अंतरिक्ष की एक बड़ी खगोलीय घटना 12 अगस्त, बुधवार को होने जा रही है, जब चांद सूरज और धरती के बीच से गुजरते हुए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में रहने वाले लोग इसे नहीं देख पाएंगे, क्योंकि जिस वक्त यह घटना घटेगी, उस समय भारत में रात हो चुकी होगी। इसी वजह से इस बार की यह खगोलीय घटना भारतीय आसमान से गायब रहेगी, जबकि यूरोप के कई हिस्सों में लोग दिन के उजाले में सूरज को चांद की छाया में गायब होते देखेंगे।
सूर्य ग्रहण के कितने प्रकार होते हैं
सूर्य ग्रहण एक जैसा नहीं होता, इसके अलग-अलग रूप होते हैं। जब चांद सूरज को पूरी तरह ढक लेता है और कुछ मिनटों के लिए दिन में अंधेरा छा जाता है, उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जब चांद सूरज के केवल एक हिस्से को ढकता है और सूरज का बाकी भाग चमकता रहता है, तो वह आंशिक सूर्य ग्रहण होता है। इसके अलावा एक तीसरी स्थिति भी बनती है, जब चांद सूरज के ठीक बीच से गुजरता तो है लेकिन उसे पूरी तरह ढक नहीं पाता। ऐसे में सूरज के चारों ओर आग की चमकती अंगूठी जैसी आकृति नजर आती है, इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं। 12 अगस्त को होने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण की श्रेणी में आता है।
यह ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा
12 अगस्त 2026 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत के आसमान में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के वक्त भारत में रात रहेगी और यह खगोलीय घटना दिन के उजाले में ही देखी जा सकती है। हालांकि दुनिया के कुछ हिस्सों के लोग इसे साफ देख सकेंगे। यह ग्रहण ग्रीनलैंड और आइसलैंड में साफ नजर आएगा, वहीं स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों के साथ-साथ यूरोप के कई अन्य इलाकों में भी इसे पूर्ण या आंशिक रूप में देखा जा सकेगा। यही वजह है कि इस ग्रहण को लेकर दुनियाभर में खासी उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इन देशों में कुछ मिनटों के लिए दिन में ही सूरज पूरी तरह गायब हो जाएगा।
भारत में सूतक काल और पूजा-पाठ पर असर नहीं
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सूतक काल उसी जगह मान्य माना जाता है, जहां ग्रहण वास्तव में दिखाई देता है। चूंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में नजर ही नहीं आएगा, इसलिए यहां सूतक काल को लेकर कोई भी परंपरा लागू नहीं होगी। मतलब भारत में इस ग्रहण की वजह से न तो मंदिरों के पट बंद किए जाएंगे और न ही दैनिक पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक क्रियाकलापों पर कोई रोक रहेगी। श्रद्धालु अपनी सामान्य दिनचर्या और पूजा-अर्चना पहले की तरह जारी रख सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण का महत्व
भले ही यह ग्रहण भारत से नजर न आए, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को एक अहम ग्रह घटना माना जाता है। मान्यता है कि इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता, बल्कि यह अलग-अलग राशियों और लोगों की अपनी जन्म कुंडली के हिसाब से अलग-अलग तरह से पड़ सकता है। यही कारण है कि ग्रहण के प्रभाव को लेकर कोई एक सामान्य नियम सबके लिए लागू नहीं किया जा सकता। ज्योतिषियों की सलाह है कि ग्रहण के दौरान धैर्य बनाए रखें, जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें और इस समय को आध्यात्मिक कार्यों में लगाना बेहतर माना जाता है।
ग्रहण देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी
जो लोग उन देशों में हैं जहां यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, उनके लिए एक अहम चेतावनी भी है। सूरज को कभी भी बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर वाले खास चश्मे के सीधे नहीं देखना चाहिए। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला सामान्य धूप का चश्मा ग्रहण देखने के लिहाज से सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि यह आंखों को सूरज की तेज किरणों से पूरी तरह नहीं बचा पाता। ऐसे में बिना उचित सुरक्षा उपकरण के सीधे सूर्य की ओर देखने से आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।


















