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मोदी सरकार में बड़े बदलाव की तैयारी: राजनाथ सिंह के कैबिनेट से हटने की चर्चा, क्या बेटों की राजनीतिक सक्रियता बनी वजह?पड़ताल
8 जुल॰ 2026, 8:17 am (45 दिन पहले)· 2

मोदी सरकार में बड़े बदलाव की तैयारी: राजनाथ सिंह के कैबिनेट से हटने की चर्चा, क्या बेटों की राजनीतिक सक्रियता बनी वजह?

नरेंद्र मोदी सरकार के आगामी कैबिनेट विस्तार में कई बड़े चेहरों के बाहर होने की खबरें हैं, जिनमें राजनाथ सिंह का नाम प्रमुखता से शामिल है। पार्टी परिवारवाद के आरोपों से बचने और नई लीडरशिप को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है।

नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है। आगामी मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और ऐसी संभावना है कि इस सत्र से पहले ही कैबिनेट में होने वाले बदलावों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। सरकार के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य युवा नेतृत्व को आगे लाना है, जिसमें नए मंत्रियों की औसत आयु लगभग 46 वर्ष रहने का अनुमान है, जो नवनियुक्त बीजेपी अध्यक्ष की आयु के करीब है।

राजनाथ सिंह का संभावित बाहर होना

कैबिनेट में सबसे बड़ी हलचल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाहर होने की खबरों को लेकर है। आधिकारिक निर्णय लेने की प्रक्रिया किसी मंत्री के हाथ में नहीं होती, बल्कि एक बार फैसला हो जाने के बाद संबंधित व्यक्ति को लिखित सूचना दी जाती है। राजनाथ सिंह को इस बदलाव के बारे में सूचित किए जाने की चर्चा है और वे इस कदम के लिए मानसिक रूप से तैयार भी बताए जा रहे हैं। यद्यपि अंतिम समय तक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन उनके बाहर होने की संभावना बहुत अधिक है।

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रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के सदस्य भी हैं, और स्वाभाविक रूप से इस पद से हटने पर उन्हें कमेटी की सदस्यता भी छोड़नी होगी। वे 2014 से इस कमेटी का हिस्सा रहे हैं। उनके जाने का कारण नेतृत्व के साथ किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं है, बल्कि उनके दोनों बेटों की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। छोटे बेटे नीरज सिंह को हाल ही में बीजेपी उत्तर प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बड़े बेटे पंकज सिंह पहले से ही नोएडा से विधायक हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों बेटों के पद पर होने के बावजूद राजनाथ सिंह को कैबिनेट में बनाए रखने से बीजेपी पर वंशवाद की राजनीति का आरोप लग सकता है। साथ ही, उनकी 75 वर्ष की आयु भी इस फेरबदल का एक कारक है। अभी तक उन्हें कोई दूसरा पद देने पर विचार नहीं हुआ है, और पार्टी में ऐसी कोई परंपरा भी नहीं है कि पद छोड़ने वाले मंत्री को तुरंत कोई वैकल्पिक पद दिया जाए।

अन्य मंत्रियों पर असर

कैबिनेट में शामिल कई अन्य चेहरे भी इस फेरबदल की जद में हैं। निर्मला सीतारमण का बाहर होना लगभग निश्चित माना जा रहा है। सरकार उन्हें दक्षिण भारत में एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंप सकती है। 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले सरकार नए आर्थिक उपाय पेश करना चाहती है और इसके लिए वह एक नया चेहरा सामने लाना चाहती है। हालांकि, सीतारमण के काम से कोई असंतोष नहीं है और वे अभी भी मोदी-शाह की कोर टीम का हिस्सा बनी रहेंगी। उनके स्थान पर वित्त मंत्रालय के लिए शक्तिकांत दास का नाम प्रमुखता से चल रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरोसा जीत चुके हैं और वर्तमान में उनके प्रधान सचिव हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नाम पर भी वित्त मंत्रालय के लिए चर्चा है।

हरदीप सिंह पुरी के भविष्य को लेकर भी अटकलें हैं। उनका नाम एपस्टीन फाइलों के समय चर्चा में आया था, हालांकि कोई सबूत सामने नहीं आया था और ये लिंक फेरबदल का कारण नहीं हैं। सरकार युवा चेहरों के लिए जगह बनाना चाहती है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मामला अलग है; उन्हें पद से हटाया नहीं जाएगा, बल्कि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कार्यकाल में बढ़ रहे विवादों को देखते हुए उन्हें ओडिशा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा, पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा जैसे मंत्री भी अपनी जिम्मेदारी में बदलाव देख सकते हैं। पंकज चौधरी वित्त राज्य मंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष हैं, और 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत वे मंत्री पद छोड़ सकते हैं। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा को भी केंद्रीय मंत्री पद से हटकर दिल्ली की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जा सकता है, ताकि वे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की छवि सुधारने में मदद कर सकें।

सवाल-जवाब

राजनाथ सिंह के कैबिनेट से बाहर होने का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
उनके दोनों बेटों की सक्रिय राजनीति और उनकी 75 वर्ष की आयु को उनके संभावित बाहर होने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
क्या निर्मला सीतारमण के कामकाज से सरकार नाखुश है?
नहीं, सरकार उनके कामकाज से असंतुष्ट नहीं है, उन्हें केवल संगठनात्मक भूमिका में नई जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है।
कैबिनेट फेरबदल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य युवा नेतृत्व को मौका देना और वंशवाद की राजनीति के आरोपों से बचना है।
धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से क्यों हटाया जा सकता है?
उन्हें पद से हटाया नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें ओडिशा का मुख्यमंत्री बनाने की संभावना है क्योंकि मौजूदा मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कई विवाद सामने आए हैं।
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