मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 27 अगस्त 2026 की तड़के उस समय हड़कंप मच गया जब शिकार की तलाश में एक जंगली तेंदुआ रिहायशी इलाके में दाखिल हो गया। यह घटना मोहगांव ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बकवारा गांव के मडकाटोला टोले में सुबह लगभग 4:30 बजे की है। तेंदुआ एक स्थानीय किसान के घर में घुसकर पालतू बकरियों पर हमला करने की कोशिश कर रहा था। गृहस्वामी की त्वरित सूझबूझ और अदम्य साहस के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और बाद में वन विभाग की टीम ने जानवर को सकुशल बाहर निकाल लिया।
मवेशियों की आवाज सुनकर जागे किसान ने तेंदुए को कमरे में किया कैद
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय किसान तेजलाल मरकाम सुबह करीब 4:30 बजे अपने घर में बने बाड़े से बकरियों की असामान्य और घबराहट भरी आवाजें सुनकर अचानक जाग गए। स्थिति का जायजा लेने के लिए जब वे बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि एक खूंखार तेंदुआ घर के भीतर घुस आया है और बकरियों को अपना शिकार बनाने का प्रयास कर रहा है। खतरे की गंभीरता को तुरंत समझते हुए तेजलाल मरकाम ने बिना घबराए काम लिया। उन्होंने तेजी से कमरे का बाहरी दरवाजा बंद कर दिया और तेंदुए को उसी कमरे में कैद कर दिया। जानवर को सुरक्षित रूप से बंद करने के तुरंत बाद उन्होंने गांव के अन्य लोगों को सतर्क किया और वन विभाग को इस घटना की जानकारी दी।
कान्हा नेशनल पार्क से बुलाए गए पशु चिकित्सक, तेंदुए को किया गया ट्रैंकुलाइज
सूचना प्राप्त होते ही वन विकास निगम के लाम्टा प्रोजेक्ट के अधिकारी और कर्मचारियों का दल तुरंत मौके पर पहुंचा। गांव के बीचोबीच एक मकान में हिंसक जानवर के फंसे होने के कारण आसपास के इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन को सुरक्षित अंजाम देने के लिए पास स्थित कान्हा नेशनल पार्क से एक विशेषज्ञ पशु चिकित्सक को मौके पर बुलाया। रेस्क्यू टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक रणनीति तैयार की। विशेषज्ञ डॉक्टर ने डार्ट की मदद से तेंदुए को ट्रैंकुलाइज यानी बेहोश किया। जब तेंदुआ पूरी तरह बेहोश हो गया, तब टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से घर से बाहर निकाला। इस पूरे अभियान के दौरान न तो किसी ग्रामीण को कोई चोट आई और न ही तेंदुए को कोई नुकसान पहुंचा।
स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया
तेंदुए को बाहर निकालने के बाद पशु चिकित्सा टीम ने उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। वन अधिकारियों ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी उम्र लगभग डेढ़ से दो साल के बीच है। स्वास्थ्य की पुष्टि होने के बाद अधिकारियों ने तेंदुए को पिंजरे में रखकर सुरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचाया और वहां उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। तड़के हुई इस घटना की खबर फैलते ही आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग मडकाटोला पहुंचे थे। जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच बार-बार होने वाले आमने-सामने के संपर्क ने एक बार फिर स्थानीय सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन पर चर्चा छेड़ दी है।





















