राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी की छह सौ किलोमीटर लंबी सवर्ण समाज अश्वमेध न्याय यात्रा बुधवार को शिमला पहुंची, जिसके बाद राज्य सचिवालय के बाहर तीखा टकराव देखने को मिला। यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिससे सचिवालय के मुख्य द्वार के पास कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय के गेट पर चढ़कर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
मनाली से शुरू हुई थी यात्रा
यह न्याय यात्रा मनाली से शुरू होकर विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए शिमला पहुंची थी। पार्टी अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने शिमला के आईएसबीटी से लेकर राज्य सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और झंडे थे। उन्होंने यूजीसी के प्रावधानों को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस सिलसिले में आगामी 10 जनवरी को दिल्ली में एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें कई राज्यों के लोग हिस्सा लेंगे।
विभिन्न राज्यों से जुटे लोग
इस विरोध प्रदर्शन में केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और अन्य कई राज्यों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य और हितों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। इसी आशंका के चलते उन्होंने केंद्र सरकार से इन प्रावधानों की गहराई से समीक्षा करने और इन्हें पूरी तरह रद्द करने की मांग की। इसके अलावा सवर्ण आयोग एक्ट को जल्द से जल्द लागू करने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को मिलने वाले लाभों की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाने की भी पुरजोर मांग उठाई गई।
महिपाल सिंह मखराना का बयान
करणी सेना के नेता महिपाल सिंह मखराना ने प्रदर्शन के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक समाज की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि मनाली से शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों में बिखरे सवर्ण समाज को एकजुट करना था। मखराना ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए प्रावधानों की वजह से शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि समाज ऐसा कोई भी नियम स्वीकार नहीं करेगा जो विद्यार्थियों के अधिकारों को कमजोर करता हो।
राजनीतिक दलों पर निशाना
महिपाल सिंह मखराना ने केंद्र सरकार के साथ-साथ देश के तमाम विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसा कोई कदम उठाती है जिससे समाज के एक बड़े वर्ग को आपत्ति है, तो विपक्ष का यह कर्तव्य बनता है कि वह उस मुद्दे को संसद और सड़क पर प्रभावी तरीके से उठाए। उन्होंने अफ़सोस जताया कि राजनीतिक दलों की तरफ से इस अहम मसले पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री समेत सभी प्रमुख राजनीतिक नेताओं से इस विषय पर अपनी स्थिति साफ करने की अपील की ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।
दिल्ली में बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने अंत में यह चेतावनी दोहराई कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया, तो दस जनवरी को दिल्ली की सड़कों पर बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। मखराना ने हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्यपाल से भी आग्रह किया कि वे उनका ज्ञापन स्वीकार करें और इन जायज मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सामान्य वर्ग के अधिकारों, यूजीसी की विसंगतियों और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े सवाल सबसे आगे रहे।


















