दूरी को तय करने में पहले एक घंटे का वक्त लगता था, वह सफर अब सिर्फ 25 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।



















