हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के अत्यंत संवेदनशील नौ मील हिस्से में बनने वाले वायाडक्ट पुल की तकनीकी रूपरेखा में बड़ा बदलाव तय हुआ है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय ने पहले इस स्थान के लिए सिंगल पिलर संरचना का खाका तैयार करके मंजूरी के लिए भेजा था. दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय ने सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा के बाद उस एकल पिलर प्रारूप पर तकनीकी आपत्ति दर्ज कराई है, और पूरे ढांचे को डबल पिलर यानी दोहरे खंभों पर टिकाने का स्पष्ट निर्देश दिया है.
लगातार भूस्खलन की चुनौती और नए डिजाइन की जरूरत
नौ मील क्षेत्र की पहाड़ी लंबे अर्से से गंभीर भूस्खलन प्रवण क्षेत्र बनी हुई है. वर्ष 2023 और 2025 के मानसून सीजन के दौरान इस पहाड़ी से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा मुख्य सड़क पर आ गिरा था, जिसके चलते यातायात बार-बार ठप हुआ और यात्रियों को भारी संकट का सामना करना पड़ा. इसी लगातार बने खतरे को जड़ से खत्म करने के मकसद से करीब 350 मीटर लंबे वायाडक्ट पुल के निर्माण की विस्तृत योजना आगे बढ़ाई जा रही है.
प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी के अनुसार, आरंभिक चरण में 125 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ सिंगल पिलर ब्रिज का तकनीकी डिजाइन तैयार हुआ था. मुख्यालय स्तर पर जांच-पड़ताल के बाद जब इसमें फेरबदल के निर्देश मिले, तो डीपीआर तैयार करने वाली टीम ने अब दो पिलरों की नींव पर आधारित संशोधित डिजाइन पर काम शुरू कर दिया है. जैसे ही यह नया तकनीकी खाका तैयार हो जाएगा, संशोधित प्रस्ताव को अंतिम अनुमोदन के लिए दोबारा दिल्ली मुख्यालय प्रेषित किया जाएगा.
पहाड़ी इलाकों में क्या भूमिका निभाता है वायाडक्ट ब्रिज
तकनीकी दृष्टि से वायाडक्ट ब्रिज सड़क का एक ऐसा ऊंचा पुलनुमा गलियारा होता है, जिसे सीधी जमीन पर बिछाने के बजाय मजबूत पिलरों के सहारे हवा में खड़ा किया जाता है. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की इंजीनियरिंग संरचना का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीव्र ढलानों, बार-बार दरकती पहाड़ियों और भूस्खलन की मार झेलने वाले जटिल भूभागों के ऊपर से सुरक्षित रास्ता निकालने के लिए किया जाता है, ताकि नीचे की मिट्टी या पत्थरों के खिसकने से ऊपर का संपर्क मार्ग प्रभावित न हो.
मौजूदा सड़क को बचाने के लिए 35 करोड़ रुपये की सुरक्षा दीवार
जब तक 350 मीटर लंबा यह मुख्य वायाडक्ट ब्रिज बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक नौ मील वाले मौजूदा मार्ग से वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे, इसके लिए एनएचएआई समानांतर सुरक्षा कार्य भी कर रहा है. वर्तमान सड़क की बुनियाद को मजबूत रखने और ऊपर से आने वाले मलबे को रोकने के लिए नीचे से ऊपर तक एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी की जा रही है. सुरक्षा दीवार के निर्माण का यह ठेका लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से एक कार्यदायी कंपनी को सौंपा जा चुका है और जमीनी स्तर पर इसका निर्माण कार्य भी आरंभ हो चुका है.
इसके अलावा कीरतपुर-मनाली फोरलेन मार्ग पर यात्रियों की सहूलियत के लिए थलौट क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का बड़ा विस्तार प्रस्तावित है, जहां 200 करोड़ रुपये के बजट से 500 मीटर लंबी पहली बॉक्स टनल का निर्माण किया जाना है.






















