अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड की जोरदार तेजी अब सुस्त पड़ गई है। हफ्ते की शुरुआत में नई ऊंचाई तक पहुंचने के बाद पाउंड उतनी ही तेजी से नीचे लौट आया, और अब जानकारों का मानना है कि यह आगे बढ़ने के बजाय एक सीमित दायरे में ही घूमता रहेगा।
बहुत तेज चढ़ी, इसलिए फिसली
पूरे उतार चढ़ाव की नींव दो दिन पहले पड़ी, जब पाउंड उछलकर 1.3556 की ऊंचाई तक जा पहुंचा। उस वक्त करेंसी को रोक पाना मुश्किल दिख रहा था। UOB ने भी माना था कि यह तेजी जरूरत से ज्यादा और बहुत तेज रही है, फिर भी थमने का कोई साफ संकेत नहीं था। एक दिन पहले जब पाउंड 1.3540 पर था, तब बैंक का आकलन था कि इसमें और बढ़त मुमकिन है, लेकिन बाजार के बुरी तरह ओवरबॉट होने की वजह से कोई भी उछाल 1.3560 की जांच तक ही सीमित रह सकती है।
यहीं पर अनुमान गलत साबित हुआ। पाउंड 1.3560 की ओर बढ़ने के बजाय वहां तक पहुंचा ही नहीं। इसके उलट यह तेजी से लुढ़का और 1.3460 के निचले स्तर तक गिरने के बाद दिन के अंत में 0.43% की गिरावट के साथ 1.3480 पर बंद हुआ। UOB ने खुलकर माना कि उसका पहले का आकलन सही नहीं बैठा, क्योंकि ऊपर की ओर जिस जांच की उम्मीद थी वह हुई ही नहीं।
अभी पाउंड कहां खड़ा है
इस उठापटक से घबराए लोगों के लिए राहत की बात यह है कि बिकवाली अब ठंडी पड़ गई है। UOB इस तेज गिरावट को कुछ हद तक स्थिर मान रहा है, और आज एक और गिरावट के बजाय उसे पाउंड के सीमित दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है। नजदीकी दौर में इसका संभावित दायरा नीचे की तरफ 1.3450 और ऊपर की तरफ 1.3520 के बीच रहने के आसार हैं। यह तंग दायरा दिखाता है कि बड़ी उठापटक के बाद बाजार फिलहाल सुस्ता रहा है।
एक से तीन हफ्ते की तस्वीर
थोड़ा लंबा नजरिया देखें तो कहानी यही है कि रफ्तार पूरी तरह पलटी नहीं, बस धीमी पड़ी है। बुधवार को पाउंड में उछाल के बाद, 16 जुलाई को जब स्पॉट 1.3540 पर था, UOB का आकलन था कि नई तेजी इशारा कर रही है कि पाउंड ने अपनी बढ़त फिर शुरू कर दी है, और ऊपर की ओर 1.3590 का स्तर देखने लायक बताया गया था।
1.3460 तक की अचानक गिरावट इस अनुमान का हिस्सा नहीं थी, और इसने तेजी के भरोसे की हवा कुछ निकाल दी है। UOB ने अपना 'मजबूत सपोर्ट' स्तर 1.3450 पर बरकरार रखा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह जमीन टिकती है या नहीं। अगर पाउंड 1.3450 के नीचे साफ तौर पर टूटता है, तो इसका मतलब होगा कि नई ऊंचाई की ओर दौड़ने से पहले उसे कुछ वक्त एक जगह ठहरकर आधार बनाना पड़ेगा।
बाजारों में बना बेचैनी का माहौल
पाउंड की यह ठोकर ऐसे समय आई है जब पूरे बाजार में सतर्कता का माहौल है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन एशियाई शेयर बाजार तेज बिकवाली के लिए तैयार दिखे, क्योंकि उन्हें अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत मिले। गुरुवार को अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयर लुढ़के, और एडवांस चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट और गहरी हो गई, जिससे पूरा माहौल बिगड़ गया।
महंगाई के आंकड़ों ने तस्वीर में एक और परत जोड़ दी। जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महीने दर महीने 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे सालाना दर मई के 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई और लगातार तीन महीने से बढ़ रही महंगाई का सिलसिला टूट गया। कोर कीमतें महीने दर महीने स्थिर रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% रह गईं, और दोनों ही आंकड़े उम्मीद से कम रहे। महंगाई की यह नरमी ब्याज दरों और उसके साथ करेंसी बाजार का नजरिया भी बदल देती है।
क्रिप्टो बाजार अपनी अलग ही उथल पुथल से गुजर रहा है। इस साल की पहली छमाही में बिटकॉइन 34% से ज्यादा टूट चुका है। ईरान युद्ध की आशंकाओं के बावजूद जोखिम वाली संपत्तियों के लिए यह छमाही अच्छी रही, फिर भी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी इसका फायदा नहीं उठा पाई। जोखिम पसंद निवेशक अब तेजी से AI से जुड़े शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं और आगे कोई साफ ट्रिगर भी नहीं दिख रहा, ऐसे में बिटकॉइन साल की दूसरी छमाही में एक सीधा सवाल लेकर खड़ा है: क्या यह दोबारा मांग जुटा पाएगा, या गिरावट और गहरी होगी?




















