हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान राज्य की कानून और व्यवस्था की स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में दर्ज किए गए गंभीर अपराधों का आधिकारिक विवरण प्रस्तुत किया। सरकार द्वारा दी गई इस जानकारी में जघन्य अपराधों, महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा तथा विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों के आंकड़ों के साथ-साथ कर्मचारियों और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी नीतिगत योजनाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।
तीन वर्षों में दर्ज प्रमुख अपराध और न्यायिक लंबितता के आंकड़े
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने करसोग से भाजपा के विधायक दीप राज द्वारा पूछे गए सवाल का लिखित उत्तर देते हुए बताया कि राज्य में 31 जुलाई 2026 तक पिछले तीन वर्षों की अवधि में हत्या, चोरी, डकैती और अपहरण के कुल 5,773 मामले पंजीकृत किए गए हैं। इन कुल मामलों में से चोरी के सबसे अधिक 3,481 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि अपहरण के 1,970 मामले और डकैती के 13 मामले शामिल हैं। इसी समयावधि में राज्यभर में हत्या के कुल 309 मामले दर्ज किए गए।
सदन में प्रस्तुत लिखित उत्तर के अनुसार, हत्या के दर्ज 309 मामलों में से कानून की अदालतों द्वारा केवल 5 मामलों में आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, जबकि 6 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया है। वर्तमान समय में हत्या से संबंधित 233 मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं और उनकी कानूनी प्रक्रिया जारी है।
महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों का विस्तृत विवरण
विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जवाब में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों का विस्तृत ब्योरा भी शामिल किया गया। पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,379 मामले दर्ज किए गए। इस आंकड़े में दुष्कर्म के 1,287 मामले, महिलाओं की हत्या के 96 मामले, उत्पीड़न के 646 मामले, छेड़छाड़ के 435 मामले तथा शोषण के 1,915 मामले शामिल हैं।
दुष्कर्म के दर्ज 1,287 मामलों में से केवल 66 मामलों में ही आरोपियों को दोषी ठहराया जा सका है। इसके अलावा 219 मामलों में आरोपियों को अदालत से बरी कर दिया गया है, जबकि 775 मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं और उन पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
अपराध के मामलों में जिलावार स्थिति और शीर्ष प्रभावित क्षेत्र
राज्य के विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों की तुलनात्मक समीक्षा से पता चलता है कि शिमला जिले में हत्या और चोरी के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। शिमला में इस तीन साल की अवधि के दौरान हत्या के 50 मामले सामने आए, जो राज्य के किसी भी जिले में सबसे अधिक हैं। इसी तरह चोरी के मामलों में भी शिमला जिला 455 मामलों के साथ राज्य में शीर्ष स्थान पर रहा।
दूसरी ओर, महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों में मंडी जिला सबसे आगे रहा, जहां इस अवधि में 187 मामले दर्ज किए गए। दुष्कर्म के मामलों में शिमला और सिरमौर जिले संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे, जहां दोनों ही जिलों में 168 एवं 168 मामले दर्ज किए गए हैं।
बहुउद्देशीय कर्मियों के लिए एक समान नीति और ओबीसी आरक्षण पर रुख
सदन में कांग्रेस विधायक आर.एस. बाली द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रशासनिक प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में कार्यरत बहुउद्देशीय कर्मचारियों के लिए सरकार एक समान नीति बनाने पर काम कर रही है। वर्तमान में अलग-अलग विभागों द्वारा बनाई गई नीतियों के कारण इन कर्मियों की सेवा शर्तें और मानदेय भिन्न हैं, जिससे असंतोष रहता है। नई समान नीति लागू होने से सभी विभागों के बहुउद्देशीय कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता आ जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने के मुद्दे पर विचार करेगी। हालांकि, यह कदम वर्ष 2027 में राष्ट्रीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद ही उठाया जाएगा।



















