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लापरवाही की इंतहा: न्यू संजय नगर में 32 लाख रुपये की नई बिल्डिंग पर जड़ा ताला, पास में पिंजरे जैसे स्थान पर पढ़ाई कर रहे बच्चेराजस्थान
26 अग॰ 2026, 4:44 pm (3 घंटे पहले)· 2

लापरवाही की इंतहा: न्यू संजय नगर में 32 लाख रुपये की नई बिल्डिंग पर जड़ा ताला, पास में पिंजरे जैसे स्थान पर पढ़ाई कर रहे बच्चे

जयपुर के भट्टा बस्ती में 32 लाख रुपये की लागत से बना नया सरकारी स्कूल भवन पिछले 3 साल से ताले में बंद पड़ा है, जबकि 500 मीटर दूर बच्चे बेहद संकीर्ण और पिंजरेनुमा जगह में पढ़ने को मजबूर हैं।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकारी तंत्र की भारी संवेदनहीनता और बदहाली को उजागर करने वाली तस्वीर सामने आई है। शहर के भट्टा बस्ती स्थित न्यू संजय नगर इलाके में लगभग 32 लाख रुपये की लागत से एक नया सरकारी स्कूल भवन तैयार किया गया था। निर्माण कार्य पूरा हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन इस भवन पर लगातार ताला लटका हुआ है। सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू यह है कि इस बंद पड़े सर्वसुविधायुक्त परिसर से महज 500 मीटर की दूरी पर छोटे-छोटे बच्चे अपना स्कूल भवन न होने के कारण एक बेहद तंग, असुरक्षित और पिंजरेनुमा स्थान पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। एक ही क्षेत्र में सरकारी धन के दुरुपयोग और नौनिहालों की उपेक्षा की यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जर्जर भवन से नई उम्मीद तक का सफर और तीन साल से लटका ताला

न्यू संजय नगर के इस सरकारी स्कूल का इतिहास स्थानीय निवासियों की निराशा को साफ दर्शाता है। पूर्व में इस स्कूल परिसर में लगभग 166 विद्यार्थी पंजीकृत थे और नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ पुराना स्कूल भवन अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच गया। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने उन विद्यार्थियों को अस्थाई तौर पर पास के अन्य स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद इलाके के निवासियों को आस बंधी जब लगभग 32 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ और करीब तीन साल पहले एक मजबूत, नया स्कूल भवन बनाकर तैयार कर दिया गया। स्थानीय अभिभावकों को पूरा भरोसा था कि नई इमारत बनते ही उनके बच्चों की कक्षाएं वापस अपने ही मोहल्ले में शुरू हो जाएंगी। लेकिन भवन निर्माण पूर्ण होने के बाद भी प्रशासनिक तालमेल और इच्छाशक्ति की कमी के कारण कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हो सका। पिछले तीन वर्षों से इमारत के मुख्य द्वार पर ताला जड़ा हुआ है और बच्चे आज भी भटकने को मजबूर हैं।

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500 मीटर की दूरी पर पिंजरेनुमा स्थान में पढ़ाई और बढ़ता ड्रॉपआउट

इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि निर्मित इमारत के 500 मीटर के दायरे में चल रहा एक अन्य स्कूल अपने खुद के भवन के लिए तरस रहा है। वहां अध्ययनरत बच्चों के पास बैठने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और पूरा स्कूल पिंजरे जैसी तंग जगह में संचालित हो रहा है। पास में ही लाखों रुपये की लागत से बनी आधुनिक इमारत खाली पड़ी है, जबकि कुछ ही दूरी पर बच्चे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। पास में स्कूल की सुविधा न मिलने के कारण छोटे बच्चों को हर दिन काफी दूर स्थित दूरदराज के विद्यालयों में जाने के लिए विवश होना पड़ता है। लंबी दूरी, पैदल चलने की परेशानी और असुरक्षा के माहौल के कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवारों ने अपने छोटे बच्चों को दूर भेजने में असमर्थ होने के कारण स्कूल से ही निकाल लिया है, जिससे क्षेत्र में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या बढ़ी है।

बंद पड़ी सरकारी संपत्ति बनी समाजकंटकों और नशेड़ियों का अड्डा

स्थानीय नागरिकों ने इस प्रशासनिक लापरवाही के एक और खतरनाक सामाजिक दुष्परिणाम की ओर ध्यान दिलाया है। लंबे समय से लावारिस और बंद पड़े रहने के कारण इस नवनिर्मित 32 लाख रुपये के भवन का दुरुपयोग शुरू हो गया है। निवासियों का आरोप है कि शाम ढलते ही असामाजिक तत्व और नशा करने वाले लोग इस परिसर पर कब्जा जमा लेते हैं। जिस स्थान पर बच्चों की खिलखिलाहट, प्रार्थना और पढ़ाई की गूंज होनी चाहिए थी, वहां अब नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। इससे आसपास के पूरे आवासीय इलाके का माहौल खराब हो रहा है और स्थानीय लोगों में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है।

विधानसभा में स्वीकारे आंकड़े: प्रदेश भर में 611 स्कूल बिना भवन के

जयपुर का यह मामला कोई पृथक घटना नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के पूरे शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत को दर्शाता है। राज्य सरकार ने स्वयं विधानसभा में आंकड़े पेश करते हुए यह स्वीकार किया है कि पूरे प्रदेश में 611 सरकारी स्कूल बिना किसी अपने भवन के चल रहे हैं। राज्य के कई दूरदराज इलाकों में बच्चे खुले आसमान के नीचे, तबेले में, किरायों की छोटी दुकानों में या पेड़ों की छांव में बैठकर अपनी कक्षाएं पूरी करने को विवश हैं। ऐसे संकटपूर्ण परिदृश्य के बीच जब राज्य की राजधानी जयपुर में 32 लाख रुपये से तैयार भवन तीन वर्षों से धूल फांक रहा हो, तो यह शिक्षा विभाग की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी प्रणाली की पोल खोलता है।

राजनीतिक बयानबाजी और हवामहल विधायक का आश्वासन

मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है। वहीं, हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक बालमुकुंदाचार्य से जब इस विरोधाभास के बारे में पूछा गया कि एक ओर बच्चे पिंजरेनुमा जगह में पढ़ रहे हैं और दूसरी तरफ 32 लाख का भवन बंद है, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह स्थिति पूरी तरह से गलत है। विधायक ने इस घोर लापरवाही के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश देकर जल्द से जल्द बच्चों को इस नए भवन में स्थानांतरित करवाकर नियमित कक्षाएं शुरू करवाने की व्यवस्था करेंगे।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते तीखे सवाल

अब मुख्य सवाल यही बना हुआ है कि जब 32 लाख रुपये का लोक धन खर्च करके सार्वजनिक भवन पूर्ण रूप से तैयार हो चुका था, तो उसे तीन साल तक बंद क्यों रखा गया। प्रदेश में पिछले ढाई साल से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार कार्यरत है, लेकिन इसके बावजूद इस भवन को खोलकर बच्चों के सुपुर्द करने की जरूरत महसूस क्यों नहीं की गई? भट्टा बस्ती के न्यू संजय नगर की यह स्थिति केवल एक ताला बंद इमारत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र का रिपोर्ट कार्ड है जहां एक तरफ अभाव में बच्चे पिंजरे जैसी जगहों में भविष्य तलाश रहे हैं और दूसरी तरफ तैयार पड़ी सुविधाएं सरकारी फाइलों और तालों के बोझ तले दबी हुई हैं।

सवाल-जवाब

जयपुर के न्यू संजय नगर में किस कारण से स्कूल भवन बंद पड़ा है?
लगभग 32 लाख रुपये की लागत से तीन साल पहले नया भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन शिक्षा विभाग की प्रशासनिक लापरवाही और प्रक्रियात्मक देरी के कारण उस पर ताला लटका हुआ है।
बंद पड़े स्कूल भवन से कितनी दूरी पर बच्चे पिंजरेनुमा जगह में पढ़ रहे हैं?
मात्र 500 मीटर की दूरी पर एक अन्य स्कूल बिना अपने भवन के एक अत्यंत तंग और पिंजरे जैसी जगह में संचालित हो रहा है।
राजस्थान की विधानसभा में सरकार ने प्रदेश में बिना भवन वाले स्कूलों की क्या संख्या बताई है?
राजस्थान सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश में कुल 611 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के चल रहे हैं।
हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
विधायक बालमुकुंदाचार्य ने स्थिति को गलत बताते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और जल्द ही बच्चों को नए भवन में शिफ्ट कराने का आश्वासन दिया।
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