हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सर्पदंश जागरूकता दिवस पर आयोजित एक विशेष कार्यशाला के दौरान लोगों को सांप के काटने से बचाव, सुरक्षात्मक उपायों और तत्काल की जाने वाली चिकित्सकीय देखभाल के प्रति जागरूक किया गया। इस आयोजन में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, रोटरी एवं रोट्रैक्ट क्लब, पंचायती राज संस्थाओं, जागोरी, चिन्मया संस्था और महिला मंडलों के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। राज्य में बरसात के मौसम के दौरान सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं, जिसके चलते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
झाड़-फूंक और घरेलू टोटकों से पूरी तरह बचें
कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश भारती ने स्पष्ट किया कि सांप के काटने पर किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, झाड़-फूंक या पारंपरिक घरेलू उपायों में उलझकर कीमती समय कतई नष्ट नहीं करना चाहिए। किसी भी सर्पदंश की घटना में समय पर मिलने वाला औपचारिक डॉक्टरी उपचार ही पीड़ित का जीवन बचा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले उसे घबराने से बचाएं और शांत रखें, ताकि शरीर में रक्त प्रवाह और जहर का फैलाव तेज न हो। काटे गए स्थान पर कभी भी चीरा या ब्लेड न लगाएं, न ही मुंह से जहर चूसने जैसी जोखिम भरी हरकत करें। मरीज को बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।
कांगड़ा में पाए जाने वाले खतरनाक सांप और उनके लक्षण
क्षेत्र में पाए जाने वाले जहरीले सांपों का ब्योरा देते हुए डॉ. भारती ने बताया कि कांगड़ा में कॉमन क्रेट और रसेल वाइपर सबसे प्रमुख विषैली प्रजातियों में शुमार हैं। इनके अलावा कोबरा भी बेहद जानलेवा प्रजाति है, जबकि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में हिमालयन पिट वाइपर के डसने के मामले सामने आ सकते हैं। रसेल वाइपर का विष सीधे रक्त संचार को प्रभावित करता है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव और कई अन्य गंभीर शारीरिक जटिलताएं जन्म ले सकती हैं। दूसरी ओर, कॉमन क्रेट बेहद खामोशी से शिकार बनाता है और अक्सर इसके काटने पर शरीर पर न तो कोई स्पष्ट निशान दिखता है और न ही सूजन या तेज दर्द महसूस होता है।
कॉमन क्रेट प्रायः रिहायशी घरों के भीतर, बिस्तरों और पशुशालाओं तक घुस जाता है। सुबह नींद से जागने के बाद यदि किसी व्यक्ति को पेट दर्द, जी मिचलाना या उल्टी जैसे लक्षण महसूस हों और रात के समय सांप के संपर्क में आने का हल्का सा भी अंदेशा हो, तो इसे हल्के में न लें। कॉमन क्रेट का न्यूरोटॉक्सिक जहर मानव तंत्रिका तंत्र और सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों को निष्क्रिय कर सकता है, जिससे मरीज की हालत कुछ ही घंटों में नाजुक हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में सांप के जहरीले होने या न होने की पहचान में समय बर्बाद किए बिना सीधे अस्पताल पहुंचना चाहिए और इलाज का फैसला डॉक्टरों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए।
घरों के आसपास रोकथाम और प्राथमिक सावधानी
सांपों को रिहायशी ठिकानों से दूर रखने के लिए घरों के आसपास नियमित साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है। परिसरों में चूहों की मौजूदगी सांपों को आकर्षित करती है, इसलिए चूहों की संख्या पर नियंत्रण पाना अनिवार्य है। घरों या बाड़ों के निकट अनावश्यक सूखी लकड़ियों, झाड़ियों या कबाड़ के ढेर जमा न होने दें, क्योंकि ऐसी जगहें सांपों के छिपने के मुफीद ठिकाने बनती हैं। खेतों या बगीचों में घास काटते समय पहले किसी लंबे डंडे से घास को अच्छी तरह हिला-डुला लें, ताकि छिपा हुआ कोई भी जीव वहां से हट जाए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंची दवा की सुविधा
चिकित्सीय बुनियादी ढांचे की जानकारी देते हुए डॉ. भारती ने बताया कि पूर्व में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता को लेकर मुश्किलें थीं, लेकिन अब यह जरूरी जीवनरक्षक दवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पर्याप्त मात्रा में मुहैया करा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का निरंतर प्रयास है कि आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवाओं में भी एंटी-स्नेक वेनम की सीधी सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज का उपचार शुरू किया जा सके।





















