हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां प्रसव के दौरान अस्पताल में एक नवजात बच्ची के पैर की हड्डी टूट जाने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित बच्ची के पिता विकास ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की अपील की है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह हादसा किस परिस्थिति में हुआ और इसके लिए असल में कौन जिम्मेदार है।
स्वास्थ्य मंत्री से मिले परिजन
इस गंभीर मामले को लेकर नवजात बच्ची के पिता विकास ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल से प्रत्यक्ष रूप से मुलाकात की है। मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री के सामने अपनी बात रखी और डॉक्टर का केवल तबादला करने के बजाय उसे तुरंत प्रभाव से निलंबित करने तथा उसका मेडिकल लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने की मांग की। विकास के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें इस पूरे प्रकरण में उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया है। इसके साथ ही परिवार ने यह मांग भी की है कि सरकार उनकी बच्ची के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी ले तथा इस चिकित्सकीय लापरवाही के लिए सीधे तौर पर डॉक्टर को उत्तरदायी ठहराया जाए।
ऑपरेशन के दौरान टांग खींचने का आरोप
घटना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बच्ची की मां ने आरोप लगाया कि सिजेरियन डिलीवरी के समय डॉक्टर ने यह कहा था कि बच्चा अंदर घूम रहा है और उसे जबरन टांग से बाहर खींचकर निकाला जाए। यह पूरा वाकया 10 अक्टूबर को सामने आया था, जिसके बाद नवजात को बेहतर इलाज के लिए आईजीएमसी शिमला ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। मां का कहना है कि अब इस मामले में यह तर्क दिया जा रहा है कि ऐसी स्थिति जन्मजात भी हो सकती है, लेकिन परिवार का साफ तौर पर मानना है कि यह डॉक्टर की स्पष्ट लापरवाही का नतीजा है। विकास का कहना है कि उन्होंने इस वाकये को लेकर अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी विचार-विमर्श किया है और ऑपरेशन के दौरान बरती गई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि चिकित्सकीय लापरवाही की वास्तविक पुष्टि औपचारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन ने बनाई जांच कमेटी
पीड़ित परिवार का मुख्य उद्देश्य अपनी बेटी का सुरक्षित भविष्य और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के समक्ष यह मांग भी रखी है कि बच्ची को आई चोट और उसके वर्तमान उपचार की स्थिति का मूल्यांकन देश के वरिष्ठ विशेषज्ञों से करवाया जाए, ताकि भविष्य में इस शारीरिक क्षति का बच्ची के विकास पर कोई बुरा असर न पड़े। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद सोलन अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सोलन के सीएमओ राकेश कंवर ने मीडिया को जानकारी दी है कि उन्हें इस संबंध में औपचारिक शिकायत प्राप्त हो चुकी है, जिसके बाद एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल करेगी और उसके आधार पर आगामी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकों की कथित लापरवाही के कारण मरीजों को परेशानी या जान गंवाने के मामले पहले भी तूल पकड़ चुके हैं। अतीत में कुल्लू जिले में मंजू शर्मा और ऊना जिले में रीना देवी की प्रसव के दौरान हुई मौतों पर काफी बड़ा हंगामा खड़ा हुआ था। उस दौरान जनता के भारी रोष को देखते हुए कुल्लू और ऊना के मामलों में संबंधित दोषी डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया था। अब सोलन के इस ताजा मामले ने एक बार फिर से सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रसव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर जनता और प्रशासन दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं।


















