शिमला जिले में स्थित रामपुर बुशहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में उस वक्त माहौल बेहद हल्का-फुल्का हो गया जब सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। प्रशासनिक प्रोटोकॉल से परे हटकर मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ लंबी बातचीत की और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस दौरान छात्रों ने राजनीतिक निर्णयों, स्थानीय बुनियादी ढांचे और निजी प्राथमिकताओं से जुड़े कई दिलचस्प विषय उनके सामने रखे।
कक्षा में फोन के इस्तेमाल पर रोचक वाकया
सभागार में चल रहे संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की निगाह एक बच्चे पर गई जो हाथ में मोबाइल थामे हुए था। संस्थान में डिजिटल गैजेट्स पर रोक होने के कारण उन्होंने तुरंत उस विद्यार्थी से इसका कारण पूछा। बच्चे ने बिना झिझक उत्तर देते हुए कहा कि उसकी माताजी ने विशेष तौर पर मुख्यमंत्री की तस्वीर लेने के लिए यह फोन सौंपा था। इस भोलेपन भरे उत्तर पर मुख्यमंत्री मुस्कुरा उठे और सभा में मौजूद सभी लोग ठहाके लगाने लगे।
हंसी-मजाक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने अनुशासनात्मक नियमों के महत्व को समझाया। उन्होंने रेखांकित किया कि शैक्षणिक परिसरों में फोन संबंधी पाबंदियों का अक्षरशः पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाने की अपील करते हुए अध्ययन के साथ-साथ मैदानी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा दी।
जीवन निर्माण और दिनचर्या पर विद्यार्थियों को परामर्श
एक छात्रा ने जब यह प्रश्न रखा कि किताबों के अतिरिक्त खुद को तराशने के लिए कौन से कदम उठाने चाहिए, तो मुख्यमंत्री ने संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि प्रारंभिक आयु वर्ग के दौरान खेलकूद और रचनात्मक शौक व्यक्तित्व को संवारने में अहम भूमिका निभाते हैं। बच्चों को घरों के भीतर खेले जाने वाले खेलों और बाहरी शारीरिक श्रम वाली क्रीड़ाओं में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, क्योंकि बचपन का दौर दोबारा लौटकर नहीं आता।
अध्यापकों की प्रशासनिक व्यस्तताओं पर चर्चा
बातचीत आगे बढ़ी तो एक छात्रा ने शिक्षकों को शिक्षणेत्तर जिम्मेदारियां सौंपे जाने की समस्या उठाई। उसका तर्क था कि इससे अध्यापन का कार्य प्रभावित होता है। इस गंभीर प्रश्न पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कहीं ड्यूटी से बचने के लिए टीचर ने तो नहीं पूछवाया है ये सवाल?” हालांकि इसके तुरंत बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था बना रहा है जिससे गुरुजनों को गैर-शैक्षणिक दायित्वों से मुक्त रखा जा सके और वे अपनी पूरी ऊर्जा छात्रों के बौद्धिक विकास में लगा सकें।
सड़क जाम पर छात्रा की सक्रियता और नेतृत्व क्षमता
इलाके में लगने वाले भारी जाम का हवाला देते हुए एक अन्य छात्रा ने त्वरित राहत की गुहार लगाई। छात्रा की सामाजिक चेतना और निर्भीकता से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री ने चुटीले अंदाज में कहा, “आपको तो एमएलए बनाना पड़ेगा.” उन्होंने इस बात की खुलकर सराहना की कि कम उम्र में ही विद्यार्थी अपने परिवेश और नागरिक संकटों के प्रति जागरूक हैं। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र की आवागमन प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
व्यक्तिगत सफर, वकालत और सियासत की शुरुआत
एक छात्रा ने जानना चाहा कि सर्वोच्च पद पर आसीन होने के समय उनके मन में क्या भावनाएं थीं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साझा किया कि लक्ष्य हासिल होने पर उनकी आंखें नम हो गई थीं, जो दरअसल अपार हर्ष और संतोष के आंसू थे। उन्होंने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि मुकाम तक पहुंचने के लिए अनवरत प्रयास और समर्पण जरूरी है।
एक अन्य प्रतिभागी ने सवाल दागा कि यदि वे राजनेता न बनते तो उनकी दिनचर्या कैसी होती? इस पर उन्होंने सहजता से कहा, “अगर मैं मुख्यमंत्री नहीं होता तो मैं खेत में होता, खेती करता.” उन्होंने अपने अतीत का ब्योरा देते हुए बताया कि विधि स्नातक बनने के बाद उन्होंने पंद्रह दिनों तक अधिवक्ता की पोशाक पहनी थी, मगर उनका मन विधि व्यवसाय में नहीं रमा। छात्र राजनीति के जरिए कॉलेज में कक्षा प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर पार्षद, विधायक और फिर शीर्ष पद तक पहुंचा।
लोकसेवा का माध्यम और कार्यक्षेत्र का चुनाव
चिकित्सा अथवा इंजीनियरिंग छोड़कर राजनीति की राह चुनने के औचित्य पर उन्होंने कहा कि लोककल्याण के लिए जनसेवा का मंच एक सशक्त जरिया है। युवाओं को अपनी स्वाभाविक रुचि के अनुरूप ही पेशा चुनना चाहिए। हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बार जो व्यक्ति एमएलए बन जाता है फिर वह अन्य किसी व्यवसाय के अनुकूल नहीं रह पाता।
संवैधानिक प्रावधान और स्थानीय निकाय चुनाव
पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न पदों के लिए न्यूनतम पढ़ाई की सीमा निर्धारित न होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के नियम समझाए। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसी बंदिशें लागू करने के लिए संविधान संशोधन की अनिवार्यता होगी। जनता अपने विवेक से नेतृत्व चुनती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रांतीय विधानसभा में कानून निर्माता के तौर पर उच्च शिक्षित व्यक्ति, एमबीबीएस चिकित्सक और अभियंता भी सेवा दे रहे हैं।
रचौली विद्यालय के नए परिसर को दो करोड़ की मंजूरी
सत्र के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रचौली की एक छात्रा ने अपनी संस्था के दो अलग-अलग स्थानों पर बंटे होने का संकट सामने रखा। उसने बताया कि एक भूखंड पर पर्याप्त जगह मौजूद है जहां एकीकृत परिसर खड़ा किया जा सकता है। तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने नए भवन निर्माण के वास्ते दो करोड़ रुपये जारी करने का औपचारिक ऐलान किया।
खानपान की पसंद और नशा मुक्ति का संकल्प
व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के दौर में एक विद्यार्थी ने उनके मनपसंद व्यंजन के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें स्थानीय पहाड़ी स्वाद सर्वाधिक प्रिय है और सिड्डू उनकी पहली पसंद है। संवाद की समाप्ति के पश्चात उन्होंने शैक्षणिक संस्थान से मादक पदार्थों के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाने वाली ‘एंटी चिट्टा’ पदयात्रा को रवाना किया। हाथों में नारे लिखी तख्तियां थामे विद्यार्थियों ने नशे के खात्मे की आवाज बुलंद की। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी उपस्थित किशोरों को नशा विरोधी शपथ दिलाई और समाज को इस बुराई से मुक्त कराने में अग्रणी योगदान देने का आह्वान किया।



















