भोजन समाप्त करते ही कई लोगों को पेट में भारीपन, खिंचाव और गैस बनने की गंभीर शिकायत होने लगती है। जब यह परेशानी लगातार बनी रहती है तो खट्टी डकारें आने लगती हैं और सीने में तीखी जलन का अनुभव होने लगता है। ऐसे अस्वस्थ पाचन चक्र से राहत पाने के लिए पुणे स्थित इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और जनरल फिजिशियन डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंखे ने कुछ बेहद असरदार घरेलू नुस्खों और जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी साझा की है। इन उपायों को अपनी दिनचर्या में जोड़कर उदर संबंधी दिक्कतों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पाचन तंत्र को सुकून देने वाले पांच प्रमुख घरेलू नुस्खे
पेट के भारीपन और गैस्ट्रिक दबाव को कम करने में रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें दवा की तरह काम करती हैं। डॉक्टर शालिनी सिंह सालुंखे ने पाचन को सुचारू बनाने के लिए इन पांच विकल्पों के इस्तेमाल की सलाह दी है
- अदरक का गुनगुना पानी: अदरक का पानी पाचन मार्ग में होने वाली असुविधा को शांत करने में सहायक होता है। इसे तैयार करने के लिए एक कप सादे पानी में ताजे अदरक के बारीक टुकड़े डालकर अच्छी तरह उबाल लें। जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तब घूंट-घूंट करके इसका सेवन करें।
- सौंफ का उबला पानी: पेट की गड़बड़ियों और गैस के निवारण के लिए सौंफ का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर खौलाएं और फिर इस काढ़े को छानकर पिएं। यह उदर की मांसपेशियों को आराम देने में मददगार होता है।
- आहार में पके केले का उपयोग: केला फाइबर का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत माना जाता है, जिसे दैनिक संतुलित खानपान में आसानी से शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों की क्रियाशीलता को दुरुस्त रखते हैं और नियमित मल त्याग को बनाए रखने में सीधी मदद करते हैं।
- जीरे का अर्क युक्त पानी: भोजनोपरांत पेट के भारीपन से जूझ रहे व्यक्तियों को जीरे का पानी पीने से तुरंत हल्कापन महसूस हो सकता है। इसे बनाने की विधि बेहद सरल है, जिसमें एक कप खौलते पानी में आधा चम्मच जीरा पकाया जाता है और फिर छानकर उस गुनगुने जल का घूंट लिया जाता है।
- कैमोमाइल टी का सेवन: कैमोमाइल टी एक लोकप्रिय हर्बल चाय है, जिसका हल्का प्रभाव शरीर और पाचन तंत्र को शिथिलता प्रदान करता है। भोजन के बाद होने वाली बेचैनी, भारीपन और पाचन मार्ग की जटिलताओं को दूर करने के लिए कई लोग इस चाय को पीना पसंद करते हैं।
भोजन के तौर-तरीकों में सुधार भी है बेहद आवश्यक
सिर्फ घरेलू उपचार अपनाने से पूरी राहत मिलना संभव नहीं है, जब तक कि भोजन करने की मूल आदतों में सुधार न किया जाए। डॉक्टर के अनुसार, खाना हमेशा शांति से और धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए, क्योंकि जल्दबाजी में निगलने से पेट में हवा अधिक मात्रा में प्रवेश कर जाती है, जिससे गैस का दबाव बढ़ता है।
इसके साथ ही, खाना समाप्त होते ही तुरंत बिस्तर पर लेट जाने की आदत पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। भोजन ग्रहण करने के बाद कम से कम दस से पंद्रह मिनट तक हल्की गति से टहलना पाचन क्रिया को तेज करता है। इसके अलावा, रात के खाने का समय शाम सात बजे से पहले तय करना पेट की सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होता है, जिससे शरीर को भोजन पचाने का पर्याप्त समय मिल जाता है।



















