हास्य और मानवीय असहजता को पर्दे पर अनोखे अंदाज में उतारने वाले फिल्मकार नेथन फील्डर ने तीन साल तक दुनिया से छिपाकर एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसकी किसी को भनक तक नहीं थी। यह सीक्रेट फिल्म सितंबर की शुरुआत में टेल्यूराइड फिल्म फेस्टिवल में अचानक सामने आई। इस प्रोजेक्ट का नाम यू कैन सी एवरीथिंग है, जिसे नेथन फील्डर और लांस ओपेनहाइम ने मिलकर निर्देशित किया है। यह फिल्म थेरानोस की दोषी संस्थापक एलिजाबेथ होम्स और उनके साथी बिली इवांस के जीवन के उन अंतिम 34 दिनों का दस्तावेज है, जब होम्स जेल जाने की तैयारी कर रही थीं। लगभग एक दशक की लंबी सजा काटने सलाखों के पीछे जाने से ठीक पहले, होम्स ने फील्डर और उनकी टीम को अपने घर के भीतर कदम रखने की इजाजत दी थी।
तीन साल का कड़ा पहरा और गोपनीयता
इस पूरे प्रोजेक्ट को तीन वर्षों तक अत्यधिक गोपनीय रखा गया था। केवल कुछ दर्जन लोग ही इसके बनने के बारे में जानते थे। फील्डर के अनुसार, इस अत्यधिक गोपनीयता का पहला कारण यह था कि उस वक्त किसी को यह नहीं पता था कि एलिजाबेथ होम्स और उनका परिवार कहां रह रहा है। जब शूटिंग शुरू हुई, तो धीरे-धीरे पापराजी उस लोकेशन के इर्द-गिर्द मंडराने लगे थे। ऐसे में टीम किसी भी तरह की खबर बाहर नहीं आने देना चाहती थी, ताकि होम्स के साथ उनके संबंध और उनकी कानूनी स्थिति प्रभावित न हो।
इसके अलावा, अगर किसी प्रोजेक्ट के बारे में पहले से बातें फैलने लगें, तो लोगों की अपनी धारणाएं बन जाती हैं। फील्डर का मानना था कि किसी भी पूर्व-निर्धारित योजना के बिना पूरी तरह पर्दे के पीछे रहकर काम करना ही इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे बेहतर रास्ता था। यहां तक कि फिल्म निर्माण कंपनी ए24 को भी शुरुआती दौर में यह अंदाजा नहीं था कि पर्दे पर क्या रूप निकलकर आएगा। उन्होंने केवल इतना तय किया था कि अगर कुछ सार्थक नहीं निकलता, तो प्रोजेक्ट को पूरी तरह रद्द करने की स्वतंत्रता रहेगी।
छोटे से बीच हाउस में कैमरों का जाल
शूटिंग एक छोटे से बीच हाउस में की गई थी, जहां होम्स अपने साथी बिली इवांस और छोटे बच्चों के साथ रह रही थीं। फील्डर और उनकी तकनीकी टीम ने घर के कोने-कोने को रिकॉर्ड करने के लिए एक बेहद सटीक व्यवस्था बनाई थी। शुरुआत में दो कैमरों का इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर तीन कर दिया गया। एक कैमरा 12 मिलीमीटर के अल्ट्रा-वाइड लेंस पर सेट था, जो घर के पूरे मुख्य हॉल और लिविंग एरिया को एक साथ कवर करता था।
अन्य दो कैमरों में 25 से 250 मिलीमीटर के शक्तिशाली जूम लेंस लगाए गए थे। इन्हें घर के बिल्कुल किनारों और दूर के कोनों में स्थापित किया गया था। इस तकनीकी व्यवस्था का फायदा यह था कि घर के किसी भी हिस्से में होने वाली हलचल न केवल वाइड फ्रेम में कैद होती थी, बल्कि तुरंत क्लोज-अप शॉट में भी दर्ज कर ली जाती थी। टीम का आकार जानबूझकर बहुत सीमित रखा गया था, जिसमें मुख्य रूप से दो कैमरा ऑपरेटर, छायाकार डेविड बोलेन, कैमरा ऑपरेटर जोनाथन मिशेल और साउंड रिकॉर्डिस्ट रिचर्ड कार्लोस शामिल थे। सह-निर्देशक लांस ओपेनहाइम अक्सर घर के बाहर मॉनिटर संभालते थे।
पर्दे के पीछे से कैमरे के सामने आने की मजबूरी
फील्डर्स का इरादा शुरुआत में कैमरे के सामने आने का बिल्कुल नहीं था। वह केवल एक शांत प्रेक्षक के रूप में सब कुछ रिकॉर्ड करना चाहते थे। लेकिन घर के भीतर हालात ऐसे बने कि उन्हें खुद बातचीत में उतरना पड़ा। एलिजाबेथ होम्स और बिली इवांस लगातार उनसे संवाद करने की कोशिश करते थे। जब वे आपस में बात कर रहे होते, तब भी अचानक फील्डर से उनकी राय पूछने लगते।
जब माहौल शांत होता, तो फील्डर खुद कुछ सवाल पूछकर बातचीत की शुरुआत करते थे। धीरे-धीरे कैमरा ऑपरेटरों ने अपना रुख फील्डर की तरफ मोड़ना शुरू कर दिया। सबसे बड़ी बात यह थी कि होम्स और इवांस कई बार ऐसी बातें कह रहे थे जो एकतरफा प्रचार जैसी लगती थीं। फील्डर को लगा कि अगर किसी ने बीच में सवाल नहीं उठाए या हकीकत पर जोर नहीं दिया, तो यह उनके मनमुताबिक गढ़ी गई कहानी बनकर रह जाएगी। इसी वजह से उन्हें खुद फ्रेम के भीतर आना पड़ा ताकि वे तर्कों की पड़ताल कर सकें।
जेल से पहले का असहज तनाव
यह पूरा दौर इसलिए भी अत्यधिक भावनात्मक और विचित्र था क्योंकि होम्स को जल्द ही 11 साल से अधिक की जेल की सजा शुरू करनी थी। उनके छोटे बच्चे थे और यह उनके साथ बिताया जाने वाला आखिरी महीना था। फील्डर लगभग हर दिन उनसे कहते थे कि अगर उन्हें इस फैसले पर पछतावा हो रहा हो या कैमरे की मौजूदगी से परेशानी हो, तो वे किसी भी समय शूटिंग रोकने को कह सकते हैं। अगर तनाव बढ़ता या इवांस कैमरे को रोकने की कोशिश करते, तब भी फील्डर यही बात दोहराते थे।
हैरानी की बात यह रही कि पूरे 34 दिनों के दौरान होम्स या इवांस ने एक बार भी टीम को जाने के लिए नहीं कहा। फील्डर के लिए यह समझना बेहद मुश्किल था कि आजादी के आखिरी चंद हफ्तों में कोई व्यक्ति अपने निजी पलों में एक डॉक्यूमेंट्री क्रू को इतने करीब क्यों रहने देगा। जब उनसे पूछा गया कि होम्स ने उन्हें ही क्यों चुना, तो फील्डर ने स्वीकार किया कि यह बात आज तक उनके लिए एक पहेली बनी हुई है। होम्स ने फील्डर का बहुत सारा पुराना काम नहीं देखा था, सिवाय कुछ छोटी क्लिप्स के, हालांकि इवांस उनके काम से अधिक परिचित थे।
सिलिकॉन वैली का भ्रम और होम्स की असलियत
एलिजाबेथ होम्स को तकनीक जगत में लंबे समय तक एक क्रांतिकारी उद्यमी के रूप में पेश किया गया था, जिन्होंने रक्त परीक्षण की दिशा में बड़ी क्रांति का दावा किया था। बाद में जांच में सामने आया कि थेरानोस की तकनीक काम नहीं करती थी, जिसके बाद उन पर आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप साबित हुए। तकनीक की दुनिया में अक्सर तब तक दिखावा करने का चलन रहता है जब तक सफलता न मिल जाए, लेकिन होम्स ने इस दिखावे को कानूनी सीमाओं से बहुत आगे पहुंचा दिया था।
फील्डर्स ने पाया कि व्यक्तिगत बातचीत में होम्स किसी आक्रामक या चालबाज व्यक्ति की तरह बिल्कुल नहीं दिखती थीं। वे बहुत शांत, विनम्र और सौम्य स्वभाव से पेश आती थीं। उनके व्यवहार में नियंत्रण करने की कोई स्पष्ट छटपटाहट नहीं दिखती थी, जो कि जेल जाने की कगार पर खड़े किसी व्यक्ति में अपेक्षित होती है। वह लगातार सकारात्मक बनी रहती थीं और ऐसा लगता था कि उन्हें आखिरी समय तक यह भरोसा था कि कोई कानूनी अपील उन्हें जेल जाने से बचा लेगी।
बिली इवांस के साथ रिश्ते और नियंत्रण की जंग
फिल्म में होम्स और उनके साथी बिली इवांस के बीच की केमिस्ट्री भी कई सवाल खड़े करती है। इवांस अक्सर होम्स को अपनी पत्नी कहकर पुकारते थे, हालांकि उनके आधिकारिक वैवाहिक दर्जे को लेकर हमेशा एक अस्पष्टता बनी रही। जैसे-जैसे फिल्म के संपादन का काम अपने अंतिम चरण में पहुंचा, इवांस की तरफ से पूरे प्रोजेक्ट और फुटेज को नियंत्रित करने की कोशिशें तेज होने लगीं।
फील्डर्स और उनके एडिटर एडम लॉक-नॉर्टन को जब लगा कि इवांस फिल्म के स्वरूप को अपने पक्ष में मोड़ने का दबाव बना रहे हैं, तो निर्माताओं ने उनसे संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया। फिल्म के सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले तक इवांस को अंतिम कट नहीं दिखाया गया था और उनसे बातचीत कई हफ्तों से बंद थी।
जेल की सलाखों के पीछे से अचानक आया फोन
फिल्म के राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज होने से ठीक पहले एक अप्रत्याशित घटना घटी। महीनों से होम्स की तरफ से कोई संपर्क नहीं हुआ था, लेकिन एक शुक्रवार की सुबह फील्डर के फोन पर दो मिस्ड कॉल दर्ज हुईं। वॉइसमेल के विवरण से पता चला कि यह कॉल सीधे जेल से की गई थी। इसके तुरंत बाद तीसरी बार घंटी बजी और फील्डर ने फोन उठा लिया।
फोन पर एलिजाबेथ होम्स थीं। उन्होंने सामान्य बातचीत की, उनका हालचाल पूछा और बताया कि उन्हें फिल्म के रिलीज होने के बारे में कुछ भनक लगी है, हालांकि उन्होंने ज्यादा कुछ पढ़ा नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चों और कुछ निजी मामलों पर बात की। लेकिन कॉल समाप्त करने से ठीक पहले होम्स ने फील्डर से एक वाक्य कहा, मुझे तुम पर भरोसा है। उन्होंने इसी बात को दोबारा दोहराया। यह सुनकर फील्डर हैरान रह गए। छह महीने से अधिक समय तक पूरी तरह खामोश रहने के बाद जेल से अचानक इस तरह का संदेश आना उनके लिए आज भी एक ऐसा सवाल है, जिसका कोई सीधा जवाब उनके पास नहीं है।



















