निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की बहुचर्चित फिल्म 'द ओडिसी' आज यानी 17 जुलाई को सिनेमाघरों में उतर चुकी है और एक्स पर आ रहे शुरुआती रिएक्शन बता रहे हैं कि नोलन ने एक बार फिर दर्शकों को झकझोर देने वाला सिनेमाई अनुभव रचा है। यह फिल्म होमर के उसी प्राचीन महाकाव्य पर आधारित है, जिसे सदियों से पश्चिमी साहित्य की सबसे अहम रचनाओं में गिना जाता रहा है, और रिलीज के चंद घंटों में ही इसे लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा छिड़ गई है। दर्शक फिल्म के भव्य दृश्यों, दमदार आईमैक्स प्रजेंटेशन और भावनात्मक रूप से गहरी कहानी की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। कुछ दर्शकों ने इसके कुछ हिस्सों की तुलना पुरानी ऐतिहासिक युद्ध फिल्मों से जरूर की है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म को लेकर माहौल पूरी तरह सकारात्मक नजर आ रहा है।
आईमैक्स स्क्रीनिंग क्यों बनी सबसे बड़ा चर्चा का विषय
'द ओडिसी' को लेकर ऑनलाइन सबसे ज्यादा बातें इसके बड़े पर्दे पर दिखने और सुनाई देने के अंदाज को लेकर हो रही हैं। जिन दर्शकों ने फिल्म को 70mm आईमैक्स फॉर्मेट में देखा है, यानी उस बड़े फॉर्मेट में जिसे नोलन अपनी भव्य प्रोजेक्ट्स के लिए लंबे समय से पसंद करते आए हैं, वे इस स्क्रीनिंग को अब तक देखे सबसे यादगार और बेजोड़ थिएटर अनुभवों में शुमार कर रहे हैं। एक दर्शक ने एक्स पर लिखा कि स्क्रीन का आकार, दिल की धड़कनें तेज कर देने वाला संगीत और भव्य नजारे मिलकर फिल्म को यादगार बना गए हैं, साथ ही यह भी जोड़ा कि नोलन अपनी फिल्में इसी पैमाने पर दिखाना चाहते हैं। दिनभर शेयर हो रहीं कई और पोस्ट में भी कुछ ऐसा ही जज्बा नजर आया। कई सिनेमाघरों ने दर्शकों को खास आईमैक्स टिकट और एक्सक्लूसिव पोस्टर भी बांटे, जिनकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से घूम रही हैं। तीन घंटे के करीब की इस फिल्म के दौरान पूरी स्क्रीनिंग में वे मोबाइल फोन को छूना तक भूल गए, और कई लोग इसे ही फिल्म की गहराई का सबसे बड़ा सबूत बता रहे हैं।
नोलन की कहानी कहने की शैली और कलाकारों के अभिनय को सराहना
भव्यता के अलावा नोलन के निर्देशन और उनकी कहानी कहने की शैली की भी खूब तारीफ हो रही है। कई शुरुआती रिएक्शन में कहा जा रहा है कि निर्देशक ने एक बार फिर अपनी पहचान बन चुकी नॉन-लीनियर यानी गैर-क्रमबद्ध कथाशैली का सहारा लिया है, जिससे पूरी फिल्म के दौरान तनाव और रोमांच बना रहता है। इसके अलावा फिल्म के दो दृश्य इतने डरावने बताए जा रहे हैं कि वे किसी हॉरर फिल्म का एहसास करा देते हैं। एक्टिंग के मोर्चे पर मैट डेमन और मॉर्टन के प्रदर्शन को बार-बार सराहा जा रहा है, और कई लोग इसे फिल्म के सबसे मजबूत पहलुओं में गिन रहे हैं। जिन दर्शकों ने अपने स्कूली दिनों में होमर की यह रचना पढ़ रखी है, उनके लिए यह कहानी कहीं ज्यादा निजी और भावनात्मक अनुभव बन सकती है, ऐसा मानने वालों की भी कमी नहीं है। नोलन ने हजारों साल पुराने इस ग्रीक महाकाव्य को आज के दर्शकों के लिए जिस खूबसूरती से रचा है, उसमें कहानी की मूल आत्मा और उसका भावनात्मक असर बिल्कुल कम नहीं होता।
'ट्रॉय' से तुलना और स्टार कास्ट पर छिड़ी बहस
फिल्म के कुछ नजारे देखकर दर्शकों को 2004 में रिलीज हुई ब्रैड पिट की फिल्म 'ट्रॉय' का ख्याल आ गया, जो अपनी कहानी के लिए इसी तरह ग्रीक पौराणिक कथाओं और प्राचीन युद्ध पर टिकी थी। फिर भी नेटिज़न्स की बड़ी तादाद यह कह रही है कि 'द ओडिसी' अपनी अलग पहचान बना चुकी है, जो असल में नोलन की खुद की विजुअल स्टाइल और उनकी महत्वाकांक्षा को दिखाती है। फिल्म की स्टार कास्ट पर भी अलग से चर्चा हो रही है। लीड रोल में मैट डेमन के काम को लगातार सराहा जा रहा है, जबकि टॉम हॉलैंड और जेंडया के किरदारों को लेकर दर्शकों के बीच बहस भी चल पड़ी है। कई फैंस को यह जानकर हैरानी हुई कि पौराणिक कहानियों में इन दोनों किरदारों का आपस में गहरा नाता रहा है, फिर भी पर्दे पर दोनों को साथ बहुत कम पल मिले हैं। इसके अलावा एक यूजर ने रिलीज से पहले उठ रहे विवादों को सिरे से खारिज करते हुए एक्स पर लिखा कि इलियट पेज को इस फिल्म में लेना कास्टिंग के लिहाज से एक शानदार कदम साबित हुआ है।
इन शुरुआती प्रतिक्रियाओं से एक बात साफ झलकती है, नोलन ने थियेटर के बड़े पर्दे को ध्यान में रखकर एक बार फिर एक असरदार फिल्म बनाई है। बड़े पैमाने के युद्ध दृश्य, दमदार साउंड डिजाइन और हर तरफ से मिल रही तारीफ के चलते 'द ओडिसी' ने अभी से दुनियाभर के दर्शकों को अपनी तरफ खींच लिया है। आने वाले दिनों में असली परीक्षा बॉक्स ऑफिस पर होगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा कि शुरुआती दौर की यह पॉजिटिविटी कमाई के आंकड़ों में तब्दील होती है या नहीं। फिलहाल के लिए तो नेटिज़न्स ने बिना समय गंवाए इसे इस साल की सबसे बड़ी फिल्मी घटनाओं में शुमार कर दिया है।





















