कनाडा और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता बेनतीजा समाप्त होने के बाद कनाडाई कारोबारी जगत में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। रॉयल बैंक ऑफ कनाडा से जुड़ी विश्लेषक क्लेयर फैन के अनुसार, अगस्त के शुरुआती पखवाड़े तक व्यावसायिक धारणा में लगातार सुधार देखा जा रहा था, लेकिन 21 अगस्त को दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत टूटने के तुरंत बाद यह रुझान अचानक पलट गया। बातचीत के विफल होते ही कॉर्पोरेट विश्वास, निर्यात दृष्टिकोण और पूंजीगत निवेश की योजनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि दूसरी तरफ मुद्रास्फीति की चिंताओं ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है।
व्यापार वार्ता की विफलता और निर्यात में मंदी
अगस्त के मध्य तक कनाडाई उद्योग जगत उम्मीद जता रहा था कि अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में स्थिरता आएगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलेगा। हालांकि, 21 अगस्त को जैसे ही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हुई, उद्योग जगत की उम्मीदों को गहरा झटका लगा। इस घटनाक्रम के बाद जुटाए गए आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि विदेशी बिक्री यानी निर्यात को लेकर कंपनियों की उम्मीदें काफी घट गई हैं। इसके अलावा, आगामी तिमाहियों के लिए नए पूंजीगत निवेश की योजनाओं को भी कंपनियों ने टालना या सीमित करना शुरू कर दिया है।
विश्लेषक क्लेयर फैन का कहना है कि फर्मों के बीच समग्र परिस्थितियां अगस्त की शुरुआत तक मजबूत हो रही थीं, लेकिन 21 अगस्त के बाद एकत्र किए गए साक्ष्य स्पष्ट रूप से कारोबारी धारणा, निर्यात और निवेश में कमजोरी के साथ-साथ मुद्रास्फीति की बढ़ती आशंकाओं की ओर इशारा करते हैं। जब तक सीमा पार व्यापार को लेकर स्पष्ट नीतिगत रूपरेखा तैयार नहीं होती, तब तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में सतर्कता का माहौल बने रहने की आशंका है।
कंपनियों की मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं में तीव्र उछाल
कनाडा की कंपनियों के बीच आने वाले वर्षों में महंगाई के स्तर को लेकर अनुमानों में अप्रत्याशित उछाल आया है। मई से अगस्त के महीनों के दौरान जब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई थी और व्यापार को लेकर कुछ अनिश्चितताएं कम हुई थीं, तब कंपनियों की एक से दो साल की महंगाई दर की उम्मीदों में गिरावट दर्ज की गई थी। उस दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मूल्य दबाव सामान्य हो रहा है, लेकिन सितंबर में स्थिति पूरी तरह बदल गई और महंगाई के अनुमान दोबारा वसंत ऋतु के उच्च स्तर के करीब पहुंच गए।
जुलाई और अगस्त के महीनों में कंपनियों की अल्पकालिक महंगाई उम्मीदें अप्रैल के चरम स्तर से नीचे बनी हुई थीं। इसके विपरीत, सितंबर के महीने में इनमें तेज उछाल देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों की एक साल आगे की मुद्रास्फीति प्रत्याशा बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई, जबकि दो साल आगे की मुद्रास्फीति प्रत्याशा 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इन अनुमानों में आया उछाल यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला और परिचालन लागत में कंपनियों को लंबे समय तक राहत मिलने की संभावना नहीं दिख रही है।
उपभोक्ताओं पर पड़ेगा बोझ, आधी कंपनियां कीमतें बढ़ाने को तैयार
इस ताजा आकलन का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सर्वेक्षण में शामिल 50 प्रतिशत कंपनियों ने अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने का फैसला किया है। यह अनुपात पिछली तिमाही की तुलना में कहीं अधिक है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में कनाडाई खुदरा बाजार में विभिन्न उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ना तय है।
कंपनियों का कहना है कि जब तक लागत नियंत्रण में नहीं आती, उनके पास अंतिम खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लाभ मार्जिन पर बढ़ते दबाव की वजह से अब अधिकांश कारोबारी घराने इनपुट लागत को खुद वहन करने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे खुदरा मुद्रास्फीति के ऊंचे बने रहने की संभावना और मजबूत हो गई है।
उपभोक्ता प्रत्याशाएं और पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव
उपभोक्ताओं की अल्पकालिक महंगाई की उम्मीदें पहले से ही ऊंचे स्तरों पर बनी हुई थीं और तीसरी तिमाही में उनमें कोई खास बदलाव नहीं आया। हालांकि, तीसरी तिमाही का सबसे बड़ा घटनाक्रम यह रहा कि उपभोक्ताओं की लंबी अवधि यानी पांच साल आगे की मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं में तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह दीर्घकालिक अनुमान अब बढ़कर अल्पकालिक उच्च प्रत्याशाओं के लगभग बराबर पहुंच गया है।
लंबी अवधि की महंगाई की उम्मीदों में इस तेजी का प्राथमिक कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष को माना जा रहा है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागतों को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। उपभोक्ताओं को डर है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में होने वाली वृद्धि लंबे समय तक उनकी क्रय शक्ति को प्रभावित करती रहेगी।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल और तकनीकी आय पर नजर
कनाडा के घटनाक्रमों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) बढ़कर 0.7000 के स्तर की ओर अग्रसर हुआ। बाजार के सुधरते माहौल और अमेरिकी डॉलर की तेजी पर लगे अस्थायी विराम ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों और प्रमुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकी कंपनियों के आगामी वित्तीय नतीजों से पहले निवेशकों की सतर्कता इस मुद्रा जोड़े की बढ़त को सीमित कर सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान 158.50 के आसपास स्थिर बना रहा। विदेशी मुद्रा व्यापारी शुक्रवार को जारी होने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले किसी भी बड़े सौदे से बचते दिखे। इस बीच, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर ने अमेरिकी डॉलर को जापानी येन के मुकाबले समर्थन देना जारी रखा है।
सोने के भाव पर दबाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की स्थिति
यूरोपीय व्यापार सत्र के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई और यह घटकर लगभग 4,120 डॉलर के स्तर पर आ गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पीली धातु पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अमेरिका की बड़ी क्लाउड और तकनीकी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों से ठीक पहले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार के संकेत दिखे हैं।
वर्तमान में, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5.13 प्रतिशत के आसपास कारोबार कर रही है, हालांकि सोमवार को इसमें 1.2 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई थी। यील्ड के ऊंचे रहने से बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति जैसे सोने की मांग प्रभावित हो रही है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तेजी पर ब्रेक लगा है।
क्रिप्टो बाजार में नियर प्रोटोकॉल का रुख
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में नियर प्रोटोकॉल (NEAR) की कीमत में मंगलवार को लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट सोमवार को दर्ज की गई 2 प्रतिशत की कमजोरी के ठीक बाद सामने आई है। इस मूल्य गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग स्थिर बनी हुई है। बिटवाइज़ द्वारा प्रबंधित नियर केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में सोमवार को 5 मिलियन डॉलर से अधिक का ताजा प्रवाह दर्ज किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशक लंबी अवधि के दृष्टिकोण से इस संपत्ति में रुचि बनाए हुए हैं।















