हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित जुब्बल इलाके में हुए बहुचर्चित मर्डर मिस्ट्री को स्थानीय पुलिस ने सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-705 पर हुई इस सनसनीखेज वारदात के सिलसिले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। नेपाल भागने की ताक में बैठे दोनों नेपाली युवकों को शिमला के टूटीकंडी बस स्टैंड से दबोचा गया। पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए अपनी आगामी कार्रवाई और जांच में जुटी हुई है।
घटना की रात और पुलिस की शुरुआती जांच
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 की रात साहिल नामक एक शिकायतकर्ता अपने साथियों के साथ हाटकोटी से मंडोल की ओर जा रहा था। इसी दौरान दोची के समीप सड़क किनारे एक व्यक्ति गंभीर हालत में खून से लथपथ पड़ा हुआ दिखाई दिया। इस बात की सूचना तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को दी गई, जो मौके पर पहुंची और जांच के बाद व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल की गहन छानबीन के दौरान मुख्य सड़क से नीचे नाले की ओर जाने वाले एक कच्चे रास्ते पर भी खून के निशान पाए गए। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने हत्या का अंदेशा जताते हुए अपनी तफ्तीश शुरू की थी।
मामला दर्ज और मृतक की पहचान
इस पूरे मामले के संबंध में पुलिस थाना जुब्बल में 19 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के अंतर्गत हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच में मृतक की पहचान 33 वर्षीय धीरेन्द्र थापा के रूप में हुई, जो भीम बहादुर का पुत्र था और मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था। वह जुब्बल तहसील के दोची डाकघर के अंतर्गत आने वाले बाउली गांव में रहकर मजदूरी का काम करता था। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं।
शराब के नशे में हुआ था खूनी संघर्ष
पुलिस की विस्तृत जांच में यह हैरान करने वाला खुलासा हुआ है कि वारदात से पहले मृतक और दोनों आरोपी एक साथ बैठकर शराब का सेवन कर रहे थे। इसी मेल-जोल और शराब पीने के दौरान उनके बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक और झगड़ा शुरू हो गया। गुस्से में आकर एक आरोपी ने शराब की एक बोतल तोड़ दी और उसके टूटे हुए धारदार कांच से धीरेन्द्र का गला रेत दिया। इस घातक हमले के कारण धीरेन्द्र थापा की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद दोनों आरोपियों ने मिलकर उसके शव को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे फेंक दिया, ताकि यह पूरी घटना एक सड़क दुर्घटना लगे और किसी को शक न हो।
गिरफ्तारी और भागने की नाकाम कोशिश
कानून के शिकंजे से बचने के लिए दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद कर लिए थे और उस क्षेत्र से फरार होने की कोशिश में जुट गए। पुलिस के मुताबिक, वे दोनों सबसे पहले खड़ापत्थर पहुंचे और वहां से एक पिकअप वाहन में लिफ्ट लेकर ठियोग के पास तक आए। रास्ते में पुलिस की कड़ी नाकाबंदी और चेकिंग के डर से उन्होंने अपनी पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। इसके बाद वे शिमला के रास्ते नेपाल भागने की पुख्ता तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और स्थानीय मुखबिरों से सूचनाएं जुटाकर एक जाल बिछाया। इसी के आधार पर पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को शिमला के आईएसबीटी से धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 27 वर्षीय सूर्य दमाई उर्फ अनिश, जो नेपाल के गुल्मी जिले का रहने वाला है, और 27 वर्षीय सुमन खड़का, जो नेपाल के सल्यान जिले का निवासी है, के रूप में हुई है। पुलिस अब दोनों को अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है और मामले की गहराई से जांच जारी है।



















