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सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत, चैट में मिले कोड वर्ड्स ने उलझाई जांचपड़ताल
3 जुल॰ 2026, 8:42 pm (45 दिन पहले)· 3

सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत, चैट में मिले कोड वर्ड्स ने उलझाई जांच

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल के घर से मिले पुराने मोबाइल और चैट में मिले कोड वर्ड्स ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। अदालत ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग ठुकराकर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को अदालत में पेश किया गया, जहां सरकारी पक्ष ने आगे की जांच के लिए दोनों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग रखी। जेएमएफसी ए. एम. विभूते की अदालत में हुई सुनवाई में सरकारी वकील अधिवक्ता राजश्री वीरकुड ने दलील दी कि जांच के दौरान सिया गोयल के घर से करीब एक साल पुराना एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है।

फोन से मिले डिजिटल सबूत

अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी के मौजूदा मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कर लिया गया है। हालांकि इन बरामद चैट में कथित तौर पर कई जगह कोड वर्ड और निकनेम इस्तेमाल किए गए हैं, जिनका मतलब समझने के लिए गहन जांच और आरोपियों से विस्तृत पूछताछ बेहद जरूरी बताई गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन कोडेड बातचीत के पीछे छिपे मकसद को समझे बिना जांच पूरी नहीं हो सकती।

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पुलिस के पांच आधार

सरकारी वकील अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने अदालत को बताया कि पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग के समर्थन में कुल पांच आधार पेश किए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपियों के बीच कथित कोड भाषा में हुई बातचीत का अर्थ समझने और उनसे बरामद डिजिटल सबूतों के आधार पर पूछताछ करने से जांच को आगे बढ़ाने में सीधी मदद मिलेगी।

बचाव पक्ष ने बताया फिशिंग इन्क्वायरी

वहीं बचाव पक्ष ने पुलिस की इस मांग का कड़ा विरोध किया। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसी केवल नए सबूत तलाशने की उम्मीद में एक फिशिंग इन्क्वायरी कर रही है। दलील दी गई कि 12 दिनों की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद अब बिना किसी ठोस और विशेष आधार के आगे की रिमांड नहीं मांगी जा सकती। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि चैट में मिले कथित कोड नेम और निकनेम के आधार पर आरोपियों से ऐसा स्पष्टीकरण मांगना जो उन्हें खुद के खिलाफ बयान देने पर मजबूर करे, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत मिली सुरक्षा के खिलाफ है।

अदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में

अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील दोहराते हुए कहा कि आगे की पुलिस हिरासत जांच में सीधे तौर पर सहायक साबित होगी और लंबित जांच पूरी करने के लिए यह बेहद जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला

दरअसल पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या लोहागढ़ किले में की गई थी। इस हत्याकांड में आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन पर लगा है। पुलिस लगातार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।

सवाल-जवाब

केतन अग्रवाल की हत्या कहां हुई थी?
पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या लोहागढ़ किले में की गई थी।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।
सिया गोयल के घर से पुलिस को क्या बरामद हुआ?
पुलिस को सिया गोयल के घर से करीब एक साल पुराना एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, और मौजूदा मोबाइल से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर किया गया है।
बरामद चैट में क्या खास बात सामने आई?
चैट में कथित तौर पर कोड वर्ड और निकनेम इस्तेमाल किए गए हैं, जिनका मतलब समझने के लिए गहन जांच जरूरी बताई गई है।
पुलिस ने हिरासत बढ़ाने के लिए अदालत में कितने आधार पेश किए?
सरकारी वकील अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने अदालत में कुल पांच आधार पेश किए।
बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग का विरोध क्यों किया?
बचाव पक्ष ने कहा कि यह सिर्फ फिशिंग इन्क्वायरी है, 12 दिन की हिरासत के बाद बिना ठोस आधार रिमांड नहीं मांगी जा सकती, और यह अनुच्छेद 20 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत ने आखिर में क्या फैसला सुनाया?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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