भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट में सैकड़ों साल पुराना एक तालाब अब पूरी तरह नया रूप लेने जा रहा है। जिला प्रशासन ने शहर में मौजूद ऐतिहासिक कोठी तालाब को पर्यटकों के लिए आकर्षक ठिकाने में बदलने का काम शुरू कर दिया है, जो लंबे समय से बदहाल पड़ा था।
क्यों अहम है चित्रकूट का यह इलाका
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान अपने जीवन के करीब साढ़े ग्यारह यानी 11.5 साल इसी चित्रकूट में गुजारे थे। इसी वजह से हर साल यहां लाखों श्रद्धालु और सैलानी पहुंचते हैं। इतनी बड़ी तादाद में आने वाले पर्यटकों को देखते हुए प्रशासन शहर के पुराने पर्यटन ढांचे को संवारने में जुटा है, और करीब सौ साल पुराना कोठी तालाब इस मुहिम की ताजा कड़ी बन गया है।
तालाब को संवारने पर कितना खर्च
कोठी तालाब सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास परियोजना के तहत लगभग 2.26 करोड़ रुपये की राशि खर्च होनी है। निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बांदा इकाई को सौंपी गई है। फिलहाल परियोजना का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और अब तक इस पर तकरीबन 72 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यानी काम अभी शुरुआती दौर में ही है और आने वाले महीनों में इसकी रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।
तालाब किनारे कौन सी सुविधाएं तैयार हो रहीं
योजना के तहत तालाब के इर्द गिर्द कई तरह की नई सुविधाएं खड़ी की जा रही हैं। इनमें सैलानियों के खाने पीने के लिए कैफेटेरिया और फूड कोर्ट बनाया जा रहा है, तो बैटरी से चलने वाली नौकाओं को रखने के लिए अलग स्टोरेज ब्लॉक भी तैयार होगा। तालाब का पानी साफ सुथरा बना रहे, इसके लिए एरेटर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा परिसर में आकर्षक स्ट्रीट लाइटें, दिशा सूचक साइनेज, बेहतर बिजली व्यवस्था और खूबसूरत लैंडस्केपिंग पर भी काम चल रहा है। साथ ही घूमने आने वाले लोगों के बैठने और टहलने के लिए भी अलग से जगह विकसित की जा रही है, ताकि परिवार और बुजुर्ग यात्री आराम से समय बिता सकें।
जिलाधिकारी ने क्या बताया
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि पर्यटन सुविधाएं बेहतर बनाने के मकसद से इस परियोजना पर करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, इसके लिए अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम खुद समय-समय पर निर्माण स्थल का जायजा भी ले रहे हैं, ताकि काम में देरी या लापरवाही न हो।
आगे क्या बदलेगा
प्रशासन का मानना है कि जिस दिन कैफेटेरिया ब्लॉक, बैटरी चालित नौकाएं, फूड कोर्ट, स्ट्रीट लाइट, साइनेज, बिजली और लैंडस्केपिंग जैसे सभी काम पूरे हो जाएंगे, उस दिन चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को घूमने के लिए एक और खूबसूरत ठिकाना मिल जाएगा। इससे स्थानीय पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और जिले की पहचान एक आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र के तौर पर भी मजबूत होगी।




















