हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का भव्य आगाज होने जा रहा है। आगामी 21 अक्तूबर को शाम करीब चार बजे ढालपुर स्थित रथ मैदान में भगवान रघुनाथ की विशाल रथयात्रा के साथ इस सात दिवसीय सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस बल की तैनाती
ऐतिहासिक ढालपुर मैदान और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। उत्सव के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुल 1265 पुलिस और होमगार्ड के जवान मुस्तैद रहेंगे। कुल्लू के पुलिस अधीक्षक अभिषेक सेकर ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पूरे ढालपुर मैदान परिसर को कुल 6 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर की निगरानी और कमान एक राजपत्रित अधिकारी के हाथों में सौंपी गई है ताकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
आधुनिक तकनीक और निगरानी के उपाय
सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए पुलिस प्रशासन ने आधुनिक तकनीकों का भी भरपूर इस्तेमाल किया है। उत्सव स्थल और उसके आसपास कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों और संवेदनशील बिंदुओं पर आसमान से निगरानी के लिए 5 अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों का भी उपयोग किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए विशेष एंटी गुंडा सेल की टीमें तैनात रहेंगी। साथ ही मेलों में अक्सर होने वाली चोरी और पकेटमारी की घटनाओं को रोकने के लिए भी सादे कपड़ों में पुलिस बल मुस्तैद रहेगा।
परिवहन सुविधा और विशेष बसों का संचालन
उत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष और कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने इस अवसर पर चलाई जाने वाली विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए कुल 30 इलेक्ट्रिक मेला स्पेशल बसें लगाई गई हैं। इसके अलावा यात्रियों की मांग को पूरा करने के लिए 15 साधारण बसों की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इन बसों के जरिए रायसन से लेकर बजौरा, बंजार और आनी तक के मार्गों पर निरंतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। मेला अवधि के दौरान बसों की फेरियां हर 15 मिनट के अंतराल पर संचालित होंगी ताकि किसी भी यात्री को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। स्थानीय लोगों और पर्यटकों की सुविधा के लिए ये बसें रात के 1 बजे तक लगातार संचालित होती रहेंगी।
सांस्कृतिक संध्याएं और देवी-देवताओं का महाकुंभ
इस धार्मिक महाकुंभ में आने वाले दर्शकों के मनोरंजन और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए कई जाने-माने कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। सांस्कृतिक संध्याओं के दौरान प्रसिद्ध पंजाबी गायक सतिंदर सरताज और लोकप्रिय गायक सलमान अली सहित कई अन्य मशहूर कलाकार अपनी गायकी का जलवा बिखेरेंगे। इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण क्षेत्र के देवी-देवताओं की उपस्थिति होती है। इस भव्य धार्मिक उत्सव में लगभग 300 से अधिक देवी-देवता शामिल होंगे। दशहरा उत्सव समिति की ओर से इस बार जिले के कुल 347 देवी-देवताओं को औपचारिक रूप से निमंत्रण भेजा गया है, जिनकी भव्य उपस्थिति इस पर्व को और अधिक अलौकिक बनाएगी।
मनाली से माता हिडिम्बा का आगमन
कुल्लू दशहरा उत्सव की शुरुआत की अपनी एक अलग और अनूठी परंपरा है, जिसके तहत मनाली से माता हिडिम्बा की यात्रा शुरू हो चुकी है। धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, माता हिडिम्बा के कुल्लू पहुंचने के बाद ही आधिकारिक रूप से दशहरा उत्सव का आगाज माना जाता है। घाटी की अधिष्ठात्री और दशहरा उत्सव की रक्षक के रूप में पूजी जाने वाली माता हिडिम्बा के बिना इस पर्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जब तक डूंगरी मंदिर से माता हिडिम्बा की पालकी ढालपुर मैदान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक भगवान रघुनाथ जी की मुख्य रथयात्रा का आरंभ नहीं होता है। माता के आगमन के साथ ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर होकर रथ के साथ आगे बढ़ते हैं और इस ऐतिहासिक उत्सव का विधिवत श्रीगणेश होता है।



















