हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद मर्माहत कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां कुछ ही घंटों के अंतराल पर एक ही परिवार में मां और बेटे दोनों की अर्थियां उठ गईं। यह दर्दनाक घटना बड़सर उपमंडल के अधीन आने वाले समोह गांव की है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस अप्रत्याशित और सनसनीखेज हादसे ने दीपावली के पावन पर्व की सारी खुशियों को मातम और सन्नाटे में तब्दील कर दिया है, जिससे पूरा गांव गहरे सदमे और शोक में डूबा हुआ है।
सांस लेने में तकलीफ के बाद बिगड़ी तबीयत
प्राप्त विवरण के अनुसार, इस हृदयविदारक घटना के केंद्र में 63 वर्षीय बलदेव सिंह हैं जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। शनिवार की सुबह उन्हें अचानक सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई और भारी तकलीफ महसूस हुई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए परिवार के सदस्यों ने बिना एक पल भी गंवाए उन्हें तुरंत बड़सर अस्पताल ले जाने के लिए एक गाड़ी में बैठाया। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल की ओर तेजी से रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उनकी सेहत और ज्यादा बिगड़ गई और अस्पताल की देहरी तक पहुंचने से पहले ही उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
घर पहुंचा पार्थिव शरीर और टूटा मां का दिल
यह मर्मस्पर्शी वाकया यहीं पर समाप्त नहीं हुआ, बल्कि इसके बाद जो हुआ वह और भी अधिक दिल दहला देने वाला था। जब बलदेव सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास समोह गांव में वापस पहुंचा, तो पूरे घर में कोहराम मच गया और चीख-पुकार गूंज उठी। बलदेव सिंह की 85 वर्षीय बुजुर्ग माता ज्ञान देवी अपने बेटे की अर्थी को देखकर भीतर से बुरी तरह टूट गईं। अपने बेटे की इस अचानक हुई मौत का यह गहरा आघात उनकी वृद्ध और कमजोर मां सहन नहीं कर पाईं और जैसे ही शव घर के आंगन में पहुंचा, वे अहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। बेटे के वियोग में लगातार फफक-फफक कर रोने के कारण ज्ञान देवी की शारीरिक स्थिति कुछ ही पलों में अत्यंत गंभीर हो गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले मां की भी सांस थमी
माता ज्ञान देवी को अत्यधिक विलाप करने और गहरे सदमे के कारण अचानक सांस लेने में तीव्र परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को बिगड़ते देख परिजन उन्हें आनन-फानन में तुरंत अस्पताल की तरफ लेकर भागे। परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था, क्योंकि अस्पताल पहुंचने पर वहां मौजूद चिकित्सकों ने भली-भांति जांच करने के बाद ज्ञान देवी को भी मृत घोषित कर दिया। शनिवार की सुबह जो दुखों का सिलसिला शुरू हुआ था, वह दोपहर करीब 12 बजे तक मां की भी प्राण-पखेरू उड़ने के साथ और अधिक गहरा हो गया। महज कुछ ही घंटों के अंतराल पर एक ही घर से दो अर्थियों के उठने से पूरा इलाका स्तब्ध और अवाक रह गया।
श्मशान घाट पर एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
एक ही दिन और कुछ ही घंटों के भीतर घटित हुई मां-बेटे की इन दो आकस्मिक और असमय मौतों से संपूर्ण गांव में शोक की एक गंभीर लहर दौड़ गई। शनिवार की शाम को ही गांव के स्थानीय श्मशान घाट पर मां और बेटे दोनों का एक साथ गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार संपन्न कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दिवंगत बलदेव सिंह के परिवार में उनके दो पुत्र हैं, जिनमें से छोटा बेटा उनके साथ घर पर ही निवास करता है जबकि उनका बड़ा बेटा विदेश के बहरीन देश में रहकर अपनी नौकरी करता है। त्योहारी सीजन के बीच हुई इस अप्रत्याशित त्रासदी ने इस परिवार के साथ-साथ इस दुखद अंत को देखने वाले हर शख्स की आंखें नम कर दी हैं।



















