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हमीरपुर में मार्मिक घटना: जेठानी को खोने का गम देवरानी सह न सकीं, एक घंटे के भीतर दोनों की अंतिम विदाईहिमाचल प्रदेश
7 सित॰ 2026, 11:41 am (1 घंटे पहले)· 2

हमीरपुर में मार्मिक घटना: जेठानी को खोने का गम देवरानी सह न सकीं, एक घंटे के भीतर दोनों की अंतिम विदाई

हमीरपुर जिले के बदारन गांव में जेठानी शकुंतला देवी की मौत का सदमा देवरानी कमलेश कुमारी सहन नहीं कर पाईं और महज एक घंटे बाद उनकी भी मौत हो गई, रविवार शाम दोनों की अर्थियां एक ही आंगन से उठीं।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक ही परिवार की दो महिलाओं की महज एक घंटे के अंतराल में मौत हो गई। जेठानी को खोने का गम देवरानी बर्दाश्त नहीं कर पाईं और वह भी दुनिया छोड़ गईं। रविवार शाम दोनों की अर्थियां एक ही घर के आंगन से उठीं, जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। दोनों मौतों की खबर कुछ ही घंटों में पूरे बदारन गांव में फैल गई और आसपास के घरों से लोग शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचने लगे।

नादौन के बदारन गांव में सुबह हुआ हादसा

घटना हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल स्थित बदारन गांव की है। रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे गांव की रहने वाली शकुंतला देवी, जो स्वर्गीय ईश्वर दास की पत्नी थीं, अचानक बीमार पड़ गईं। हालत तेजी से बिगड़ने लगी तो उनके बेटे विजय कुमार और घर के बाकी सदस्य उन्हें लेकर फौरन नादौन के अस्पताल की ओर दौड़े, इस उम्मीद में कि समय रहते इलाज मिल जाए। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, मगर शकुंतला देवी को बचाया नहीं जा सका और अस्पताल पहुंचने के कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई।

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एक घंटे में ही देवरानी ने भी तोड़ा दम

शकुंतला देवी की मौत की खबर जब गांव और घर तक पहुंची तो हर तरफ मातम पसर गया। यह खबर उनकी देवरानी कमलेश कुमारी तक पहुंची तो वह अंदर तक हिल गईं और रोते-रोते बेहाल हो गईं, जेठानी के इस तरह अचानक चले जाने पर उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था। परिवार अभी शकुंतला देवी के अंतिम संस्कार की तैयारी में ही जुटा था कि करीब साढ़े ग्यारह बजे कमलेश कुमारी की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई। घरवाले उन्हें भी उसी नादौन अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशें बेकार साबित हुईं और उनकी भी जान चली गई। इस तरह करीब एक घंटे के भीतर एक ही घर की दो महिलाओं की मौत ने पूरे बदारन गांव को सदमे में डाल दिया।

सगी बहनों जैसा था दोनों का रिश्ता

गांव वालों और परिजनों का कहना है कि शकुंतला देवी और कमलेश कुमारी का आपसी लगाव किसी सगी बहनों से कम नहीं था। दोनों सिर्फ देवरानी-जेठानी के रिश्ते से नहीं जुड़ी थीं, बल्कि बरसों से एक-दूसरे का सुख-दुख साझा करती आई थीं। शायद यही गहरा जुड़ाव था कि जेठानी की अचानक मौत की खबर देवरानी के लिए इतना बड़ा झटका बन गई कि वह भी उसे झेल नहीं पाईं।

एक साथ उठीं दोनों की अर्थियां, श्मशान में भी साथ जलीं चिताएं

रविवार शाम जब दोनों महिलाओं की अर्थियां घर के एक ही आंगन से एक साथ उठाई गईं, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग यह मंजर देखकर खुद को रोक नहीं पाए। इसके बाद दोनों अर्थियां साथ ही गांव के बाहर बने श्मशानघाट पहुंचीं, जहां दोनों की चिताएं भी पास-पास सजाई गईं। कुछ ही घंटों के अंतराल में एक ही परिवार की दो महिलाओं की एक साथ हुई इस अंतिम विदाई ने वहां जुटे सैकड़ों लोगों को भावुक कर दिया।

पूर्व विधायक भी पहुंचे शोक जताने

घटना की सूचना मिलते ही पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री बदारन गांव पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को इस मुश्किल घड़ी से उबरने की हिम्मत मिले, इसकी कामना की और सदस्यों को ढांढस बंधाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में पूरा गांव और प्रशासन परिवार के साथ खड़ा रहेगा। आने वाले दिनों में परिवार दोनों महिलाओं के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में एक साथ निभाएगा। इस घटना के बाद से बदारन गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

सवाल-जवाब

घटना कहां हुई?
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के नादौन उपमंडल के बदारन गांव में।
जेठानी और देवरानी के नाम क्या थे?
जेठानी का नाम शकुंतला देवी और देवरानी का नाम कमलेश कुमारी था।
शकुंतला देवी की मौत कब और कैसे हुई?
रविवार सुबह करीब 10:30 बजे तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नादौन अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।
कमलेश कुमारी की मौत कब हुई?
शकुंतला देवी की मौत के करीब एक घंटे बाद, सुबह करीब 11:30 बजे तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भी नादौन अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी भी मौत हो गई।
दोनों का आपस में क्या रिश्ता था?
कमलेश कुमारी, शकुंतला देवी की देवरानी थीं और दोनों का रिश्ता सगी बहनों जैसा गहरा था।
घटना के बाद कौन नेता गांव पहुंचे?
पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री बदारन गांव पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की।
दोनों की अंतिम विदाई कैसे हुई?
रविवार शाम दोनों महिलाओं की अर्थियां एक ही आंगन से उठीं और श्मशानघाट में दोनों की चिताएं साथ सजाई गईं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·12 मिनट पहले

यह मार्मिक घटना इस बात को रेखांकित करती है कि ग्रामीण परिवारों में आपसी संबंध कितने प्रगाढ़ होते हैं, जहाँ कई बार मानसिक आघात शारीरिक स्वास्थ्य पर अचानक और घातक असर डाल सकता है। इस प्रकार की आकस्मिक स्वास्थ्य आपदाएं ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा पहुंच और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की गहरी आवश्यकता को उजागर करती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

यह दुखद घटना केवल एक भावनात्मक सदमे का मामला नहीं, बल्कि हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी साइकोसोमैटिक स्वास्थ्य आपातस्थितियों की गंभीरता को भी दर्शाती है। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के अचानक तनाव के समय तुरंत मेडिकल रेस्पॉन्स और साइकोलॉजिकल फर्स्ट-एयड की व्यवस्था न होना एक बड़ी चुनौती है, जिस पर स्वास्थ्य प्रणाली को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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