हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस नीत सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के गंभीर वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। प्रदेश में करीब 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सरकारी लॉटरी व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार के कोष, लेखा एवं लॉटरी निदेशालय ने पेपर और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से टिकटों की बिक्री और संचालन संभालने वाले एक एकमात्र बिक्री एजेंट (Sole Selling Agent) के चयन हेतु ई-टेंडर जारी किया है। वर्तमान में लॉटरी की बिक्री तुरंत शुरू नहीं हुई है, बल्कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने, उपयुक्त एजेंसी को कार्य आबंटित करने और सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद ही टिकटों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
राजस्व जुटाने का लक्ष्य और राज्य का वित्तीय संकट
हिमाचल प्रदेश वर्तमान में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार अपने दैनिक प्रशासनिक खर्चों और विकास कार्यों के लिए नए गैर-कर राजस्व स्रोतों की निरंतर तलाश कर रही है। लॉटरी व्यवस्था की वापसी से सरकार ने प्रति वर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अपने इस फैसले के समर्थन में राज्य सरकार ने पंजाब और केरल जैसे अन्य भारतीय राज्यों का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जहाँ सरकारी लॉटरी वर्षों से राज्य कोष को सुदृढ़ करने का एक प्रमुख जरिया बनी हुई है।
एकमात्र बिक्री एजेंट के लिए कड़ी वित्तीय और लाइसेंस शर्तें
सरकारी लॉटरी के संचालन के लिए जिस एजेंसी का चयन किया जाएगा, उसके लिए वित्त विभाग ने बेहद कड़े नियम और शर्तें तय की हैं। चुनी गईSole Selling Agent कंपनी को सरकार को सालाना 10 करोड़ रुपये की निश्चित लाइसेंस फीस का भुगतान करना होगा। इस लाइसेंस फीस में प्रत्येक वर्ष 5 प्रतिशत की स्वतः बढ़ोतरी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, एजेंट के लिए हर साल कम से कम 6 करोड़ रुपये की न्यूनतम गारंटीकृत राशि (Minimum Guaranteed Amount) देना अनिवार्य होगा।
कंपनी को लॉटरी से होने वाले कुल व्यापारिक टर्नओवर का कम से कम 2 प्रतिशत राजस्व हिस्सा राज्य सरकार के साथ साझा करने की शर्त पर बोली लगानी होगी। वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चयनित एजेंसी को 30 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी या एफडीआर के रूप में सुरक्षा निधि जमा करनी होगी। निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की इच्छुक कंपनियों के लिए 2 करोड़ रुपये की ईएमडी (Earnest Money Deposit) तथा 5 लाख रुपये का निविदा शुल्क देना तय किया गया है।
टेंडर प्रक्रिया का समय और दिवाली बंपर ड्रॉ की योजना
निदेशालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को टेंडर नोटिस अधिसूचित किया गया था। इच्छुक कंपनियां 3 सितंबर 2026 से अपनी ऑनलाइन बोलियां जमा कर सकेंगी, जिसकी अंतिम तिथि 14 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। 15 सितंबर 2026 को तकनीकी बोलियां खोली जाएंगी, जिसके बाद योग्य पाई गई कंपनियों की वित्तीय बोलियां खोलने की तिथि की अलग से घोषणा होगी।
वित्तीय बोली के नतीजे आने के 30 दिनों के भीतर सफल बोलीदाता को आशय पत्र (Award Letter) सौंप दिया जाएगा। यदि पूरी टेंडर प्रक्रिया तय समय-सारणी के अनुरूप संपन्न हो जाती है, तो राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी दिवाली त्योहार के आसपास लॉटरी का पहला भव्य ड्रॉ आयोजित करने का है। टिकटों की बिक्री ऑफलाइन अधिकृत केंद्रों के अलावा डिजिटल मोबाइल ऐप्स और वेब पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भी की जाएगी।
लॉटरी विनियमन नियम 2026 और दैनिक संचालन की सीमाएं
लॉटरी प्रणाली को कानूनी ढांचा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम-2026 तैयार कर अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के तहत आम जनता के लिए लॉटरी टिकट की न्यूनतम कीमत केवल 2 रुपये रखी जा सकती है, जिससे समाज के सभी वर्ग इसमें भाग ले सकें। नए नियमों के अंतर्गत एक दिन में अधिकतम 12 नियमित लॉटरी ड्रॉ आयोजित करने की अनुमति होगी।
दैनिक ड्रॉ के अलावा सरकार की योजना वर्ष में तीन विशेष बड़े बंपर ड्रॉ आयोजित करने की है, जिन्हें दिवाली, नए साल और अन्य प्रमुख क्षेत्रीय या राष्ट्रीय त्योहारों के अवसर पर निकाला जाएगा। हालांकि, नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) जैसे राष्ट्रीय महत्व के दिनों में कोई भी लॉटरी ड्रॉ आयोजित नहीं किया जाएगा। पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चयनित एजेंसी को एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) गठित करना होगा, जो हर लेन-देन का डिजिटल ऑडिट ट्रेल तैयार रखेगा।
वर्ष 1999 के प्रतिबंध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी का इतिहास नया नहीं है। राज्य में वर्ष 1999 तक लॉटरी का नियमित संचालन होता था। हालांकि, 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय लॉटरी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों में बढ़ते सामाजिक दुष्परिणामों, वित्तीय बर्बादी और टिकट बिक्री में धोखाधड़ी की शिकायतों के चलते इसे बंद करने का निर्णय लिया गया था। अब 27 वर्षों बाद वर्तमान सरकार ने आर्थिक तंगी का हवाला देकर इसे पुनः आरंभ किया है।
बीजेपी का तीखा हमला और अनुराग ठाकुर की मांग
लॉटरी दोबारा शुरू करने के फैसले पर राज्य में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। हमीरपुर से बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक पत्र भेजकर टेंडर प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि लॉटरी जैसे उपायों पर निर्भरता राज्य के गंभीर वित्तीय संकट का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकती, बल्कि इससे गरीब जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को लॉटरी चलाने के बजाय जीएसटी अनुपालन में सुधार लाने, कर चोरी रोकने और पारदर्शी डिजिटल एकीकरण के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।




















