त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में नरमी, जानें प्रमुख महानगरों के ताजा रेटदवा दुकान का बिजनेस शुरू करने की पूरी गाइड, जानें शुरुआती लागत और लाइसेंस प्रक्रियाकैलेंडर पर तय होने लगी अंतरंगता तो रिश्ते में घुटन बन गई शारीरिक नजदीकीडॉलर में सुस्ती के बीच वैश्विक बाजारों की नजर चीन की जीडीपी और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकीघरेलू गैस सिलेंडर के दामों में राहत बरकरार, महानगरों में जानिए 16 अक्टूबर के ताजा एलपीजी रेटहवा में उछलने वाली टेस्ला रोडस्टर का हुआ प्रदर्शन, लेकिन सड़कों पर उतरने के लिए 2028 तक करना होगा इंतजारबिहार के एनएच 80 पर टोल टैक्स महंगा, बालगुदर टोल प्लाजा पर इस साल तीसरी बार बढ़ी दरेंअमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोजगार आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ाववर्ष 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य, भारत को हर साल चाहिए 8 से 9 फीसदी की रफ्तारउत्तराखंड की लोक परंपरा में रचा-बसा हुड़का, जानिए क्यों माना जाता है यह भगवान शिव का प्रिय वाद्य
मुंबई प्रदर्शन के बाद इमरान खान को भारत छोड़ने का फरमान, जानिए ओसीआई कार्डधारकों के अधिकार और दोहरी नागरिकता के नियमपड़ताल
17 अक्तू॰ 2026, 12:57 am (2 घंटे पहले)· 0

मुंबई प्रदर्शन के बाद इमरान खान को भारत छोड़ने का फरमान, जानिए ओसीआई कार्डधारकों के अधिकार और दोहरी नागरिकता के नियम

मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने पर अमेरिकी नागरिक इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस जारी किया गया है। जानिए क्या भारत में ओसीआई कार्डधारकों को राजनीतिक प्रदर्शनों का अधिकार है और यह मामला ध्रुव राठी से कैसे अलग है।

फिल्म अभिनेता आमिर खान के भांजे और पूर्व बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी एफआरआरओ की ओर से भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। प्राधिकारियों ने उन्हें 28 अक्टूबर तक देश से बाहर जाने के लिए कहा है। यह कदम मुंबई में आयोजित एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी के बाद उठाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के बाद यह पूरा प्रशासनिक घटनाक्रम शुरू हुआ। इस शिकायत में दावा किया गया था कि विदेशी नागरिकता रखने के बावजूद इमरान खान ने भारत में धरना-प्रदर्शन में शिरकत की, जो विदेशी नागरिक कानूनों का सीधा उल्लंघन है। चूंकि इमरान खान के पास ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड है, इसलिए इस पूरे मामले ने भारत में रहने वाले भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों के कानूनी अधिकारों, विरोध प्रदर्शन में उनके शामिल होने की सीमा और भारत के दोहरी नागरिकता से जुड़े कड़े नियमों पर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

अगस्त क्रांति मैदान का प्रदर्शन और इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत

इस पूरे विवाद की जड़ें 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित एक सार्वजनिक प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उस दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी मैदान में एकत्र हुए थे। इसी भीड़ के बीच अभिनेता इमरान खान भी नजर आए। प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के क्रम में इमरान खान को हिरासत में ले लिया था। अगस्त क्रांति मैदान भारतीय स्वाधीनता संग्राम का एक ऐतिहासिक प्रतीक रहा है, जहां इस तरह का राजनीतिक जमावड़ा देखने को मिला।

ये भी पढ़ें

इसके ठीक दो दिन बाद यानी 12 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने मुंबई के गामदेवी पुलिस थाने में एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा। अपनी शिकायत में किरीट सोमैया ने साफ तौर पर उल्लेख किया कि इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनके पास भारतीय मूल के विदेशी नागरिक का दर्जा यानी ओसीआई कार्ड है। शिकायतकर्ता का तर्क था कि एक विदेशी नागरिक होने के नाते भारतीय जमीन पर चुनाव आयोग अथवा संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ राजनीतिक प्रदर्शनों में भाग लेना विदेशी अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना है। गामदेवी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत को तुरंत विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी एफआरआरओ को अग्रसारित कर दिया, जो भारत में विदेशी नागरिकों के आगमन, ठहरने और प्रस्थान से जुड़े नियमों की निगरानी करता है।

एफआरआरओ का निष्कासन नोटिस और कानूनी लड़ाई की तैयारी

पुलिस से शिकायत मिलने के बाद विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ने मामले की जांच की और 15 अक्टूबर को इमरान खान के नाम एक औपचारिक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया कि वह 28 अक्टूबर तक भारत की सीमा से बाहर चले जाएं। पुलिस प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह पुष्टि की कि एफआरआरओ के आदेश में इमरान खान को संयुक्त राज्य अमेरिका का निवासी बताया गया है और अधिनियम के नियमों के उल्लंघन के आधार पर देश छोड़ने की तय समय-सीमा निर्धारित की गई है।

इस प्रशासनिक आदेश के सामने आने के तुरंत बाद कानूनी हलचल तेज हो गई है। इमरान खान के कानूनी प्रतिनिधि ने यह स्पष्ट किया है कि वे इस निष्कासन नोटिस को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देने जा रहे हैं। अभिनेता के वकील का कहना है कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था और ओसीआई नियमावली के अंतर्गत ऐसा कोई स्पष्ट और बाध्यकारी प्रतिबंध नहीं है जो किसी ओसीआई कार्डधारक को शांतिपूर्ण जन-आंदोलन अथवा प्रदर्शन में खड़े होने से रोकता हो। वकील के अनुसार, इस आधार पर देश से बाहर जाने का फरमान सुनाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और संजय राउत का बयान

इमरान खान के खिलाफ इस प्रशासनिक कदम के सामने आते ही महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख नेता संजय राउत ने इस निष्कासन नोटिस की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी कई नामचीन हस्तियां और सेलिब्रिटीज मौजूद हैं जो अनिवासी भारतीय यानी एनआरआई का दर्जा रखते हैं और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं।

संजय राउत ने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा, "इमरान खान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यदि युवा पीढ़ी के समर्थन में खड़े होने के कारण उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा गया है, तो यह दर्शाता है कि सरकार डरी हुई है।" विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए नागरिकता और आव्रजन नियमों का इस्तेमाल औजार की तरह किया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का मानना है कि विदेशी नागरिकों को देश की संप्रभु लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में दखलंदाजी करने की छूट किसी भी परिस्थिति में नहीं दी जा सकती।

ध्रुव राठी के मामले से किस प्रकार अलग है इमरान खान का विवाद?

सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इमरान खान के मामले की तुलना प्रसिद्ध राजनीतिक टिप्पणीकार और यूट्यूबर ध्रुव राठी से की जाने लगी है। हालांकि, दोनों मामलों के कानूनी तथ्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जमीन-आसमान का फर्क है। दोनों ही प्रसंगों में नागरिकता और विदेशी नागरिकों पर लागू होने वाले नियमों की चर्चा जरूर हुई, लेकिन दोनों के खिलाफ की गई कार्रवाई का स्वरूप पूरी तरह अलग रहा है।

इमरान खान का मामला पूरी तरह स्थापित है कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के संप्रभु नागरिक हैं और उनके पास भारत का ओसीआई कार्ड है। उन्हें सरकार के संबंधित आव्रजन प्राधिकरण द्वारा सीधे तौर पर भारत छोड़ने का वैधानिक आदेश थमाया गया है। इसके विपरीत, ध्रुव राठी के मामले में 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के बाद केवल उनकी नागरिकता और आव्रजन स्थिति के सत्यापन की मांग उठी थी। वह प्रदर्शन एंटी-एसआईआर के विरोध में आयोजित किया गया था।

उस सत्यापन मांग के बाद ध्रुव राठी ने एक वीडियो साझा करते हुए अपना भारतीय पासपोर्ट सार्वजनिक रूप से दिखाया था और यह स्पष्ट किया था कि वे पूर्ण भारतीय नागरिक हैं। ध्रुव राठी ने यह भी दावा किया था कि उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया था और रिहा करने से पहले करीब 22 से 24 घंटे तक बैठाकर रखा गया था। अतः इमरान खान और ध्रुव राठी के मामलों में सबसे बड़ा बुनियादी फर्क यह है कि इमरान खान को विदेशी साबित मानते हुए देश से निष्कासन का नोटिस मिला है, जबकि ध्रुव राठी के संबंध में सिर्फ नागरिकता के सत्यापन की प्रारंभिक मांग की गई थी। किसी व्यक्ति की नागरिकता की जांच की मांग भर होने से यह कतई साबित नहीं होता कि वह विदेशी है या उसने किसी कानून का उल्लंघन किया है।

क्या ओसीआई कार्डधारक भारत में राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा ले सकते हैं?

यह सवाल इस पूरे विवाद का सबसे अहम कानूनी पहलू बनकर उभरा है। भारतीय कानूनी व्यवस्था के अनुसार, ओसीआई कार्डधारक भारतीय मूल के विदेशी नागरिक होते हैं, न कि भारत के नागरिक। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्र होने और संगठन बनाने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। संविधान का यह सुरक्षा चक्र स्पष्ट रूप से केवल और केवल भारत के नागरिकों के लिए सुरक्षित है, विदेशी नागरिकों को यह अधिकार समान रूप से प्राप्त नहीं है।

फिर भी, क्या किसी विदेशी नागरिक अथवा ओसीआई कार्डधारक का किसी प्रदर्शन में उपस्थित होना स्वतः अवैध माना जाएगा? इस बिंदु पर कानूनी जानकारों की राय बंटी हुई है। अधिवक्ता सचिन नायक के अनुसार, ओसीआई नियमों में ऐसा कोई प्रत्यक्ष और स्पष्ट प्रावधान नहीं लिखा है जो केवल किसी सार्वजनिक विरोध सभा में उपस्थित होने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बनाता हो। किसी गतिविधि को कानून का उल्लंघन माना जाएगा या नहीं, यह उस विशेष स्थिति, प्रदर्शन की प्रकृति और उस व्यक्ति पर लागू व्यक्तिगत प्रतिबंधों पर निर्भर करता है।

इसके साथ ही भारत सरकार के पास नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7डी के तहत यह असाधारण शक्ति होती है कि वह निर्धारित आधारों पर किसी भी व्यक्ति का ओसीआई पंजीकरण रद्द कर सकती है। इमरान खान के मामले में विधिक कार्रवाई का आधार पूरी तरह इस बात पर टिका होगा कि जांच प्राधिकारियों ने उनके निष्कासन आदेश में किन विशिष्ट धाराओं और शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया है। किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में खड़े होना, कोई राजनीतिक शिकायत होना या आव्रजन उल्लंघन का आरोप लगना अपने आप में किसी को आपराधिक रूप से दोषी नहीं ठहरा देता और न ही स्वतः देश से निकाले जाने का अंतिम आधार बन जाता है, जब तक कि न्यायिक समीक्षा पूरी न हो जाए।

भारत में ओसीआई कार्डधारकों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?

ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई व्यवस्था भारतीय मूल के प्रवासियों को अपनी मातृभूमि से जोड़े रखने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। ओसीआई कार्डधारकों को भारत आने-जाने के लिए जीवनभर का बहु-प्रवेश वीजा यानी मल्टीपल-एंट्री लाइफटाइम वीजा दिया जाता है। वे बिना किसी अलग रोजगार वीजा के भारत में सामान्य रूप से रह सकते हैं और काम कर सकते हैं, बशर्ते वे प्रासंगिक श्रम और विदेशी नियमों का पालन करते हों।

संपत्ति के मामलों में भी ओसीआई कार्डधारकों को कई अधिकार मिले हुए हैं। वे भारत में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां खरीद सकते हैं। हालांकि, उन पर यह स्पष्ट प्रतिबंध लागू रहता है कि वे देश में किसी भी प्रकार की कृषि भूमि, फार्महाउस या बागवानी से जुड़ी जमीन नहीं खरीद सकते। इस प्रतिबंध का उद्देश्य देश के कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा करना है।

जहां तक राजनीतिक और नागरिक अधिकारों का सवाल है, ओसीआई कार्डधारकों को भारत में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं होता। वे न तो लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी राज्य की विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर केवल भारतीय नागरिक ही नियुक्त हो सकते हैं, ओसीआई कार्डधारक नहीं। ओसीआई का दर्जा भारत में बिना शर्त हमेशा बने रहने का अधिकार भी नहीं देता। यदि सरकार को लगता है कि किसी कार्डधारक ने नियमों की अवहेलना की है, तो नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7डी के तहत उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। संक्षेप में कहें तो ओसीआई दर्जा केवल कुछ खास आव्रजन और आर्थिक सुविधाएं देता है, यह भारतीय नागरिकता का विकल्प बिल्कुल नहीं है।

भारत में ओसीआई कार्ड के लिए पात्रता की शर्तें

हर कोई व्यक्ति ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर सकता। इसके लिए कानून में स्पष्ट और सख्त पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। कोई भी विदेशी नागरिक इस दर्जे के लिए तभी पात्र माना जाता है जब वह निम्नलिखित में से किसी एक श्रेणी में आता हो

  • 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद की नागरिकता: ऐसा कोई भी व्यक्ति जो 26 जनवरी 1950 को अथवा उसके बाद कभी भी भारत का नागरिक रहा हो।
  • संविधान लागू होने के समय की पात्रता: वह व्यक्ति जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत का नागरिक बनने की पूरी योग्यता रखता था।
  • नए शामिल हुए भूभाग के निवासी: ऐसा व्यक्ति जो किसी ऐसे भूक्षेत्र से ताल्लुक रखता हो जो 15 अगस्त 1947 के बाद औपचारिक रूप से भारत का अभिन्न हिस्सा बना।
  • पात्र नागरिकों की संताने: उपर्युक्त श्रेणियों में आने वाले पात्र भारतीय नागरिकों के बच्चे, पोते-पोतियां, नाती-नातिन और परपोते-परपोतियां भी तय नियमों के तहत आवेदन कर सकते हैं।
  • विदेशी मूल के जीवनसाथी: किसी भारतीय नागरिक या पंजीकृत ओसीआई कार्डधारक का विदेशी मूल का पति या पत्नी भी आवेदन करने के योग्य हो सकते हैं, बशर्ते उनकी शादी कानूनी रूप से पंजीकृत हो और कम से कम दो लगातार वर्षों से अस्तित्व में हो।

इस योजना में कुछ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा अपवाद भी शामिल हैं। यदि कोई व्यक्ति स्वयं, अथवा उसके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी कभी पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक रहे हों, तो वह ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन करने का पात्र नहीं होता। इसके अलावा नागरिकता कानून के तहत अन्य सुरक्षा मानकों के आधार पर भी अयोग्यता तय की जा सकती है।

क्या कोई भारतीय दोहरी नागरिकता रख सकता है?

दुनिया के कई पश्चिमी देश अपने नागरिकों को दोहरी नागरिकता रखने की इजाजत देते हैं, लेकिन भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत यदि कोई भी भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य विदेशी संप्रभु राष्ट्र की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसी क्षण उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

जैसे ही कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता लेता है, उसे तुरंत अपना भारतीय पासपोर्ट प्राधिकारियों के समक्ष समर्पित यानी सरेंडर करना अनिवार्य होता है। ऐसा व्यक्ति भारतीय नागरिकों के लिए आरक्षित किसी भी अधिकार का उपभोग जारी नहीं रख सकता, जिसमें चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करना भी शामिल है। विदेशी नागरिकता लेने के बाद भारतीय मूल के लोग ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह कार्ड दूसरा भारतीय पासपोर्ट नहीं होता और न ही यह भारतीय नागरिकता को बहाल करता है। यह केवल एक विशेष दर्जा है जो बिना पूर्ण नागरिकता दिए कुछ यात्रा और वित्तीय सुविधाएं मुहैया कराता है।

मोदी सरकार के दौरान विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों में क्या बदलाव आए?

मई 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत सरकार ने वीजा, नागरिकता और विदेशी नागरिकों के विनियमन से जुड़े पूरे ढांचे में कई अहम नीतिगत और वैधानिक बदलाव किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य एक तरफ जहां यात्रा और पर्यटन को आसान बनाना रहा है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नागरिकों की ट्रैकिंग को मजबूत करना भी रहा है।

नवंबर 2014 में सरकार ने ई-टूरिस्ट वीजा कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसे बाद के वर्षों में दर्जनों देशों और विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए विस्तारित किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार करते हुए पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन यानी पीआईओ योजना का विलय ओसीआई योजना में कर दिया गया, जिससे प्रवासी भारतीयों के लिए दो अलग-अलग पहचान पत्रों का भ्रम समाप्त हुआ। वर्ष 2021 में सरकार ने ओसीआई कार्ड को दोबारा जारी कराने से जुड़े कई कड़े नियमों को सरल बनाया ताकि वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं को बार-बार नवीनीकरण की परेशानी न उठानी पड़े।

वर्ष 2019 में संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए के जरिए एक विशेष नागरिकता मार्ग तैयार किया गया। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को तय शर्तों के अधीन भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया। इस कानून को लागू करने के लिए नियमों की अधिसूचना वर्ष 2024 में जारी की गई।

इसके अलावा 1 सितंबर 2025 से देश में आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 प्रभावी हुआ, जिसने चार पुराने कानूनों का स्थान लिया। इस नए कानून के माध्यम से विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश, उनके रुकने, स्थानीय पंजीकरण और देश से प्रस्थान के सभी नियमों को एक एकीकृत और आधुनिक कानूनी ढांचे के तहत लाया गया है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि भारत की मौजूदा आव्रजन व्यवस्था के सभी घटक 2014 के बाद के नहीं हैं। उदाहरण के लिए, ओसीआई कार्ड योजना की मूल शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी, जबकि विदेशी नागरिकों की ऑनलाइन ट्रैकिंग करने वाली आईवीएफआरटी यानी आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग प्रणाली को पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2010 में स्वीकृति दी गई थी।

सवाल-जवाब

इमरान खान को भारत छोड़ने का आदेश क्यों दिया गया है?
मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के कारण एफआरआरओ ने अमेरिकी नागरिक इमरान खान को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
क्या ओसीआई कार्डधारक भारतीय नागरिक होते हैं?
नहीं, ओसीआई कार्डधारक भारतीय मूल के विदेशी नागरिक होते हैं और उन्हें भारतीय नागरिकों की तरह मतदान करने या चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होता।
क्या भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति है?
नहीं, नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9 के तहत किसी विदेशी देश की नागरिकता लेते ही भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
इमरान खान का मामला ध्रुव राठी के मामले से कैसे भिन्न है?
इमरान खान को विदेशी नागरिक होने के आधार पर देश छोड़ने का नोटिस मिला है, जबकि ध्रुव राठी के मामले में केवल नागरिकता सत्यापन की मांग हुई थी और उन्होंने अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाकर भारतीय नागरिक होने की पुष्टि की थी।
इमरान खान इस नोटिस के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठा रहे हैं?
इमरान खान के वकील ने घोषणा की है कि वे इस निष्कासन आदेश के खिलाफ बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp