ओडिशा के धार्मिक तीर्थ पुरी में एक भोजनालय की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। यहां स्थित होटल स्वागत पर श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस भोजनालय में मांसाहारी खानपान तैयार किया जाता है, लेकिन वहां भगवान जगन्नाथ के पवित्र महाप्रसाद को मांसाहार के साथ एक ही थाली में परोसने और नियमित भोजन सामग्री में मिलाकर बेचने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही इलाके के लोगों में तीखा रोष फैल गया और प्रतिष्ठान के बाहर भारी तनाव की स्थिति बन गई।
पार्सल की जांच के दौरान सामने आई पूरी गड़बड़ी
इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब इलाके के कुछ नौजवान भोजन खरीदने के लिए इस भोजनालय पहुंचे थे। जब युवकों को पार्सल सौंपा गया, तो पैकेट की जांच करते हुए उन्हें परोसे गए खाने की बनावट और महक पर गहरा संदेह हुआ। भोजन की बारीकी से पड़ताल करने के बाद एक युवक ने सीधे तौर पर कहा कि महाप्रसाद के अंश को साधारण दाल और चावल के साथ-साथ बेसर और महूरा जैसे पारंपरिक व्यंजनों में खपाया जा रहा था। इतना ही नहीं, इसे मांसाहारी भोजन के पैकेट के साथ मिलाकर ग्राहकों को दिया जा रहा था।
संदेह पुख्ता होने के बाद जब परिसर के भीतरी हिस्से में देखा गया, तो वहां मिट्टी के कई पात्र रखे हुए मिले, जिनमें महाप्रसाद भरा हुआ था। तीर्थनगरी में श्रद्धा के केंद्र माने जाने वाले प्रसाद को एक मांसाहारी प्रतिष्ठान के भीतर इस तरह रखे देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए। देखते ही देखते मौके पर भारी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और भोजनालय प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
कुंभारपाड़ा पुलिस ने संभाला मोर्चा, संचालक ने दी सफाई
प्रतिष्ठान के बाहर विरोध प्रदर्शन और हंगामे की सूचना मिलते ही कुंभारपाड़ा पुलिस थाने का दस्ता तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। पुलिस कर्मियों ने वहां जमा उग्र भीड़ को समझा-बुझाकर स्थिति पर नियंत्रण पाया और मामले की प्राथमिक छानबीन शुरू की। मौके से मिले सामान और मिट्टी के बर्तनों के संबंध में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं तथा कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
दूसरी ओर, होटल स्वागत के संचालक मनोज कुमार दास ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। संचालक का दावा है कि उनके भोजनालय पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और निराधार हैं तथा उनके यहां ऐसा कोई काम नहीं किया जा रहा था। कुंभारपाड़ा पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रकरण के हर पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही यह तय होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, जबकि क्षेत्र में श्रद्धालुओं का गुस्सा लगातार बना हुआ है।















