जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच आपसी तनातनी का एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक सरकारी ऑनलाइन बैठक के दौरान आईएएस अधिकारी राजीव रंजन और जेकेएएस अधिकारी बीनीश वानी के बीच तीखी बहस हो गई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ा रुख अपनाया है और इस पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार ने इस मामले की तह तक जाने और सच्चाई का पता लगाने की पूरी जिम्मेदारी आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त एवं सचिव आईएएस अधिकारी मनदीप कौर को सौंपी है। जांच अधिकारी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह आगामी 15 दिन के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करें और उसे जम्मू-कश्मीर सरकार के समक्ष प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा किया। अपने इस बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऑनलाइन मीटिंग का वायरल वीडियो खुद देखा है और पहली नजर में वरिष्ठ अधिकारी का आचरण उस स्तर का नहीं पाया गया जिसकी उम्मीद एक वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा के अधिकारी से की जाती है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इसके बाद जिस तरह से जूनियर जेकेएएस अधिकारी को धमकियां दी गईं, उसने पूरे हालात को और अधिक बिगाड़ दिया। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे को मुख्य सचिव के समक्ष अत्यंत सख्ती के साथ उठाया है।
जूनियर अधिकारी की सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रशासनिक ढांचे की सीमाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते आईएएस अधिकारियों पर सीधा प्रशासनिक नियंत्रण 'लोक भवन' के पास निहित है, जो मुख्यमंत्री के दायरे से बाहर है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में मुख्य सचिव को यह कड़े निर्देश दिए हैं कि यह बात पूरी तरह सुनिश्चित की जाए कि संबंधित जूनियर जेकेएएस अधिकारी के खिलाफ किसी भी प्रकार की बदले की कार्रवाई या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आगे की उचित कार्रवाई तय करेगी।





















