संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शों को और सटीक बनाने के लिए लाए गए एक प्रस्ताव पर भारत ने वोट तो पक्ष में डाला, लेकिन साथ ही एक कड़ी लक्ष्मण रेखा भी खींच दी. भारत ने वैश्विक मंच से यह संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के मामले में किसी भी तरह की ढील बर्दाश्त नहीं होगी.
किस प्रस्ताव पर भारत ने डाला वोट
यह प्रस्ताव समान क्षेत्रफल वाले मैप प्रोजेक्शन यानी दुनिया के नक्शों को वैज्ञानिक और सटीक तरीके से बनाने के सिद्धांत को बढ़ावा देने से जुड़ा था. भारत ने इसके पक्ष में मतदान करते हुए साफ किया कि उसका समर्थन सिर्फ नक्शानवीसी की वैज्ञानिक पद्धति तक सीमित है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस वोट का मतलब किसी तीसरे पक्ष के बनाए किसी भी नक्शे को स्वीकार करना नहीं है, और अपनी क्षेत्रीय अखंडता के चित्रण में वह रत्ती भर भी बदलाव मंजूर नहीं करेगा.
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर विदेश मंत्रालय की सख्त चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने इस मौके पर दुनिया को बेहद स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी. मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं, और अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा वैश्विक नक्शों में इन्हें भारत के आधिकारिक मानचित्र के मुताबिक ही दिखाया जाना जरूरी है. विदेश मंत्रालय ने आगाह किया कि भारतीय सीमाओं का कोई भी भ्रामक, अधूरा या गलत चित्रण पूरी तरह अस्वीकार्य होगा और इस पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
भारत इतना सतर्क क्यों है
भारत का यह रुख अचानक नहीं आया है. हाल के महीनों में पाकिस्तान की तरफ से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके का दर्जा बदलने की कोशिशों से जुड़ी हलचल तेज हुई है, जिसे कई खबरों में पाकिस्तान के अपने अनुच्छेद 370 जैसे कदम के तौर पर बताया गया है. इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से शक्सगाम घाटी जैसे इलाके चीन को सौंपे जाने के पुराने मामले भी भारत की चिंता की वजह रहे हैं. ऐसे हालात में कोई भी वैश्विक नक्शा अगर जम्मू-कश्मीर या लद्दाख को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाता है, तो वह भारत की संप्रभुता से जुड़ा सीधा मुद्दा बन जाता है.
2019 के फैसले के बाद कितना बदला लद्दाख-कश्मीर
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की तस्वीर तेजी से बदली है. सात साल में कश्मीर तक वंदे भारत ट्रेन पहुंच चुकी है और लद्दाख में करीब 1800 किलोमीटर तक सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है. यही वजह है कि भारत इन इलाकों को लेकर किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय अस्पष्टता को गंभीरता से लेता है और हर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति दोहराता आया है.


















