ईरान की राजधानी तेहरान के ऊपर 19 और 20 सितंबर 2026 की दरमियानी रात आसमान में एक बेहद अजीब और रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरती वस्तु उड़ती हुई नजर आई। पतंग जैसी दिखाई देने वाली इस रहस्यमयी आकृति को देखकर स्थानीय निवासियों और इंटरनेट पर कई लोगों ने इसे किसी दूसरी दुनिया से आए यूएफओ यानी अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट का नाम दे दिया। हालांकि सैन्य विश्लेषक और तकनीकी जानकार इसे किसी गुप्त निगरानी उपकरण, मानवरहित ड्रोन या आधुनिक वायु रक्षा परीक्षण से जोड़कर देख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ठीक 50 साल पहले 19 सितंबर के ही दिन तेहरान के आसमान में ऐसी ही एक रहस्यमयी उड़ने वाली वस्तु देखी गई थी। उस वक्त ईरानी वायुसेना ने उसकी पड़ताल के लिए अपने दो आधुनिक लड़ाकू विमान पीछे भेजे थे, लेकिन जैसे ही जेट उसके करीब पहुंचे, उनके रडार और संचार उपकरण अचानक ठप हो गए थे। अब एक बार फिर वही तारीख दोहराए जाने से इंटरनेट पर पुरानी फाइलों से लेकर आधुनिक हथियारों के परीक्षण तक की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वायरल वीडियो और तेहरान के एक्सप्रेसवे का दृश्य
तेहरान के आज़ादेगान एक्सप्रेसवे के पास से 19 सितंबर की रात बनाए गए दो अलग-अलग मोबाइल वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इनमें से एक वीडियो 23 सेकंड का है और दूसरा 15 सेकंड का है। दोनों ही फुटेज में एक घुमावदार बनावट वाली वस्तु काफी कम ऊंचाई पर उड़ती दिख रही है, जिसके सिरों और केंद्र से लाल, हरी और नीली रोशनियां चमक रही हैं। तेहरान की सड़कों पर रात के वक्त आने-जाने वाले लोगों ने इस असाधारण दृश्य को अपने कैमरों में रिकॉर्ड किया था।
इस पूरे मामले को लेकर ईरानी हुकूमत की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। सरकारी चुप्पी के बीच इस घटना को लेकर तीन प्रमुख व्याख्याएं सामने आ रही हैं, जिन पर रक्षा विशेषज्ञ और विश्लेषक बहस कर रहे हैं।
ड्रोन का समूह, आरजीबी पतंग या एआई का खेल
पहली संभावना ड्रोन या मानवरहित विमान से जुड़ी है। वीडियो फुटेज की जांच करने वाले जानकारों के अनुसार, यह रोशनी से लैस कोई आधुनिक ड्रोन या कम ऊंचाई पर उड़ने वाला विमान हो सकता है। यह भी संभव है कि अलग-अलग रंगों की लाइट ले जाने वाले कई छोटे ड्रोन एक साथ उड़ान भर रहे हों, जिससे नीचे से देखने पर एक ही बहुमंजिला संरचना का आभास हो रहा हो। सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी खातों ने भी संकेत दिया कि रोशनी का यह क्रम दूर उड़ रहे किसी दूरवर्ती ड्रोन या विमान के नेविगेशन लैंप जैसा दिखता है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोई अत्यंत उन्नत सैन्य ड्रोन या आधुनिक वाणिज्यिक क्वाडकॉप्टर हो सकता है। ऐसे उपकरणों की खासियत यह होती है कि उनके इलेक्ट्रिक मोटर की आवाज जमीन पर खड़े लोगों को बिल्कुल सुनाई नहीं देती। दूसरी तरफ, इंटरनेट पर कुछ लोगों ने दावा किया कि यह केवल लाल, हरी और नीली यानी आरजीबी लाइटों से सजाई गई एक बड़ी पतंग हो सकती है, जिसे शहरी इलाके में मनोरंजन के लिए उड़ाया गया हो। हालांकि युद्ध जैसे मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में इस तरह की पतंगबाजी को सैन्य पाबंदियों के चलते बेहद असंभव माना जा रहा है क्योंकि ईरानी सेना ने ऐसे सार्वजनिक कृत्यों पर सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं।
एलोन मस्क की कंपनी के एआई टूल ग्रॉक ने इस फुटेज के तकनीकी विश्लेषण के दौरान टिप्पणी की कि उन्नत जनरेटिव सिस्टम आज वास्तविक कैमरे जैसा दृश्य बना सकते हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि यह फुटेज फोन कैमरे से रिकॉर्ड की गई असली रिकॉर्डिंग मालूम होती है।
1976 की ऐतिहासिक घटना: जब लड़ाकू विमानों के सिस्टम बंद हो गए
इस ताजा हलचल के पीछे एक बड़ी वजह 50 साल पुरानी वह घटना है जिसे दुनिया भर में सबसे गहनता से परखे गए यूएफओ मामलों में गिना जाता है। 19 सितंबर 1976 की आधी रात को तेहरान के शेमिरान इलाके में कम से कम चार आम नागरिकों ने आसमान में एक चमकदार चीज देखी और तुरंत मेहराबाद हवाई अड्डे के एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी टॉवर को खबर दी थी।
एटीसी नियंत्रक हुसैन पिरोज़ी ने उस वस्तु को अपने रडार स्क्रीन पर भी देखा था। उन्होंने दर्ज कराया था कि वह वस्तु आयताकार थी, जिसके दोनों किनारों पर दो बड़ी रोशनियां थीं और बीच में एक लाल बत्ती गोल चक्कर काट रही थी। पिरोज़ी ने इस बारे में ईरानी वायुसेना के जनरल यूसेफी को सूचित किया। यूसेफी ने अपनी बालकनी से भी उस चमकीली वस्तु को देखा था और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक एफ-4 फैंटम द्वितीय लड़ाकू विमान को आसमान में रवाना कर दिया।
विमान में सवार लेफ्टिनेंट यद्दी नाज़ेरी ने अपने अनुभव में बताया था कि जब उनका जेट उस रहस्यमयी चीज से करीब 46 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचा, तो विमान का नेविगेशन, संचार और हथियार नियंत्रण सिस्टम अचानक पूरी तरह बंद हो गया। बेबस होकर उन्हें बेस की तरफ लौटना पड़ा, जहां पहुंचते ही सारे सिस्टम दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगे। नाज़ेरी ने बाद में कहा कि वह वस्तु ध्वनि की गति से दोगुनी यानी मैक 2 की रफ्तार से उड़ रहे उनके जेट से भी कहीं ज्यादा तेज भाग रही थी, जिससे उन्हें लगा कि उनका सामना किसी परग्रही तकनीक से हुआ है।
इसके करीब दस मिनट बाद पायलट मेजर परवेज़ जाफ़री दूसरे फैंटम लड़ाकू विमान को लेकर उड़े। उन्होंने अपने रडार पर करीब 50 किलोमीटर दूर उस वस्तु को तेजी से आगे बढ़ते पकड़ा। जाफ़री ने बताया था कि उसका आकार किसी बड़े बोइंग 707 यात्री विमान जितना विशाल था और उससे लाल, हरी, नारंगी और नीली रोशनियां निकल रही थीं, जिसके कारण उसके वास्तविक ढांचे को साफ देख पाना नामुमकिन था।
जाफ़री के अनुसार, उस बड़ी वस्तु से अचानक एक गोल आकृति अलग हुई और किसी मिसाइल की तरह सीधे उनके विमान की दिशा में बढ़ने लगी। जाफ़री ने उस पर मिसाइल दागने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण उनके हथियार नियंत्रण पैनल और वायरलेस संपर्क ने काम करना बंद कर दिया। अपनी रक्षा के लिए उन्होंने विमान को दूसरी तरफ मोड़ा। थोड़ी देर बाद वह वस्तु दूर निकल गई और जाफ़री को वापस लौटने का आदेश दिया गया। वापसी के रास्ते पर जाफ़री को अपनी बाईं तरफ एक हीरे के आकार का ढांचा दिखा, जिससे एक चमकदार चीज निकलकर नीचे सूखी झील में उतरी। अगली सुबह जब जाफ़री हेलीकॉप्टर से उस जगह पहुंचे तो वहां कुछ नहीं मिला, हालांकि पास के घरों के निवासियों ने पिछली रात तेज आवाज के साथ जोरदार रोशनी देखने की पुष्टि की थी।
ईरानी वायुसेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कमांडर शापुर अज़रबरज़िन के मुताबिक, वह वस्तु मैक 3 की अत्यधिक गति से उड़ रही थी। उस दौर में इतनी रफ्तार केवल अमेरिका और रूस के कुछ गिने-चुने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ही हासिल कर सकते थे। तत्कालीन समय में अमेरिका और ईरान के संबंध बेहद सौहार्दपूर्ण थे, लिहाजा इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट अमेरिकी वायुसेना और रक्षा खुफिया एजेंसी डीआईए को सौंपी गई थी। अमेरिका और यूरोप की कई संस्थाओं ने इसकी पड़ताल की, लेकिन आज तक यह साबित नहीं हो सका कि वह उल्कापिंड था, कोई विदेशी जासूसी विमान था या कोई अज्ञात आकाशीय परिघटना।
सीक्रेट सैन्य विमान और यूएफओ के भ्रम का इतिहास
इतिहास गवाह है कि कई बार नए गोपनीय सैन्य विमानों के परीक्षणों को आम लोग भूलवश परग्रही अंतरिक्ष यान मान बैठते हैं और सरकारें अपनी रणनीतिक गोपनीयता बनाए रखने के लिए उस समय सच उजागर नहीं करतीं। अमेरिकी राज्य नेवादा के रेगिस्तानी इलाके में स्थित बेहद सुरक्षित परीक्षण स्थल एरिया 51 इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी द्वारा 2013 में हासिल किए गए अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ था कि 1955 में एरिया 51 को विशेष रूप से यू-2 जासूसी विमान के गुप्त परीक्षण के लिए चुना गया था। आम वाणिज्यिक विमान उस समय 20,000 फीट और सैन्य विमान लगभग 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते थे, जबकि यू-2 विमान 60,000 फीट या उससे भी अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम था। इतनी ऊंचाई पर जब जमीन पर अंधेरा छा जाता था, तब भी यू-2 के पंखों पर सूरज की किरणें पड़ती थीं, जिससे नीचे से देखने वालों को वह चांदी की तरह चमकती अजीब आकृति नजर आती थी।
दस्तावेजों के मुताबिक, 1950 और 1960 के दशक में दर्ज की गई यूएफओ देखने की आधी से ज्यादा घटनाएं असल में यू-2 विमान की गुप्त उड़ानों का नतीजा थीं। चूंकि यह मिशन अत्यंत गोपनीय था, इसलिए वायुसेना जनता को सच नहीं बता सकती थी और लोग उड़न तश्तरियों की कहानियों पर यकीन करने लगे। इसी गुप्त ठिकाने पर बाद में ए-12 जासूसी विमान के भी परीक्षण हुए, जिसकी चमकदार टाइटेनियम बॉडी और उभरा हुआ ढांचा हूबहू उड़न तश्तरी जैसा प्रतीत होता था। वर्ष 1981 में एफ-117 नाइटहॉक स्टील्थ फाइटर जेट ने भी यहीं अपनी पहली उड़ान भरी थी, जिसका अनोखा तिकोना डिजाइन आम लोगों को किसी एलियन यान जैसा ही लगता था। जब भी कोई देश अत्यधिक गोपनीयता में नई तकनीक परखता है, तो उसकी असामान्य बनावट और रोशनी भ्रम पैदा करती है।
तेहरान के इस ताजा मामले में रक्षा विश्लेषकों का ध्यान इसलिए भी ज्यादा गया क्योंकि वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध और भारी कूटनीतिक तनाव चल रहा है। 19 सितंबर को ही ईरानी सेना और आईआरजीसी के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका के साथ तनातनी बढ़ती है, तो ईरान ऐसे नए हथियारों का इस्तेमाल करेगा जिनकी ताकत देखकर पूरी दुनिया हैरान रह जाएगी। मोहेब्बी ने कहा था कि ईरान लंबे युद्ध के लिए तैयार है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह रोशनी ईरान का कोई नया गोपनीय ड्रोन थी, अमेरिकी टोही उपकरण था या फिर कोई साधारण उपकरण।
अमेरिकी जांच रिपोर्ट और परग्रही दावों की वैज्ञानिक हकीकत
वैज्ञानिक शोध और सरकारी आंकड़ों के स्तर पर अब तक किसी भी देश की सरकार, अंतरिक्ष एजेंसी या स्वतंत्र वैज्ञानिक को परग्रहियों के अस्तित्व का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधीन अज्ञात असामान्य घटनाओं की जांच करने वाले संगठन आरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने स्पष्ट किया है कि सैकड़ों मामलों की जांच के बावजूद किसी एलियन तकनीक या उनके अवशेष मिलने का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है।
नवंबर 2024 में जारी आरो की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि 2022 से अब तक 1,652 अज्ञात असामान्य घटनाओं यानी यूएपी की शिकायतें मिली हैं। इनमें से ज्यादातर मामले सामान्य मौसम संबंधी गतिविधियों, पक्षियों के झुंड, उपग्रहों, सामान्य ड्रोनों, विमानों या टूटते तारों से जुड़े पाए गए। हालांकि 21 ऐसे मामले दर्ज किए गए जिनमें असामान्य तकनीकी विशेषताएं देखी गईं और जिनकी जांच अब भी जारी है।
आरो के निदेशक जॉन कोस्लोस्की ने कहा था कि भौतिकी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई और खुफिया सेवाओं के लंबे अनुभव के बावजूद वह इन 21 पेचीदा मामलों को समझने में असमर्थ रहे हैं और वह ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानते जो इनकी सटीक व्याख्या कर सके। ये सभी 21 मामले अमेरिकी सैन्य ठिकानों या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील प्रतिष्ठानों के आसपास हुए थे, जहां प्रत्यक्षदर्शियों के अलावा आधुनिक रडार और सेंसरों ने भी उन वस्तुओं को दर्ज किया था। इनमें अधिकांश वस्तुएं गोले, बेलनाकार या तिकोने आकार की थीं।
ऐसी ही घटनाओं में वर्ष 2024 में एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर एक गोल नारंगी ढांचा देखा था जो कार के आकार का था। उसकी लाल और नीली रोशनी से अधिकारी की गाड़ी के भीतर तक उजाला हो गया था और वह वस्तु बिना कोई आवाज किए तेजी से ऊपर निकल गई थी। एक अन्य मामले में दो लोगों ने एक विशाल बेलनाकार वस्तु देखी जो वाणिज्यिक विमान जितनी बड़ी थी और 15 सेकंड बाद अचानक ओझल हो गई। वहीं 2013 में प्यूर्टो रिको के एक हवाई अड्डे के पास भी एक विमान ने अज्ञात वस्तु को उड़ते देखा था। नासा ने भी सितंबर 2023 में स्पष्ट किया था कि अज्ञात घटनाओं का मतलब परग्रही यान नहीं होता, हालांकि कुछ मामलों में मानवीय या प्राकृतिक गतिविधि का सीधा उत्तर अब तक नहीं तलाशा जा सका है।


















