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सोलन की नौणी यूनिवर्सिटी में भारी हंगामा, शिक्षकों के विरोध के बीच कुलपति ने खुद को कमरे में किया बंदहिमाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 9:42 am (1 घंटे पहले)· 0

सोलन की नौणी यूनिवर्सिटी में भारी हंगामा, शिक्षकों के विरोध के बीच कुलपति ने खुद को कमरे में किया बंद

हिमाचल प्रदेश के सोलन में नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति एच.एस. बावेजा ने शिक्षकों के हमले की आशंका जताते हुए खुद को कार्यालय में बंद कर लिया, जबकि शिक्षकों ने नोटिस और नियुक्ति विवाद पर मिलने न देने का आरोप लगाया है.

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को उस समय गंभीर तनाव पैदा हो गया, जब विश्वविद्यालय के कुलपति ने शिक्षकों द्वारा संभावित हमले की आशंका जताते हुए खुद को अपने ही कार्यालय कक्ष में बंद कर लिया. नौणी स्थित इस प्रतिष्ठित संस्थान में हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद कुलपति ने तुरंत पुलिस प्रशासन से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की. प्रशासनिक भवन के बाहर एकत्रित हुए शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों और शिकायतों को लेकर कुलपति से बातचीत करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन संवाद न हो पाने के कारण माहौल गरमा गया.

कुलपति से मिलने के प्रयास और तीन महीने का गतिरोध

कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वे किसी भी तरह के टकराव के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि केवल अपनी जायज शिकायतों को प्रशासनिक नेतृत्व के सामने रखना चाहते हैं. आंदोलनकारी शिक्षकों ने यह भी दावा किया कि वे बीते तीन महीनों से कुलपति एच.एस. बावेजा से मिलने का निरंतर प्रयास कर रहे थे, मगर उन्हें बातचीत का कोई अवसर प्रदान नहीं किया गया. सोमवार को जब यूनिवर्सिटी के कर्मचारी और शिक्षक अपनी बात रखने पहुंचे, तो वहां पहले से ही सुरक्षाकर्मी मुस्तैद थे. कर्मचारियों का आरोप है कि कुलपति की मौजूदगी के बावजूद उन्हें भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिसके बाद वे कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए.

नियुक्ति जांच और बर्खास्तगी की सिफारिश पर विवाद

इस पूरे विवाद में एक प्रमुख मुद्दा बेसिक साइंस विभाग की प्रमुख आशु चंदेल की नियुक्ति की वैधानिकता से जुड़ा हुआ है. पूर्व कुलपति राजेश्वर चंदेल की पत्नी आशु चंदेल ने आरोप लगाया है कि कुलपति एच.एस. बावेजा ने उनकी नियुक्ति को गैरकानूनी करार देते हुए उन्हें पद से बर्खास्त करने की औपचारिक सिफारिश की है. चंदेल के अनुसार, उनकी नियुक्ति की जांच कराने की मांग के सिलसिले में राज्य सतर्कता ब्यूरो को 24 पन्नों का एक विस्तृत पत्र भेजा गया है. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय में उनके कार्यभार संभालने के समय से लेकर अब तक भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के शासनकालों के दौरान कुल 11 कुलपति रह चुके हैं, लेकिन किसी ने भी उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई आपत्ति या सवाल नहीं उठाया था.

प्रशासन को खतरे की सूचना और उच्च अधिकारियों से संपर्क

दूसरी तरफ, कुलपति एच.एस. बावेजा ने इस पूरे गतिरोध पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मीडिया को बताया कि शिक्षकों की तरफ से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं. बावेजा के अनुसार, प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने उनके कार्यालय कक्ष में जबरन घुसने की कोशिश की, जिसके चलते उन्हें अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दरवाजा भीतर से बंद करना पड़ा. उन्होंने पूरे घटनाक्रम और संभावित खतरे से सोलन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को विधिवत अवगत कराया है. इसके साथ ही कुलपति ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी संस्थान के बिगड़ते हालात और सुरक्षा चिंताओं की जानकारी दी है.

राज्यपाल के कार्यक्रम और कारण बताओ नोटिस से उपजा रोष

यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच नाराजगी की एक अन्य प्रमुख वजह राज्यपाल के हालिया कार्यक्रम के बाद जारी किए गए नोटिस हैं. कर्मचारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम के पश्चात कई कर्मचारियों को नोटिस थमा दिए गए, लेकिन नोटिस जारी करने से पहले उनसे किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया और न ही उनका पक्ष सुना गया. आंदोलनकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई से पहले संबंधित कर्मियों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए. कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन नोटिस जारी करने के ठोस आधारों को स्पष्ट करे और मामले को सुलझाने के लिए सीधे संवाद की राह अपनाए.

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सवाल-जवाब

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति ने खुद को कार्यालय में क्यों बंद किया?
कुलपति एच.एस. बावेजा ने शिक्षकों की ओर से संभावित हमले की आशंका और जबरन कार्यालय में घुसने के प्रयास का हवाला देते हुए खुद को बंद कर लिया.
शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या था?
कर्मचारी राज्यपाल के कार्यक्रम के बाद बिना सुनवाई जारी किए गए नोटिसों और तीन महीने से कुलपति से न मिल पाने के कारण विरोध कर रहे थे.
आशु चंदेल से जुड़ा विवाद क्या है?
कुलपति ने आशु चंदेल की नियुक्ति को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने की सिफारिश की है, जबकि चंदेल का कहना है कि 11 कुलपतियों के कार्यकाल में कभी उनकी नियुक्ति पर सवाल नहीं उठा.
कुलपति ने सुरक्षा के लिए किन अधिकारियों से संपर्क किया?
कुलपति ने सोलन के पुलिस अधीक्षक (एसपी), हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को स्थिति से अवगत कराया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 मिनट पहले

ग्यारह कुलपति बदल गए और किसी को वो नियुक्ति गलत नहीं लगी, पर अब अचानक बर्खास्तगी की बात होने लगी। मामला कुछ ज़्यादा ही उलझा हुआ है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 मिनट पहले

अर्जुन जी, पुरानी सरकारों ने ध्यान नहीं दिया इसका मतलब यह तो नहीं कि जांच ही गलत हो। कई बार पिछली फाइलों पर बाद में ही नजर पड़ती है।

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

कुलपति और शिक्षकों के बीच ऐसा टकराव विश्वविद्यालय की साख पर बड़ा सवाल है। तीन महीने तक बात न बन पाना प्रशासनिक विफलता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

रोहन भाई, कुलपति को वाकई खतरा था या वो सिर्फ बचना चाह रहे थे, ये कैमरे के सामने बंद होने से साफ़ नहीं होता।

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