पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक टकराव की आहट के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को अप्रत्याशित आपातकालीन व्यवस्था में डाल दिया गया है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने 27 सितंबर को राजधानी की सड़कों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। इस आह्वान के सामने आते ही शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में सामान्य व्यवस्थाएं रोक दी गई हैं। सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के नियमित ऑपरेशनों को अचानक टाल दिया गया है, ताकि किसी भी संभावित बड़े टकराव के दौरान आने वाले घायलों के उपचार के लिए जरूरी संसाधन तैयार रखे जा सकें।
स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जिकल विभाग सतर्क, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
राजधानी के चिकित्सा तंत्र में आए इस अचानक बदलाव के तहत सर्जिकल विंग्स को किसी भी बड़ी अनहोनी से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से जारी आंतरिक निर्देशों के बाद डॉक्टरों, सर्जनों, नर्सों तथा अन्य सहायक कर्मियों की सभी प्रकार की छुट्टियां तुरंत समाप्त कर दी गई हैं। जो स्वास्थ्य कर्मी पहले से अवकाश पर चल रहे थे, उन्हें भी किसी देरी के बिना अपनी ड्यूटी पर लौटने की हिदायत दी गई है। अस्पतालों के बिस्तरों को आपातकालीन जरूरतों के लिए आरक्षित किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य केंद्रों में भारी तनाव का माहौल बन चुका है।
साधारण मरीजों की परेशानी बढ़ी, नियमित सर्जरी पर रोक
अस्पतालों में इस तरह के असामान्य कदमों का सीधा प्रभाव उन आम नागरिकों पर पड़ रहा है जो लंबे समय से गंभीर बीमारियों के इलाज और पूर्व-निर्धारित ऑपरेशनों की प्रतीक्षा कर रहे थे। चिकित्सालयों की ओर से ऐसे मरीजों को फोन करके सूचित किया जा रहा है कि उनकी सर्जरी की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं। गंभीर दर्द और चिकित्सकीय जटिलताओं से जूझ रहे परिवारों को अपनी बारी के लिए अनिश्चित काल तक रुकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आपातकालीन वार्डों और बिस्तरों को किसी राजनीतिक टकराव से पैदा होने वाली संभावित जनहानि के मद्देनजर खाली कराया जा रहा है, जिसने आमजन की कठिनाइयों को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्रशासनिक सतर्कता और संभावित भारी जनहानि की आशंका
प्रशासनिक स्तर पर सामने आए दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हताहतों की संभावना और मानवीय संकट से जुड़ी तैयारियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार नहीं किया गया है कि अस्पतालों में यह विशेष इंतजाम राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन लीक हुए निर्देशों की शब्दावली से साफ संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां किस स्तर के तनाव का अंदेशा जता रही हैं। चिकित्सा ढांचे को इस स्तर पर तैयार करना यह दर्शाता है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भारी आशंकाएं बनी हुई हैं।
इमरान खान के परिजनों पर प्रशासनिक कार्रवाई, बहनें हिरासत में
राजधानी में प्रदर्शन की तैयारियों के समानांतर सुरक्षा बलों ने पूर्व प्रधानमंत्री के परिजनों और करीबियों पर कानूनी शिकंजा कस दिया है। 27 सितंबर के जमावड़े को रोकने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई में इमरान खान की तीन बहनों, अलीमा खान, नोरीन नियाजी और डॉ. उजमा खान को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। एक ही दिन के भीतर खान परिवार से जुड़े करीब 8 सदस्यों को पूछताछ के दायरे में लाया गया, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे। अलीमा खान के बेटे शेरशाह खान के अनुसार, बच्चों को लंबी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन बहनों को हिरासत में ही रखा गया है।
सार्वजनिक व्यवस्था कानून के तहत तीस दिनों की नजरबंदी
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, अलीमा खान पर लोक व्यवस्था के रखरखाव से जुड़े कानून की धारा 3 के अंतर्गत कानूनी कदम उठाया गया है। लाहौर के जिला प्रशासन की ओर से पारित आदेश में उन्हें कम से कम तीस दिनों के लिए हिरासत में रखने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह के कड़े निर्देश नोरीन नियाजी और डॉ. उजमा खान पर भी लागू किए गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन से पहले समर्थकों को संगठित करने की किसी भी कोशिश को रोकना बताया गया है।
पीटीआई का देशव्यापी छापों का आरोप, संवैधानिक अधिकारों की मांग
इमरान खान के राजनीतिक दल ने सरकार की इन कार्यवाहियों का तीखा विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बताया है। पार्टी के प्रतिनिधियों का कहना है कि विभिन्न शहरों में उनके कार्यालयों की तलाशी ली जा रही है और पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर बंदी बनाया जा रहा है। संगठन का यह भी कहना है कि उनका प्रस्तावित कार्यक्रम अपने नेता की रिहाई और संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए पूर्णतः शांतिपूर्ण रहने वाला है, जबकि हुकूमत पहले से कड़े कदमों के जरिए आम लोगों के बीच डर का वातावरण पैदा करने में लगी है।
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताएं
अगस्त 2023 से कारागार में निरुद्ध 71 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य और सुरक्षा की स्थिति को लेकर उनके समर्थकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटने के उपरांत उन पर अनेक कानूनी मामले चलाए गए हैं। परिवार और पार्टी सहयोगियों का दावा है कि उनके मुख्य निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान को लंबे समय से उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी अद्यतन जानकारी न मिल पाने से समर्थकों का धैर्य जवाब दे रहा है, जिससे 27 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच चुकी है।



















