देशभर की राजनीति में इन दिनों जेन-जी यानी युवा पीढ़ी को आकर्षित करने की होड़ मची हुई है. दिल्ली में हुए नीट परीक्षा आंदोलन के बाद से युवाओं की राजनीतिक ताकत पर चर्चा तेज हो गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई बड़े राजनीतिक दल जेन-जी मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए नई रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. हालांकि, जब बात राज्य स्तर के सर्वोच्च राजनीतिक मंचों की आती है, तो स्थिति अलग दिखाई देती है. हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा समय में एक भी जेन-जी विधायक मौजूद नहीं है, जबकि राज्य के ग्रामीण निकाय और पंचायत स्तर पर युवाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है.
हिमाचल विधानसभा में युवाओं की स्थिति
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भले ही 21 से 27 वर्ष की आयु वर्ग वाले जेन-जी श्रेणी का कोई प्रतिनिधि नहीं है, लेकिन 30 से 40 वर्ष की उम्र वाले 8 युवा विधायक चुनकर पहुंचे हैं. प्रदेश की सबसे कम उम्र की विधायक अनुराधा राणा हैं, जो लाहौल-स्पीति विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं. अनुराधा राणा का जन्म 1933 में हुआ था और वर्तमान में उनकी आयु 33 वर्ष है. उन्होंने मात्र 31 साल की उम्र में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी.
विधानसभा के अन्य युवा चेहरों में विक्रमादित्य सिंह का नाम शामिल है, जो 36 वर्ष के हैं. उन्होंने वर्ष 2017 में पहली बार 26 साल की उम्र में चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था. इसके अलावा करसोग से भाजपा विधायक दीप राज और आनी से भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार दोनों की उम्र 37-37 साल है. वहीं हमीरपुर सदर सीट से विधायक आशीष शर्मा 39 वर्ष के हैं. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य विधानसभा में युवा नेतृत्व तो मौजूद है, लेकिन जेन-जी वर्ग की सीधी हिस्सेदारी अभी शून्य बनी हुई है.
पंचायतों में जेन-जी का दिखा जबरदस्त दबदबा
विधानसभा के विपरीत हिमाचल प्रदेश के स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में जेन-जी प्रत्याशियों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. हाल ही में मई महीने में आयोजित हुए निकाय और पंचायत चुनावों में युवाओं का भारी उत्साह देखने को मिला. इस चुनाव में लगभग 52 हजार ऐसे मतदाता थे जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार मताधिकार का प्रयोग किया था. पहली बार वोट डालने वाले इन युवा मतदाताओं ने चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित किया.
पंचायत चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में जेन-जी वर्ग से करीब 10200 प्रत्याशियों ने पर्चे भरे थे. जांच और नाम वापसी के बाद 8 हजार से अधिक जेन-जी उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबला लड़ा. चुनाव नतीजों में 21 से 30 वर्ष की आयु वाले लगभग 4000 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की और छोटी सरकार की कमान अपने हाथों में ली. हालांकि शहरी निकायों की बात करें तो धर्मशाला, सोलन, मंडी और पालमपुर नगर निगमों में मिलाकर केवल एक ही जेन-जी प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल हो सका.





















