दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रख्यात संगीतकार देवा के निधन के बाद पूरे कला जगत और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। तमिल सिनेमा में 'तेनिसई तेंद्रल' के नाम से पहचाने जाने वाले इस दिग्गज संगीतकार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए चेन्नई के टी. नगर स्थित उनके आवास पर रखा गया है। 18 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे तक प्रशंसक, आम नागरिक और फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियां यहां पहुंचकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा।
तमिलनाडु सरकार ने महान संगीतकार के अतुलनीय योगदान को देखते हुए घोषणा की है कि उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम संस्कार का यह कार्यक्रम रानीपेट जिले में आरकाट के पास स्थित उनके पैतृक गांव मांगडू में आयोजित होगा। रविवार को यहां पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। अपने चार दशकों से अधिक लंबे करियर में चार सौ से अधिक फिल्मों में संगीत देने वाले देवा ने संगीत की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी है।
चेन्नई के टी. नगर स्थित आवास पर उमड़ा जनसैलाब
संगीत निर्देशक देवा के निधन की सूचना मिलते ही उनके टी. नगर आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। उत्तरी मद्रास के तमाम 'गाना' गायकों ने अपने प्रेरणास्रोत को नमन किया और आवास पर पहुंचकर अपनी विदाई दी। देवा ने ही इन स्थानीय लोक गायकों की शैली को मुख्यधारा के सिनेमा का हिस्सा बनाया था, इसलिए इन कलाकारों के लिए उनका जाना एक व्यक्तिगत क्षति के समान है।
फिल्म जगत से निर्देशक के.एस. रविकुमार ने आवास पर पहुंचकर अपने पुराने सहयोगी को श्रद्धांजलि दी। अभिनेता आनंदराज और वरिष्ठ अभिनेता शिवकुमार भी शनिवार को देवा के आवास पर पहुंचे और दिवंगत संगीतकार को नमन किया। तमिल संस्कृति और कला से जुड़े अनगिनत लोग अपने प्रिय संगीतकार के अंतिम दर्शन करने के लिए लगातार कतारों में खड़े नजर आए।
मुख्यमंत्री और शीर्ष नेताओं ने बंधाया परिवार को ढांढस
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को टी. नगर स्थित देवा के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री की मां शोबा चंद्रशेखर ने भी संगीतकार के घर जाकर शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। मुख्यमंत्री विजय ने अपने संदेश में कहा कि देवा ने अपने लोक और आम जीवन से जुड़े गीतों से आम जनता के दिलों पर राज किया। उन्होंने रेखांकित किया कि देवा का संगीत सफर और उनके रचे गए गीत हमेशा फिल्म संगीत के इतिहास में जीवित रहेंगे।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने भी देवा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिस दौर में तमिल फिल्म संगीत पर इलैयाराजा और ए.आर. रहमान जैसी हस्तियों का बोलबाला था, उस दौर में भी देवा ने अपनी एक स्वतंत्र और मजबूत पहचान बनाई। स्टालिन ने रजनीकांत के किरदारों के लिए देवा द्वारा तैयार किए गए बैकग्राउंड स्कोर और लोकप्रिय 'ऑटोकारन' गीत को याद किया। उन्होंने कमल हासन के साथ उनकी फिल्मों जैसे 'अव्वई षण्मुगी' और 'पंचतंतिरम' के शानदार संगीत की भी सराहना की। स्टालिन ने स्मरण किया कि पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने ही देवा को 'तेनिसई तेंद्रल' की उपाधि से नवाजा था।
संवैधानिक प्रमुखों और राजनीतिक दिग्गजों के शोक संदेश
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी संगीतकार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग और व्यापक भारतीय सिनेमा में देवा के अमूल्य योगदान की सराहना की। अपने शोक संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि देवा ने अपनी विशिष्ट संगीत शैली और लोकप्रिय 'गाना' गीतों के माध्यम से एक अनूठी पहचान बनाई थी, जिसने आम इंसानों के सुख, दुख और जीवन की वास्तविक भावनाओं को बड़े पर्दे पर उतारा। उन्होंने कहा कि चार भाषाओं में चार सौ से अधिक फिल्मों में देवा द्वारा तैयार की गई धुनें आने वाली पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों को छूती रहेंगी।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तमिल फिल्म संगीत में देवा के काम ने राज्य के सांस्कृतिक परिदृश्य को बेहद समृद्ध किया। विदुतलै चिरुतैगल कच्ची के संस्थापक और चिदंबरम से सांसद थोल. तिरुमावलवन ने कहा कि देवा ने तमिल कला जगत पर कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी है। उन्होंने उल्लेख किया कि देवा ने चेन्नई के मूल समुदायों से जुड़े 'गाना' संगीत को न केवल मुख्यधारा के तमिल सिनेमा में स्थापित किया, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी पहुंचाया।
पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद देवा ने अपना एक अलग संगीत साम्राज्य स्थापित किया। उन्होंने कहा कि तमिल सिनेमा के सभी प्रमुख सितारों की फिल्मों में संगीत देने का दुर्लभ गौरव देवा को हासिल था। रजनीकांत, कमल हासन, वर्तमान मुख्यमंत्री विजय और अजित जैसे शीर्ष अभिनेताओं के शुरुआती जश्न वाले गानों को देवा ने ही अपनी धुनों से सजाया था। रामदास ने यह भी साझा किया कि देवा कुछ ही दिन पहले तक नए प्रोजेक्ट्स और टीवी कार्यक्रमों में पूरी सक्रियता से काम कर रहे थे। पिछले साल इसी समय उनके भाई सबेश के निधन ने उन्हें भावनात्मक रूप से गहरा आघात पहुंचाया था।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर ने देवा को नब्बे के दशक की पूरी पीढ़ी की आवाज बताया। उन्होंने अन्नामलाई, बाशा, आसई, कादल कोट्टई, वाली और खुशी जैसी फिल्मों के साउंडट्रैक को तमिल सिनेमा का सदाबहार खजाना करार दिया।
कलाकारों ने साझा की अपनी यादें
सिनेमा उद्योग के कई प्रमुख कलाकारों ने देवा के साथ बिताए पलों को याद किया। अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने श्रद्धांजलि देते हुए देवा को ऊर्जा और उत्साह से भरी एक जीवंत आत्मा बताया। उन्होंने अव्वई षण्मुगी, पम्मल के. संबंदम और पंचतंतिरम जैसी फिल्मों में साथ काम करने के दिनों को याद किया और परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की।
मलयालम सिनेमा के जाने-माने अभिनेता निविन पॉली ने कहा कि देवा का संगीत पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा। अभिनेता विजय सेतुपति ने देवा के जाने को एक अपार दुख का क्षण बताया और कहा कि उनकी धुनें हमेशा यादों में महकती रहेंगी। अभिनेता और निर्देशक आरजे बालाजी ने फिल्म 'मूकुत्ति अम्मन' में देवा के साथ काम करने के अनुभव को एक अनमोल स्मृति बताया। प्रसिद्ध अभिनेता और कोरियोग्राफर प्रभु देवा ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देवा का कालजयी संगीत हमेशा जिंदा रहेगा।
पीडब्ल्यूडी की नौकरी से संगीत के शिखर तक का सफर
देवनेसन चोक्कलिगम के नाम से जन्मे देवा का जीवन कड़ी मेहनत और लगन की मिसाल रहा है। फिल्मों में कदम रखने से पहले वह तमिलनाडु सरकार के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी में कार्यरत थे। एक साधारण सरकारी नौकरी से निकलकर संगीत की दुनिया में शीर्ष पर पहुंचना उनके असाधारण हुनर का प्रमाण था।
बतौर फिल्म संगीतकार उनकी पहली यात्रा साल 1986 में आई फिल्म 'माट्टुक्कार मन्नारु' से शुरू हुई थी। यह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं हो सकी, लेकिन समय के साथ इसके गीतों को श्रोताओं का खूब प्यार मिला। इसके बाद साल 1990 में आई 'वैकसी पोरंदाच्चु' ने देवा को व्यापक पहचान दिलाई और इसी फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पहला तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार मिला।
साल 1992 में आई रजनीकांत अभिनीत फिल्म 'अन्नामलाई' देवा के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म के हर एक गाने ने चार्टबस्टर बनकर इतिहास रच दिया। इसके बाद उन्होंने बाशा में रजनीकांत के साथ दोबारा ऐसा संगीत दिया जो आज भी सिनेमाघरों में दर्शकों में नया जोश भर देता है।
आम जनता के संगीत 'गाना' को मुख्यधारा में स्थापित किया
देवा की सबसे बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि उन्होंने चेन्नई के उपेक्षित लोक संगीत 'गाना' को सिनेमा के मुख्य मंच पर गरिमा के साथ स्थापित किया। उत्तर चेन्नई की बस्तियों और गलियों में गाया जाने वाला यह संगीत पारंपरिक रूप से मुख्यधारा के रिकॉर्ड्स से दूर था। देवा ने इस संगीत की लय, बोल और जिंदादिली को समझा और उसे लाखों श्रोताओं की पसंद बना दिया।
देवा का मानना था कि हर संगीतकार की अपनी शैली होती है और चेन्नई से ताल्लुक रखने के कारण 'गाना' संगीत उनके रग-रग में बसा था। उनकी नजर में यह संगीत भले ही सुनने में ठेठ और कच्चा लगे, लेकिन इसकी सांगीतिक गहराई बहुत अधिक होती है। देवा ने तमिल के साथ-साथ तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा में भी कई दशकों तक यादगार काम किया और भारतीय संगीत के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया।


















