हिमाचल प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में अब छोटे बच्चों की नींव मजबूत करने के लिए बुनियादी स्तर से ही जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी। शिमला में शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कक्षा पहली से नैतिक शिक्षा का पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूली शिक्षा का ध्येय केवल किताबी ज्ञान देना या शैक्षणिक उपलब्धियां जुटाना नहीं है, बल्कि बच्चों के चरित्र का निर्माण करना और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना भी सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
प्राथमिक स्तर से विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का विकास
मुख्यमंत्री ने इस नए नीतिगत कदम को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों के भीतर अनुशासन, करुणा, बड़ों के प्रति सम्मान और नागरिक उत्तरदायित्व की भावना बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए। जब विद्यार्थी शुरुआती कक्षा से ही इन नैतिक गुणों को सीखेंगे, तो वे आगे चलकर समाज के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे। इसके लिए प्राथमिक कक्षाओं के शैक्षणिक ढांचे में बदलाव लाकर मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि बच्चे सही और गलत का अंतर भलीभांति पहचान सकें।
सौ नए सीबीएसई स्कूलों में शिक्षक तैनाती और जेबीटी भर्ती
शिमला में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में सरकारी स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई का पाठ्यक्रम लागू करने की जमीनी प्रगति की भी गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जिन 100 नए सरकारी स्कूलों में सीबीएसई प्रणाली शुरू की जा रही है, वहां योग्य शिक्षकों और पर्याप्त प्रशासनिक कर्मियों की मौजूदगी तुरंत पक्की की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी नए पाठ्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी संसाधन और योग्य अध्यापकों का होना अनिवार्य शर्त है।
इसी योजना के तहत मुख्यमंत्री ने सीबीएसई मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए जूनियर बेसिक टीचर यानी जेबीटी के 600 खाली पदों को तेजी से भरने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि इन भर्तियों को समय पर पूरा किया जाए और चयनित 100 स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाए, ताकि नए सत्र में शिक्षण कार्य बिना किसी अड़चन के सुचारू रूप से चल सके।
कुल 4,800 पदों की भर्ती प्रक्रिया और गैर शैक्षणिक अमला
शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य में लागू की जा रही नई योजना आधारित भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत कुल 3,900 शिक्षकों और 900 गैर शिक्षक कर्मचारियों के पदों को भरने की प्रगति रिपोर्ट देखी गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों में स्टाफ की कमी को खत्म करने के लिए इस भर्ती अभियान को एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत आगे बढ़ाया जाए।
इसके अतिरिक्त सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में मिनिस्ट्रीयल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की जरूरतों का भी बारीकी से आकलन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित सरकारी नियमों और मानकों के अनुसार ही इन कर्मियों की आवश्यकता तय की जाए, जिससे स्कूलों का दैनिक प्रशासनिक कामकाज व्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके।
प्रशासनिक जवाबदेही और गुणवत्ता पर सरकारी बल
बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने और उन्हें आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को पाने के लिए लगातार निगरानी, जवाबदेही तय करने और सभी योजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इस अहम समीक्षा बैठक में शिक्षा सचिव डॉ. यूनुस, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली तथा विभाग के अन्य कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


















