हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक मजबूत और खास पहचान बनानी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कुल्लू जिले में पैदा होने वाली सिंदूरी किस्म के अनार की एक बड़ी खेप संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के दुबई शहर में भेजी गई है। इस खेप का कुल वजन 1.3 मीट्रिक टन है। राज्य सरकार इस सफलता को स्थानीय किसानों और बागवानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हिमाचली फलों को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और अहम कदम मान रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वीरवार को एक बयान में कहा कि सरकार किसानों और बागवानों को उनकी मेहनत का सही और उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि हिमाचल के कृषि और बागवानी से जुड़े उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों में भी जगह मिले, ताकि उत्पादकों को अपने माल के लिए बेहतरीन विपणन के अवसर मिल सकें और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
छह सौ किसानों के संगठन से जुटाई गई खेप
दुबई भेजे गए इस सिंदूरी अनार को कुल्लू के स्थानीय किसानों और भुंतर स्थित किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ के माध्यम से सफलतापूर्वक एकत्र किया गया था। इस संगठन के साथ लगभग 600 किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस सामूहिक प्रयास के जरिए किसानों ने अपनी उपज को एक मंच पर इकट्ठा किया। दुबई के बाजार में अनार की इस खेप को पहुंचाने में जिन प्रमुख किसानों ने अपनी फसल की आपूर्ति की है, उनमें रीना देवी, संजय कुमार, नितिश कुमार और वीर सिंह गुलेरिया के नाम शामिल हैं। इन सभी की मेहनत का ही परिणाम है कि स्थानीय फल अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेर रहे हैं।
इस पूरे निर्यात की प्रक्रिया को आसान बनाने और इसे पूरा करने में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा के चंडीगढ़ में स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुत महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। इस सरकारी संस्था की मदद से स्थानीय किसानों को अपने फल बेचने के लिए सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहुंच बनाने का एक बहुत ही शानदार अवसर प्राप्त हुआ है, जिससे भविष्य में अन्य उत्पादों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।
गुणवत्ता सुधार पर जोर और ओमान को पहले भेजे गए फल
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसके लिए कृषि और बागवानी उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री से जुड़ी सुविधाओं को लगातार उन्नत किया जा रहा है और निर्यात को बढ़ावा देने के वास्ते हर संभव सहायता मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने राज्य के सभी किसानों और बागवानों से यह अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आधुनिक मांग और पसंद के अनुसार ही उच्च गुणवत्ता वाली फसलों और फलों की पैदावार करें। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जाए, तो हिमाचल के फल वैश्विक बाजारों में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान हमेशा के लिए स्थापित कर सकते हैं।
फलों के निर्यात को बढ़ावा देने की इस कोशिश की शुरुआत इसी साल जून के महीने में भी देखने को मिली थी, जब शिमला जिले के जड़ोल-टिक्कर और बागी इलाकों के छह प्रगतिशील किसानों ने मिलकर 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम की अपनी पहली खेप ओमान देश को भेजी थी। कुल्लू के अनार का दुबई जाना और शिमला की चेरी तथा प्लम का ओमान तक पहुंचना इस बात का साफ संकेत है कि हिमाचल के पारंपरिक बागवानी क्षेत्रों में पैदा होने वाली चीजों के लिए अब विदेशी बाजारों में लगातार नई संभावनाएं खोजी जा रही हैं। सरकार का पूरा ध्यान किसानों को बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था देने और उत्पादों के निर्यात का दायरा बढ़ाने पर है।























