चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में संपन्न हुए छात्र संघ चुनाव में हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से ताल्लुक रखने वाले अरमान सिंह भिंडर ने उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट) पद पर परचम लहराया है। सोलन के नालागढ़ क्षेत्र अंतर्गत चूहूवाल गांव निवासी अरमान ने चुनाव मैदान में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को करीब 500 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। अरमान बीते छह वर्षों से छात्र सक्रियता और सामाजिक गतिविधियों में निरंतर जुटे रहे हैं। उन्होंने डीएवी कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर से ही एलएलबी की डिग्री हासिल की और वर्तमान समय में वे मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं।
गृह क्षेत्र पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य अभिनंदन
चुनाव परिणाम घोषित होने और ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद अरमान सिंह भिंडर जब पहली बार अपने गृह क्षेत्र नालागढ़ पहुंचे, तो स्थानीय निवासियों और समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला। क्षेत्रवासियों ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बैंड-बाजे की धुन पर नाचते हुए उनका जोरदार स्वागत किया। समर्थकों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। इसके साथ ही उनके निवास स्थान पर बधाई देने वाले परिजनों, ग्रामीणों और राजनीतिक-सामाजिक हस्तियों का तांता लगा हुआ है। पूरे सोलन जिले और नालागढ़ क्षेत्र में इसे एक गर्व का विषय माना जा रहा है।
राजनीतिक बैक-अप के बिना छात्र मोर्चे की एकजुटता से मिली सफलता
इस चुनाव में अरमान सिंह भिंडर ने पीयूडीएफ (पंजाब यूनिवर्सिटी डेमोक्रेटिक फ्रंट) छात्र संगठन के प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश की थी। अरमान के अनुसार, उनके पास किसी भी स्थापित राजनीतिक दल का समर्थन या बाहरी बैक-अप उपलब्ध नहीं था। मतदान की तारीख से महज 25 दिन पहले विभिन्न छात्र समूहों से जुड़े विद्यार्थियों ने एकजुट होकर इस नए संगठन का गठन किया था। लगभग 500 वोटों से मिली इस निर्णायक जीत के बाद अरमान ने इसे अपनी व्यक्तिगत विजय मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत कैंपस में अध्ययनरत लगभग 18 हजार विद्यार्थियों की जीत है और वे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
बुनियादी सुविधाओं के सुधारीकरण पर रहेगा मुख्य ध्यान
उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही अरमान ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता बड़े-बड़े हवाई दावों के स्थान पर विश्वविद्यालय के दैनिक जीवन से जुड़े बुनियादी मुद्दों का निस्तारण करवाना होगी। उन्होंने बताया कि परिसर में बेहतर वाई-फाई कनेक्टिविटी, दीक्षांत समारोह का सुचारू आयोजन, आंतरिक परिवहन व्यवस्था, स्वच्छता और हाइजीन जैसे जरूरी मुद्दों को प्रमुखता से हल कराया जाएगा। जब तक विद्यार्थियों की रोजमर्रा की बुनियादी समस्याएं हल नहीं होतीं, तब तक विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू नहीं माना जा सकता। उनका प्रयास व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने का रहेगा।



















