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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत की दो टूक, संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र प्रस्ताव पर सशर्त समर्थनजम्मू-कश्मीर
6 सित॰ 2026, 2:15 pm (62 दिन पहले)· 3

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत की दो टूक, संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र प्रस्ताव पर सशर्त समर्थन

संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के नक्शों को सटीक बनाने के प्रस्ताव पर भारत ने समर्थन तो दिया, लेकिन विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गलत चित्रण पर कोई समझौता नहीं होगा.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शों को और सटीक बनाने के लिए लाए गए एक प्रस्ताव पर भारत ने वोट तो पक्ष में डाला, लेकिन साथ ही एक कड़ी लक्ष्मण रेखा भी खींच दी. भारत ने वैश्विक मंच से यह संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मामले में किसी भी तरह की ढील बर्दाश्त नहीं होगी.

किस प्रस्ताव पर भारत ने डाला वोट

यह प्रस्ताव समान क्षेत्रफल वाले मैप प्रोजेक्शन यानी दुनिया के नक्शों को वैज्ञानिक और सटीक तरीके से बनाने के सिद्धांत को बढ़ावा देने से जुड़ा था. भारत ने इसके पक्ष में मतदान करते हुए साफ किया कि उसका समर्थन सिर्फ नक्शानवीसी की वैज्ञानिक पद्धति तक सीमित है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस वोट का मतलब किसी तीसरे पक्ष के बनाए किसी भी नक्शे को स्वीकार करना नहीं है, और अपनी क्षेत्रीय अखंडता के चित्रण में वह रत्ती भर भी बदलाव मंजूर नहीं करेगा.

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर विदेश मंत्रालय की सख्त चेतावनी

विदेश मंत्रालय ने इस मौके पर दुनिया को बेहद स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी. मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं, और अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा वैश्विक नक्शों में इन्हें भारत के आधिकारिक मानचित्र के मुताबिक ही दिखाया जाना जरूरी है. विदेश मंत्रालय ने आगाह किया कि भारतीय सीमाओं का कोई भी भ्रामक, अधूरा या गलत चित्रण पूरी तरह अस्वीकार्य होगा और इस पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी.

भारत इतना सतर्क क्यों है

भारत का यह रुख अचानक नहीं आया है. हाल के महीनों में पाकिस्तान की तरफ से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके का दर्जा बदलने की कोशिशों से जुड़ी हलचल तेज हुई है, जिसे कई खबरों में पाकिस्तान के अपने अनुच्छेद 370 जैसे कदम के तौर पर बताया गया है. इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से शक्सगाम घाटी जैसे इलाके चीन को सौंपे जाने के पुराने मामले भी भारत की चिंता की वजह रहे हैं. ऐसे हालात में कोई भी वैश्विक नक्शा अगर जम्मू-कश्मीर या लद्दाख को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाता है, तो वह भारत की संप्रभुता से जुड़ा सीधा मुद्दा बन जाता है.

2019 के फैसले के बाद कितना बदला लद्दाख-कश्मीर

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की तस्वीर तेजी से बदली है. सात साल में कश्मीर तक वंदे भारत ट्रेन पहुंच चुकी है और लद्दाख में करीब 1800 किलोमीटर तक सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है. यही वजह है कि भारत इन इलाकों को लेकर किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय अस्पष्टता को गंभीरता से लेता है और हर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति दोहराता आया है.

सवाल-जवाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के किस प्रस्ताव पर वोट किया?
भारत ने यूएनजीए में समान क्षेत्रफल वाले मैप प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया.
भारत ने इस वोट के साथ क्या शर्त रखी?
भारत ने कहा कि उसका समर्थन सिर्फ वैज्ञानिक नक्शानवीसी के सिद्धांत तक सीमित है, किसी तीसरे पक्ष के नक्शे को मान्यता देने तक नहीं.
विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर क्या कहा?
मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और वैश्विक नक्शों में इन्हें भारत के आधिकारिक मानचित्र के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए.
क्या भारत किसी गलत चित्रण पर रियायत देगा?
नहीं, विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारतीय सीमाओं के किसी भी भ्रामक, अधूरा या गलत चित्रण पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
इस सख्ती के पीछे हाल की कौन सी घटना है?
हाल में खबरें आई हैं कि पाकिस्तान पीओके का दर्जा बदलने की तैयारी में है, जिसे उसके अपने अनुच्छेद 370 जैसे कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर-लद्दाख में क्या बदला?
सात साल में कश्मीर तक वंदे भारत ट्रेन पहुंची है और लद्दाख में करीब 1800 किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क तैयार हो चुका है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·62 दिन पहले

यह घटनाक्रम सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के संवेदनशील दायरे से जुड़ा गंभीर मामला है। पीओके की स्थिति बदलने की कोशिशों और शक्सगाम घाटी के सामरिक विवादों के बीच, सीमा रेखाओं का कोई भी गलत चित्रण सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा और भू-राजनीतिक अखंडता को चुनौती देता है। भविष्य में वैश्विक मानचित्रों पर तकनीकी निगरानी और कानूनी तंत्र के जरिए कड़ा रुख अपनाना अनिवार्य होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के आधिकारिक नक्शे की अवहेलना न हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·62 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि भारत अब कूटनीतिक मंचों पर मानचित्रों के तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं के नाम पर होने वाली किसी भी रणनीतिक चूक को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। जिस तरह से सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचा तेजी से बदला है, उससे यह साफ होता है कि क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी बाहरी एजेंसी की अस्पष्टता को तत्काल और कड़ाई से चुनौती दी जाएगी। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संधियों और वैश्विक डेटा प्लेटफॉर्मों पर भारत की पैनी नजर रहना तय है।

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