हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले एक गरीब परिवार पर भारी विपत्ति आ पड़ी है। कलहणी पंचायत के निवासी योगराज रोजमर्रा की मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उनके छह साल के बेटे दिव्यांशु की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। बच्चे की जान बचाने की जद्दोजहद में पिता अपनी पूरी क्षमता लगा चुके हैं और अब तक पंद्रह लाख रुपये के भारी कर्ज के नीचे दब चुके हैं। इसके बाद भी बच्चे का जीवन बचाने के लिए परिवार को लगभग आठ से दस लाख रुपये की अतिरिक्त राशि की तत्काल आवश्यकता है। आर्थिक संकट से घिरे इस बेबस परिवार ने अब समाज, प्रशासन और दानी सज्जनों से आर्थिक सहयोग की अपील की है।
शुरुआती बीमारी से ट्रांसप्लांट तक का संघर्ष
इस संकट की शुरुआत लगभग तीन वर्ष पहले हुई थी, जब दिव्यांशु केवल दो साल का था। उस दौरान स्वास्थ्य जांच में डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि मासूम की दोनों किडनियां गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हैं। चिकित्सीय सलाह में यह स्पष्ट किया गया था कि एक किडनी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है और संक्रमण को फैलने से रोकने तथा दूसरी किडनी को सुरक्षित रखने के लिए उसे तुरंत निकालना होगा। अपने नन्हे बच्चे को बचाने के लिए पिता ने सगे-संबंधियों, जान-पहचान वालों और बैंक से कर्ज लेकर करीब पंद्रह लाख रुपये जुटाए। उपचार को आगे बढ़ाने के लिए योगराज लगभग एक साल पहले अपने बेटे को लेकर पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे।
परिवार को पूरा विश्वास था कि बड़े अस्पताल में इलाज मिलने के बाद उनका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा, परंतु परेशानियां खत्म होने के बजाय और बढ़ गईं। पीजीआई चंडीगढ़ में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि दिव्यांशु की दूसरी किडनी की कार्यक्षमता भी लगातार घट रही है और वह भी खराब होने की कगार पर है। चिकित्सकों के अनुसार, अब बच्चे के पास एकमात्र विकल्प किडनी ट्रांसप्लांट ही बचा है। इस जटिल सर्जरी और उससे जुड़े मेडिकल खर्चों के लिए कम से कम आठ से दस लाख रुपये की व्यवस्था करनी होगी।
नई स्वास्थ्य जटिलताएं और बिखरता परिवार
किडनी की समस्या के साथ-साथ दिव्यांशु को एक अन्य गंभीर दिमागी बीमारी ने भी अपनी चपेट में ले लिया है। इस मस्तिष्क विकार का इलाज भी इस समय चंडीगढ़ में डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है, जिससे दवाइयों और चिकित्सा का दैनिक खर्च काफी बढ़ गया है। बीमारी के इस लंबे दौर ने पूरे परिवार की सामान्य दिनचर्या को तहस-नहस कर दिया है।
योगराज के घर में बेटे के अलावा दो मासूम बेटियां भी हैं, जिनमें से एक दूसरी कक्षा में और दूसरी चौथी कक्षा में पढ़ाई करती है। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए मां कृष्णा देवी दिन-रात पीजीआई चंडीगढ़ में बेटे की देखभाल में लगी हुई हैं। घर में बच्चों की देखरेख करने वाला कोई नहीं बचा, जिसके कारण दोनों छोटी बेटियों को गांव में पड़ोसियों के सहारे छोड़ना पड़ा है। घर के मुखिया योगराज मजदूरी छोड़कर बेटे के जीवन की रक्षा और पैसों के इंतजाम में दिन-रात एक कर रहे हैं।
प्रशासन से गुहार और सहायता के लिए बैंक विवरण
लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ के बीच परिवार ने सरकारी मदद पाने की हरसंभव कोशिश की। योगराज ने मंडी के उपायुक्त को औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपकर राहत कोष से वित्तीय सहायता की मांग की थी, परंतु अभी तक उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी इमदाद नहीं मिल पाई है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि तय समय के भीतर किडनी प्रत्यारोपण नहीं हुआ तो मासूम की जान को गहरा खतरा हो सकता है।
निराशा के इस दौर में पिता ने सामाजिक संगठनों और सक्षम नागरिकों से आर्थिक मदद देने का विनम्र आग्रह किया है। जो भी लोग इस छह वर्षीय मासूम दिव्यांशु का जीवन बचाने में योगदान देना चाहते हैं, वे नीचे दिए गए बैंक खाते या डिजिटल माध्यम से सीधी सहायता भेज सकते हैं
- खाता धारक का नाम: योगराज
- बैंक का नाम: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- शाखा: पंडोह, हिमाचल प्रदेश
- खाता संख्या: 40710783188
- आईएफएससी कोड: SBIN0014693
- गूगल पे नंबर: 82199-95377



















